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शोषित समाज पर अत्याचार लगातार जारी हैं, ऐसा क्यों ?

(बी एल बौद्ध) कोरोना महामारी के चलते लॉक डाउन चल रहा है जिसके कारण साइकिल से लेकर हवाई जहाज तक सब कुछ रुका हुआ है लेकिन ऐसे में भी शोषित समाज पर जुल्म और अत्याचार लगातार जारी हैं, ऐसा क्यों ?ताजा घटना राजस्थान के जोधपुर जिले की है वहां

राजस्थान के दलितों को अपनी रक्षा खुद ही करनी होगी !

- भँवर मेघवंशी नागौर जिले के करणू गांव में दो दलित युवाओं के साथ जिस तरह से क्रूर,निर्मम व भयानक अत्याचार किया गया है,उसको लेकर मुझे कुछ बातें कहनी है ............ 1- मत भूलिये कि नागौर जिला लंबे समय से क्रूरतम दलित

रोहित वेमुला की तरह भंवर मेघवंशी भी सांस्थानिक हत्या का शिकार होते होते बचे !

( हिमांशु पण्ड्या )"मेरी कहानियां, मेरे परिवार की कहानियां – वे भारत में कहानियां थी ही नहीं. वो तो ज़िंदगी थी.जब नए मुल्क में मेरे नए दोस्त बने, तब ही यह हुआ कि मेरे परिवार के साथ जो हुआ, जो हमने किया, वो कहानियां बनीं. कहानियां जो लिखी

किताबों से सामाजिक क्रांति होती है !

(डॉ.एम.एल परिहार) झारखंड के मुख्यमंत्री मान्य. हेमंत सोरेन ने जनता से अपील की है कि वे उनसे मुलाकात के दौरान फूलों के बुके भेंट नहीं करें बल्कि बुक्स यानी अपनी पसंद की  वैचारिक जाग्रति की किताबें ही भेंट करें . जॉर्ज बर्नार्ड शा ने कहा

जागरूक होकर ही आदिवासी समुदाय अपने हक प्राप्त कर सकता हैं -मेघवंशी

करजलिया, (भीलवाड़ा)20 दिसम्बर 2019 ) करजालिया ग्राम पंचायत के नया डोटा गांव में एकलव्य युवा संगठन के बैनर तले भील समाज की एक मीटिंग आयोजित की गई,जिसमें भील समाज के लोगों ने बताया कि हमारे समाज को कृषि कनेक्शन से बरसों से वंचित रखा गया है।

क्या दलित संविधान प्रदत अधिकार खोने जा रहे हैं !

 (एच.एल.दुसाध )                                                                                           आज 6 दिसम्बर है ,बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस. यूं तो आज के खास दिन बाबा साहेब को पूरा देश ही नहीं, जन्मगत

साहस के पहाड़ पर खड़ा एक कारसेवक !

( उम्मेद सिंह )आज राजस्थान में ही नहीं वरन् देशभर में दलित आयोजन, आन्दोलन, सम्मेलन व सेमीनार में अनिवार्य नाम बन चुके भँवर मेघवंशी अपनी नई किताब ‘मैं एक कारसेवक था ‘ में संघर्ष के पहाड़ पर खड़े एक कारसेवक नज़र आते है। पुस्तक उनकी आत्मकथा

मछ्ली न देने पर दलित मुशहर युवक की हत्या, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की टीम घटनास्थल पंहुची !

(विद्याभूषण रावत) घटना 28 अक्क्तुबर की शाम करीब 3 बजे की है जब छोटू मुशहर, जिसकी उम्र लगभग 30 वर्ष की थी, रोज की भाँति अपने गांव से करीब 1 किलोमीटर दूर रमन छपरा गांव के घाट पर, जो की छोटी गंडक नदी का तट है, मच्छी मारने के लिये गया था और

गाली को मिशन न बना,जाने दे !

(भंवर मेघवंशी )सोशल मीडिया एक दिन इस देश में गृह युद्ध करवा कर मानेगा,यह तय हो चुका है।इस आग में  घी डालने का काम गालीबाज मिशनरी कर रहे हैं,जिनको अपने अवगुण नहीं दिखते,अपने भीतर की बुराइयां नहीं नजर आती,वे अपनी कमजोरियों को दूसरों पर थोप