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दलित

डॉ.अंबेडकर को समझने के लिए एक जरुरी पुस्तक

( इन्द्रेश मैखुरी )पीछे मुड़ कर देखना एक जरूरी काम है. लेकिन राजनीति में पीछे मुड़ के देखने के दो नजरिए हैं. प्रतिगामी विचार के वाहक अतीत में ही जीते हैं और तमाम आधुनिक संसाधनों का लाभ उठाते हुए,वैचारिक स्तर पर समाज को पीछे ही ले जाना

संघी ‘भंवर’ से निकालते ‘मेघवंशी’ !

(सम्राट बौद्ध )बड़े गर्व के साथ कहूंगा कि मैं 'मैं एक कारसेवक था' किताब का पहला पाठक हूँ। इस जीवनी का पूरा सार इसके शीर्षक के आखरी शब्द 'था' में निहित है और यही वो शब्द था जिसके कारण मैं किताब का इंतज़ार कर रहा था।संघ के बारे में दलित

स्वच्छ्कार समाज बौद्धिक संस्थान द्वारा विचार संगोष्ठी का आयोजन !

(मुहम्मदाबाद ,गाजीपुर-उतरप्रदेश ) स्वच्छ्कार समाज बौद्धिक संस्थान के तत्वधान में दिनाँक 20 अक्टूबर 2019 को ग़ाज़ीपुर के मुहम्मदाबाद ब्लॉक पर प्रातः 10 बजे से शाम 5 बजे तक सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश के स्वच्छकार समुदाय के सामाजिक,आर्थिक

आज अंबेडकर को खुद अपने ही भक्तों से लड़ना पड़ेगा !

(डॉ.एम.एल.परिहार)बहुत कड़वा सच है यह लेकिन वास्तविकता को नकार नहीं सकते. दरअसल हमने अंबेडकर को अपने अपने हिसाब से गढ लिया है, अपने अपने सांचे में ढाल दिया है . जिसमें हमारा स्वार्थ सधता है उसी अंबेडकर को याद करते हैं. बाबासाहेब अंबेडकर ने

‘जाति क्यों नहीं जाती’ विषय पर व्याख्यान 28 सितम्बर को उदयपुर में !

सोशल डेवलपमेंट फाउंडेशन, दिल्ली द्वारा चौथा डाक्टर राय मोहन पाल स्मृति व्याख्यान 28 सितम्बर को उदयपुर में आयोजित किया जा रहा है.. इस व्याख्यान का मुख्य विषय है 'जाति क्यों नहीं जाती'..|कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद और साहित्यकार

पेरियार जयंती पर परिचर्चा !

( जयपुर ,दिनांक 17 सितम्बर 2019) महान क्रांतिकारी व समाज सुधारक पेरियार की जयंती व जनवादी लेखक संघ राजस्थान के महासचिव साथी राजेंद्र साईवाल के स्मृति दिवस पर दलित शोषण मुक्ति मंच और जनवादी लेखक संघ की और से विनोबा ज्ञान मन्दिर में

राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में पूजा वर्मा की जीत !

राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार पूजा वर्मा ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर ली है ... https://youtu.be/-oCG6av0Ih4 राजस्थान यूनिवर्सिटी में यह लगातार चौथी बार है जब किसी बागी निर्दलीए उम्मीदवार ने चुनाव

दलित आत्मकथाएं : सिर्फ विलाप और शोषण की कहानियाँ !

( संजय श्रमण ) बहुत गई अपने दारिद्रय और पिटने की कहानियाँ यानी दलित साहित्य की समस्याएँ और समाधान ! कोई भी साहित्य जिस किसी भी वर्ग या समुदाय के ज्ञानवर्धन के लिए लिखा जाता है उसी को लाभ होता है। दलन या शोषण का साहित्य दलितों या

बहुजन आंदोलन को ‘मन्दिर वहीं बनाएंगे’वाली भीड़ में न बदलें !

- मोहन आर्य भारत में दलित आंदोलन/ बहुजन विमर्श के साथ एक समस्या जुड़ती जा रही है ,जो कि सबऑलटर्न विमर्श की एक बुनियादी समस्या है । वो है अपने इतिहास, महानायकों का उसी तरह से मिथकीकरण कर देना ,जैसे ब्राम्हणवादी ढांचे में किया जाता

दलित हरीश जाटव की हत्या को मॉब लिंचिंग क्यों नहीं मानती राजस्थान सरकार ?

-एस.पी.मित्तल 18 अगस्त को अलवर के भिवाड़ी के रत्तीराम जाटव के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया, रत्तीराम ने तीन दिन पहले पुलिस के रवैये से तंग आकर खुदकुशी कर ली थी, रत्तीराम का कहना रहा कि उसके बेटे हरीश को बदमाशों ने पीट पीट कर मार