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बुद्ध

क्या लोग बुद्ध, फूले या बाबा साहब की किताबों से डरे हुए हैं !

(संजय श्रमण )यह दिवस पुस्तकों के लिए नहीं है ताकि वे विश्व को पा सकें, बल्कि विश्व के लिए है ताकि वह पुस्तकों को पा सके। जब ज्योतिबा फूले ने किताबों से दोस्ती की तो उनके भीतर ज्योति उमगने लगी, उनका दीपक जलने लगा था। जब बाबा साहब ने पहली

बुद्ध की हवा में जाना खतरे से खाली नहीं…..!

( डॉ एम एल परिहार )बुद्ध प्रेम,करुणा, ध्यान के पहले विद्रोह का नाम है. परम्परागत रूढियों, सड़ी गली मान्यताओं , अंधविश्वासों व अज्ञान के अंधेरे के खात्मे का नाम है. इसलिए इस पृथ्वी पर जब भी कोई धाम्मिक व्यक्ति हुआ है वह विद्रोही होता है. वह

गौतम बुद्ध और उनका धम्म !

-हिमांशु कुमार  बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ जो अब नेपाल में है,इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था।इनके पिता का नाम शुदोधन था।ज्योतिष ने भविष्य वाणी करी थी कि यह या तो चक्रवर्ती सम्राट बनेगा,लेकिन अगर दुःख देख लेगा तो सन्यासी हो जाएगा.

इतिहास में अब तक का महान क्रांतिकारी सूत्र

‘अत्त दीपो भव’ अर्थात अपना प्रकाश स्वयं बनो..गौतम बुद्ध कहते है...'किसी दूसरे के उजाले में चलने की बजाय अपना प्रकाश ,अपनी प्रेरणा खुद बनो. खुद तो प्रकाशित हों ही, दूसरों के लिए भी एक प्रकाश पूंज की तरह जगमगाते रहो'...भगवान बुद्ध के महा

धम्मभूमि थाईलैंड : भ्रांतियां एवं सत्य

(डॉ.एम.एल. परिहार) इन दिनों हम दस साथी थाईलैंड (सियाम देश ) की यात्रा पर हैं. राजधानी बैंकॉक के बुद्ध विहारों के अलावा सवा सौ किमी. दूर प्राचीन राजधानी अयूथ्या व ग्रामीण क्षेत्र का भी भ्रमण किया. भारत की तरह थाईलैंड का भी बुद्ध व धम्म

थाईलैंड का ग्रामीण बौद्ध जनजीवन !

(डॉ.एम.एल .परिहार ) थाईलैंड कभी किसी देश का गुलाम नहीं रहा. इसके आसपास म्यांमार (बर्मा) लाओस, वियतनाम, कंबोडिया फिर आगे जावा, सुमात्रा ,कंबोडिया सभी देश आज भी बुद्ध की करुणामयी वाणी से गुंजायमान है.थाईलैंड की जनसंख्या साढे छ: करोड़ है.

चट्टान पर बने धम्म चक्र !

( डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह ) आंध्र प्रदेश के पुरातत्व विभाग ने चट्टान पर बने धम्मचक्र का पता लगाया है। यह धम्मचक्र पूर्वी गोदावरी जिला के कोठापल्ली गाँव से मिला है। गोदावरी का गोदा नदी का और कोठापल्ली का पल्ली गाँव का बोधक है। खोजे

भारत में ये चार प्रकार के बौद्ध पाये जाते हैं !

-(एम.एल. परिहार)  पहले,परम्परागत बौद्ध हैं जो  अधिकतर लद्दाख, अरुणाचल, सिक्किम, असम, नागालैण्ड, पश्चिम बंगाल आदि प्रांतों में रहते हैं- चकमा, बरुआ, ताईआदि। ये वे बौद्ध हैं जो भारत के बुद्ध धम्म के विपत्तिकाल में स्वयं को…