कोई इस जोशिल को समझाओ

- गंगा सहाय मीणा

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ये जोशिल बड़ा बेवकूफ आदमी है! कब से समझा रहा हूं! समझता ही नहीं! फिर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गया.4 दिन पूरे भी हो गए. किसी छोटे अखबार ने भी न तो इसके सस्‍पेंड होने को खबर बनने लायक समझा और न इसकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को! पिछले साल भी 25 दिन की भूख हड़ताल कर चुका है. अपने प्रमोशन के लिए नहीं, दिल्‍ली के एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज को बचाने के लिए और हजारों करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए.

चुपचाप नौकरी क्‍यों नहीं करता? 3 साल से आरटीआई से घोटाले के सारे कागज जुटाने में लगा है. जब कागज पूरे हुए तो इसे लगा अब तो आराम से घोटाला उजागर हो जाएगा. दिल्‍ली में भ्रष्‍टाचार विरोधी आंदोलन से निकली सरकार से इसे कुछ ज्‍यादा ही उम्‍मीदें थीं. सीएम के सलाहकार ने मामले की जांच कराई. सब कुछ सच था. लेकिन उसके बाद मामला दबा दिया. राहुल गांधी को मुद्दा जेनूइन लगा, वे भी मिलने आए. लेकिन वैसे ही जैसे दलितों के घरों में खाना खाने अक्‍सर जाते रहे हैं!

25 दिन की भूख हड़ताल के बाद पिछले साल ईमानदार नंबर वन केजरीवाल ने भ्रष्‍टाचार की उच्‍च स्‍तरीय जांच का भरोसा दिलाया और जल्‍द मुकम्‍मल कॉलेज बनवाने का वादा किया लेकिन वह भी हवा-हवाई निकला. इस साल इस जोशिले नौजवान ने पीएमओ को इस बारे में लिखा. वहां से तुरंत कार्यवाही का आश्‍वासन मिला. कार्यवाही हुई लेकिन भ्रष्‍टाचारियों पर नहीं, बल्कि जोशिल पर ही. उसे सस्‍पेंड कर दिया गया!

मेरी बात नहीं समझ रहा यह. आप लोग ही इसे समझाओ कि कुछ नहीं बदलने वाला. सत्‍ता की ताकत के आगे आपकी ईमानदारी की ताकत पासंग बराबर भी नहीं है. कहां गायब करवा दिए जाओगे, पता भी नहीं चलेगा! लेकिन ये है कि मानता ही नहीं. इसके पीछे कोई वोट थोड़े ही है कि कोई पार्टी रुचि लेगी! सैंकड़ों कॉलेज और यूनिवर्सिटी बर्बाद हो रही है, एक बंद भी हो गया तो क्‍या फर्क पड़ेगा? 7वां वेतन आयोग लग गया है. सब लोग उसके मजे ले रहे हैं और एक ये है कि गरीब स्‍टूडेंट्स के हित में अपनी नौकरी और जान को दांव पर लगाकर फिर से भूख हड़ताल पर बैठा है.

और तो और, ‘एजूकेशन सीरीज’ करने वाले एंकरों और ‘एजूकेशन बीट’ वाले पत्रकारों को भी दिल्‍ली के एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के खत्‍म हो जाने में कोई रूचि नहीं है, फिर यह क्‍यों अपना जीवन बर्बाद कर रहा है. इसको उम्मीद है लोग साथ आएंगे एक दिन! मैं कहता हूँ कि सब अपनी जिंदगियों में व्यस्त हैं, कोई नहीं आएगा। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता!

मुझसे तो नहीं समझ रहा, आप ही समझाइए इसे!

( लेखक जवाहर लाल नेहरु विश्वविध्यालय से है )

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