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भिखारी

हाथ पसारना शौक नहीं , मजबूरी है इनकी

- रमेश डांगरीवाल  "अंश " तीन चार रोज पहले की बात है, मैं और मेरी पत्नी दोनों बाजार में कुछ खरीदारी करने गए . पत्नी ने कहा मैं मेरे कुछ जरूरी सामान ले लेती हूं ,आप भी अपना कोई आवश्यक काम हो तो उसे निपटा लो .हम दोनों अपने-अपने काम में व्यस्त