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दीनदयाल उपाध्याय और दलबदल !

दलबदल एक ऐसा संक्रामक रोग है जो हमारी संसदीय व्यवस्था को खोखला कर रहा है। इस रोग की गंभीरता को अन्य लोगों के अलावा जनसंघ के संस्थापक और भारतीय जनता पार्टी के लाखों सदस्यों के प्रेरणास्त्रोत दीनदयाल उपाध्याय ने भी समझा था। उन्होंने 27 फरवरी

रोहित वेमुला की तरह भंवर मेघवंशी भी सांस्थानिक हत्या का शिकार होते होते बचे !

( हिमांशु पण्ड्या )"मेरी कहानियां, मेरे परिवार की कहानियां – वे भारत में कहानियां थी ही नहीं. वो तो ज़िंदगी थी.जब नए मुल्क में मेरे नए दोस्त बने, तब ही यह हुआ कि मेरे परिवार के साथ जो हुआ, जो हमने किया, वो कहानियां बनीं. कहानियां जो लिखी

‘हिन्दुत्व राजनीती एवं बहुजन’ विषय पर बौद्धिक चर्चा एवं पुस्तक लोकार्पण !

राजस्थान में हिन्दुत्व राजनीति के बढते खतरों के मध्य इस विषय पर एक परिचर्चा एवं आर.एस.एस. के पूर्व स्वयंसेवक द्वारा लिखित पुस्तक का लोकार्पण पी.यू.सी.एल. राजस्थान द्वारा 18 जनवरी 2020 को प्रौढ शिक्षा समिति,झालाना

कारसेवक की किताब पर संघ ख़ामोश क्यों है ?

(लखन सालवी )दलित चिंतक भंवर मेघवंशी की सद्य प्रकाशित पुस्तक ‘‘मैं एक कारसेवक था’’ को 1 दिसम्बर की रात को पढ़ना आरम्भ किया और 2 दिसम्बर को सुबह 11 बजे इसका आखिरी पन्ना पढ़ा।यह जबरस्त पुस्तक है, जिसमें संघ के एक स्वयंसेवक की कहानी है। वो

साहस के पहाड़ पर खड़ा एक कारसेवक !

( उम्मेद सिंह )आज राजस्थान में ही नहीं वरन् देशभर में दलित आयोजन, आन्दोलन, सम्मेलन व सेमीनार में अनिवार्य नाम बन चुके भँवर मेघवंशी अपनी नई किताब ‘मैं एक कारसेवक था ‘ में संघर्ष के पहाड़ पर खड़े एक कारसेवक नज़र आते है। पुस्तक उनकी आत्मकथा

आर एस एस के प्रति आगाह करती एक जरूरी किताब !

 ( तारा राम गौतम ) 20 अक्टूबर 2019 को जयपुर मैं पी एम बौद्ध द्वारा आयोज्य एक कार्यक्रम में शरीक होने का अवसर मिला। कार्यक्रम में कई लोगों से मिलकर अच्छा लगा। वहां पर पी एम बौद्ध की व्यस्तता के कारण उनसे क्षण भर की मुलाकात ही हुई, कोई

आम चुनाव 2019: भारतीय प्रजातंत्र का एक नया अध्याय !

(नेहा दाबाड़े)   दुनिया के सबसे बड़े प्रजातंत्र में हाल में संपन्न आम चुनाव में भाजपा को एक बार फिर देश पर अगले पांच साल तक राज करने का जनादेश प्राप्त हुआ है. लोकसभा की 543 में से 303 सीटें जीत कर भाजपा ने जबरदस्त बहुमत हासिल किया है.…

गोड़से के राजनैतिक उत्तराधिकारी !

-(राम पुनियानी)   मालेगांव बम धमाके प्रकरण में आरोपी प्रज्ञा ठाकुर, जो कि स्वास्थ्य के आधार पर ज़मानत पर रिहा हैं, नाथूराम गोड़से पर अपने बयान के कारण विवादों के घेरे में आ गई. बल्कि, उसके पहले से ही अलग-अलग कारणों से उनकी आलोचना हो रही…

यह समय मन मारकर बैठ जाने का नहीं, अपने प्रतिरोध को व्यक्त करने का है !

(एच.एल.दुसाध) मित्रों, समसामयिक मुद्दों पर सोशल मीडिया में जिस तरह वैविध्यपूर्ण टिप्पणियां आ रही हैं, दैनिक पत्रों के प्रति मेरा आकर्षण तो कमतर होते जा रहा है. इस मध्य गत एक माह से ‘डाइवर्सिटी डे’ के आयोजन में अतिरिक्त रूप से व्यस्त रहने…