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रवीश कुमार

नानक होना जीवन के अनुभवों का सार होना है !

(रवीश कुमार) गुरुनानक देव सतत यात्री थे। 27 साल की उम्र में ही उन्होंने 9 देशों की यात्राएं कीं। 150 से अधिक धर्मस्थलों का दौरा किया। उनके सहयात्री थे भाई मरदाना। पाकिस्तान में मरदाना की आज भी वंशावली चलती हैं। हैं मुस्लिम लेकिन गाते

मैं दिल्ली पुलिस के उस जवान के साथ खड़ा हूँ जिसे पीटा गया -रवीश कुमार

(रवीश कुमार) एक तस्वीर विचलित कर रही है। दिल्ली के साकेत कोर्ट के बाहर एक वकील पुलिसकर्मी को मार रहा है। मारता ही जा रहा है। पुलिस के जवान का हेल्मेट ले लिया गया है। जवान बाइक से निकलता है तो वकील उस हेल्मेट से बाइक पर दे मारता है। जवान

रात भर पेड़ों की हत्या होती रही, रात भर जागने वाली मुंबई सोती रही !

(रवीश कुमार) इलाक़े में धारा-144 लगी थी। मुंबई के आरे के जंगलों में जाने वाले तीन तरफ़ के रास्तों पर बैरिकेड लगा दिए गए थे। ठीक उसी तरह से जैसे रात के अंधेरे में किसी इनामी बदमाश या बेगुनाह को घेर कर पुलिस एनकाउंटर कर देती है, शुक्रवार की

वीसी को सीवी चाहिए तो प्रो.रोमिला थापर को दे देनी चाहिए !

( रवीश कुमार)ये हमारा नहीं आईने का दस्तूर है। दर्पण में वीसी सीवी ही नज़र आएगा। तभी वीसी को ख़्याल आया होगा। बग़ैर सीवी के वीसी बनना तो ठीक है लेकिन हमारी बादशाहत में उनकी सीवी कैसी होगी जिनकी हैसियत वीसी से भी ज़्यादा है। बस बादशाह-ए-

इस किताब में कैंसर से लड़ाई की दास्तान है !

- रवीश कुमार इस किताब में डरावना कुछ भी नहीं है। संभावना है जिसके ख़त्म होने की आशंका है। फिर भी कोई जी रही है। उस आशंका पर संभावना लिख रही है। आप एक साँस में पढ़ते चले जाते हैं जैसे वो अपनी साँसों को हिसाब रखने लगी थी ताकि बची हुई

भारतीय स्पिनिंग उद्योग बड़े संकट से गुजर रहा है ।

-रवीश कुमार आज इंडियन एक्सप्रेस के पेज नंबर तीन पर बड़ा सा विज्ञापन छपा है। लिखा है कि भारतीय स्पीनिंग उद्योग सबसे बड़े संकट से गुज़र रहा है, जिसके कारण बड़ी संख्या में नौकरियाँ जा रही हैं।  आधे पन्ने के इस विज्ञापन में

रवीश कुमार का पत्र दिवंगत पुलिस ऑफिसर के नाम !

(रवीश कुमार का पत्र)   सुबोध कुमार सिंह जी, मैं आपको एक पत्र लिख रहा हूं. मुझे मालूम है कि यह पत्र आप तक कभी नहीं पहुंच सकेगा. लेकिन मैं चाहता हूं कि आपकी हत्या करने वाली भीड़ में शामिल लड़कों तक पहुंच जाए. उनमें से किसी एक लड़के के पास…

हिंदी का पाठक जब बनेगा सबसे अच्छा पाठक !

- रवीश कुमार मीडिया और सोशल मीडिया बहुत अलग-अलग संस्थाएँ नहीं हैं। दोनों ही एक दूसरे के लिए सप्लायर और वितरक का काम करते हैं। हमारे जनमानस का बहुत बड़ा स्पेस इस दायरे में ग्राहक बन कर खड़ा है। तर्क और तथ्य की पहचान की क्षमता हर…