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दलितों की लाशें कब तक इंतजार करेगी ?

( कल शाम से जालोर जिले में यह डेड बॉडी श्मसान जाने की प्रतीक्षा में है,सरकारी अमला मौजूद है,पर रास्ता नहीं दिया जा रहा है ) दलित आदिवासियों को जीते जी तो न्याय नहीं मिलता ,मरने के बाद भी उन्हें इंसाफ मयस्सर नहीं है । दलितों की लाशें कब…

13 प्वाइंट रोस्टर की जगह 200 प्वाइंट रोस्टर अध्यादेश की मांग को लेकर ज्ञापन

(शाहपुरा,6 फरवरी )- शाहपुरा के एससी-एसटी, ओबीसी वर्ग के संयुक्त तत्वाधान में बुधवार को राष्ट्रपति व केंद्रीय मानव विकास संसाधन मंत्री के नाम एसडीएम राजेंद्र सिंह चान्दावत को ज्ञापन सौंपकर 13 प्वाइंट रोस्टर को समाप्त कर 200 प्वाइंट रोस्टर…

आरक्षण व प्रमोशन की अंधी दौड़ दलितों को बर्बाद कर देगी !

ज्यादा नहीं सिर्फ पांच साल बाद ही देख लेना, सरकारी दफ्तरों में दलित चपरासी से लेकर डायरेक्टर तक के नामों की तख्तियां गायब हो जाएंगी। क्योंकि बाबासाहेब की बदौलत सुख भोग रहे....

अब ये आरएसएस की ‘मुख्यधारा’ क्या बला है !

(भँवर मेघवंशी) हर कोई हर किसी को मुख्यधारा से जोड़ने में लगा है । कोई दलितों को तो कोई आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ रहा है ,किसी को फिक्र है कि देश का अल्पसंख्यक मुख्यधारा से दूर है । बरसों बाद आर एस एस को पता चला है कि घुमन्तू समुदाय…

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एससी-एसटी के प्रति प्रेम !

(त्रिभुवन) वह देश का एक महाकाय संगठन है। उसकी एक राजनीतिक शाखा है। वह आज तक आरक्षण के ख़िलाफ़ था। एकदम खुला। निडर और साहसी। डंके की चोट पर। इस संगठन से जुड़े हमारे 'मित्र' एससी-एसटी को लेकर बहुत कुछ ऐसा कहते थे, जो बताता था कि भारतीय…

  उपजाति अंततः जाति को ही मजबूत करती है !

“ समाज के दानवीरों ,कब तक अपनी उपजाति को कभी विवाह सम्मेलन के नाम पर, कभी होस्टल के नाम पर, कभी संगठन के नाम पर, कभी होनहार छात्रों के पुरस्कार के नाम पर होने वाले कार्यक्रम में, कभी उपजाति महासभा के अनेकों कार्यक्रम में पैसे दान करते रहोगे…

  राष्ट्रीय मूलनिवासी महिला संघ का चौथा राष्ट्रीय अधिवेशन 20 जुलाई को !

महिलाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बाबा साहेब ने कहा था कि -'' महिलाओं का एक स्वतंत्र संगठन होना चाहिये'' उनका मानना था कि अगर महिलाओं का एक स्वतंत्र संगठन होगा तो,वे समाज में व्याप्त रूढ़िवादी परंपराओं व महिलाओं की स्थिति को बदतर…

पाखंडों से मुक्त होकर दलितों पिछड़ों को अपना भविष्य खुद बनाना है.

धर्म, इश्वर और आलौकिक की गुलामी एक लाइलाज बिमारी है. भारत में इसे ठीक से देखा जा सकता है. कर्मकांडी, पाखंडी और अपनी सत्ता को बनाये रखने वाले लोग ऐसी गुलामी करते हैं ये, बात हम सभी जानते हैं. लेकिन एक और मजेदार चीज है तथाकथित मुक्तिकामी और…

क्या आप रमेश भंगी को जानते है ?

रमेश भंगी से मैं पहली बार कल ही मिला.वे भारत सरकार के अनुवाद ब्यूरो में काम करते हैं,मैं उनके लिखे हुए लेख आदि पहले से पढता हूँ.मैं और मेरी पत्नी हिमाचल से दिल्ली आये हुए हैं सो कल रमेश भाई के घर उनसे मिलने पहुँच गए,रमेश भाई और उनकी पत्नी…

दलित महिला सरपंच के साथ मारपीट !

राजस्थान वो राज्य है जहाँ दलित सरपंच हो या विधायक, उनके साथ बैखोफ होकर मारपीट, गालीगलौज, धक्का मुक्की, जातिगत अपमान कुछ भी किया जा सकता है .यह काम आम नागरिक से लेकर पुलिस तक कोई भी कर लेता है, क्योंकि कानून और व्यवस्था उसको कुछ नहीं बिगाड़…