Browsing Tag

अयोध्या

दे और दिल उनको, जो न दे मुझको ज़बाँ और !

-राजेश चौधरी, चित्तौड़गढ़हिन्दी पट्टी में दलित आत्मवृत्त-लेखन महाराष्ट्र की तुलना में देर से शुरू हुआ और अब भी संख्यात्मक दृष्टि से कम है। भँवर मेघवंशी का आत्मवृत्त पिछले दिनों प्रकाशित हुआ है, जो कि इस अभाव की एक हद तक पूर्ति करता है। इसे

पठनीय पुस्तक है -” मैं एक कारसेवक था”

(डॉ नवीन जोशी )भंवर मेघवंशी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। पिछले दो दशकों में उन्होंने देश में दलित अस्मिता के लिए रिक्त पड़े आंदोलन को अपनी बेबाक चुनौतियों से पाट दिया है। सामाजिक असमानता के हजारों सालों के भंवर को इस भंवर ने एक हद

आर एस एस के प्रति आगाह करती एक जरूरी किताब !

 ( तारा राम गौतम ) 20 अक्टूबर 2019 को जयपुर मैं पी एम बौद्ध द्वारा आयोज्य एक कार्यक्रम में शरीक होने का अवसर मिला। कार्यक्रम में कई लोगों से मिलकर अच्छा लगा। वहां पर पी एम बौद्ध की व्यस्तता के कारण उनसे क्षण भर की मुलाकात ही हुई, कोई

आरएसएस के एक दलित स्वयंसेवक की आत्मकथा !

( आत्मकथा के बहाने मानवता की जरुरी लड़ाई की किताब ) “मेरी कहानियां, मेरे परिवार की कहानियां – वे भारत में कहानियां थी ही नहीं. वो तो ज़िंदगी थी.जब नए मुल्क में मेरे नए दोस्त बने, तब ही यह हुआ कि मेरे परिवार के साथ जो हुआ, जो हमने किया,