सोशल मीडिया बहुजनों के लिए अनमोल है  !

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(डॉ.एम.एल.परिहार)


कुछ महीनों पहले मैं फेसबुक से अनजान था किताबों में ही ज्यादा व्यस्त था लेकिन अब फेसबुकिया संसार को थोड़ा जानने लगा हूं. जब दलित शोषित वंचित समाज का अपना कोई मीडिया नहीं था. समाज का दुख सुख अन्त र्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना तो दूर एक ही गांव में संवाद चिंतन नहीं हो पाता था.बहुजनों में चारों ओर निराशा का माहौल था. कई लोगों के लिए मनुवादी मीडिया को सिर्फ कोसने व खुद काम नहीं करने का भी बहाना था. मिशन के कुछ जुनूनी लोग अपना सुख छोड़, परिवार का पेट काट कर पत्र पत्रिकाएं निकालते रहे लेकिन समाज ने उनको सहयोग नहीं किया।

अब विदेश से आए सोशल मीडिया की क्रांति ने हमें अपने समाज की सामाजिक आर्थिक व वैचारिक जाग्रति व परिवर्तन के लिए अनमोल अवसर व मंच मिला है. सजग सवर्ण समाज इसके महत्व को समझकर इसका भरपूर उपयोग कर रहा है.शिक्षा से लेकर व्यापार, धर्म प्रचार से लेकर सत्ता के शिखर तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया के हथियार को खूब चला रहे हैं लेकिन बहुजन समाज अभी भी कुछ करने,सीखने व स्वयं व समाज में बदलाव लाने की बजाय सिर्फ दूसरो की आलोचना, कोसने में ही कीमती समय बर्बाद कर रहा है.बहुजन समाज के प्रतिभाशाली मीडियाकर्मी अपने बलबूते पर मुश्किल आर्थिक संकट में भी यूट्यूब चैनलों से अपना फर्ज निभा रहे हैं.

बहुजन युवाओं को वाट्सएप फेसबुक आदि पर देख कर बहुत निराशा होती है. विरोधी विचारधारा का बौद्धिक स्तर पर शिष्टता से सामना करने की बजाय हमने सिर्फ असभ्य अभद्र भाषा को ही अपना हथियार बना रखा है.दूसरों से वैचारिक संघर्ष की बजाय आपस में ही लड़ रहे हैं .सारे दिन खुद व परिवार के फोटो अपलोड करने, अनजान को भी जन्म दिन, विवाह, नौकरी, संतान पैदा होने की बधाइयां देने में समय गवां रहे है. पढाई लिखाई, काम धंधे ,माता पिता के सपनों की कोई चिंता नहीं, बस ‘जय भीम’ का शाब्दिक जयघोष कर सुबह सोशल मीडिया की बाजार में उतरते हैं दिनभर कभी वाटसप तो कभी फेसबुक ,कभी लाइक्स का आंकड़ा देखने तो कभी गालियों की बौछारें करते हुए ,दिन भर जब भी देखो यहां नजर आते हैं. खाट पर मोबाइल मशीन के साथ दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद देर रात मां के पुकारने पर ही खाने की थाली के पास जाते हैं.

मां भी अब कहते कहते थक चुकी है कि आखिर बेटा शादी के लिए कब कमाना शुरू करेगा? या बच्चों की पढाई व नियमित चूल्हा चलाने का बंदोबस्त कब करेगा ? बूढी आंखों के सपने चकनाचूर हो रहे हैं लेकिन बेरोजगार बहुजन युवा न मेहनत कर रहा है और न सुख के लिए संघर्ष, ऊपर से कई तरह के नशों का और गुलाम हो गया.

 जिन सवर्ण समाज को हम कोसते है उनकी किसी वैचारिक पोस्ट पर प्रतिक्रिया में लिखने वालों की झड़ी लग जाती है लेकिन हमारे अधिकतर पढे लिखे लोग भी प्रतिक्रिया में दो शब्द लिखने की बजाय ताली बजाने, उछल कूद करने, अंगूठा बताने,बेहुदी हरकत करनेवाले कार्टून पटक कर इतिश्री कर लेते हैं.

 हमारे यहां वैचारिक पोस्ट की बजाय अंबेडकर को किसने कुछ कह दिया,रेल  सड़क हादसों ,गुमसुदा बच्चों  या स्कूल के डॉक्यूमेंट खो जाने की पुरानी पोस्ट साल भर शान से घुमती रहती है. सक्षम लोग अंबेडकर का पाच रूपये का एक पोस्टर अपने पड़ौस के घर नहीं लगा पाते हैं लेकिन अमेरिका रूस इंग्लैंड के राष्ट्रपति के कक्ष की फोटो को एडिट कर अंबेडकर की फोटो चिपका कर पूरी दुनिया में फॉरवर्ड कर लेते हैं.

खुद की फोटो से कुछ लोगों को इतना अधिक मोह है कि वे बात बुद्ध कबीर रैदास अंबेडकर की करेंगे लेकिन संदर्भ में खुद के आड़े तिरछे दस फोटो डाल देते हैं.उनके दैनिक जीवन में कुछ भी घटित हो रहा है वे तुरंत फेसबुक पर खबर के साथ फोटो अपलोड कर देते हैं. हद तो तब हो जाती है जब परिवार के किसी अहम सदस्य के देहांत पर अर्थी तैयार हो रही हो उस पल का भी लोग फोटो या लाइव टेलिकास्ट करने में संकोच नहीं करते हैं.

बहुजन समाज के अधिकतर राजनेताओं के पास न कोई विचार है ,न समझ.समाज के विकास की न कोई योजना है,न दूरदृष्टि. बस आए दिन अपनी पार्टी के सवर्ण आका के गुणगान व चापलूसी वाली पोस्ट डालते रहते हैं. अंबेडकर को भले ही भूल जाए लेकिन देवी देवताओं व सवर्ण नेता के परिवार के हर सदस्य पर खुद हाथ जोड़कर असहाय से बधाई की रंगीन पोस्ट डाल कर धन्य हो जाते हैं.

चलो साथियों! आपसे ही पूछता हूं कि फेसबुक पर आए दिन ऐसी पोस्ट देखकर आपको कैसा लगता है ?

•आज मेरा जन्मदिन है मुझे बधाई दो

•भेरूजी भोमिया जी के आशिर्वाद से आज मेरे घर अभी एक सेकंड पहले बेटा हुआ है विश्वास नहीं हो तो फोटो देखो,और बधाई दो.

• कुलदेवी की कृपा से आज मैने नौकरी का एक , सवा,डेढ,दो या दस साल पूरे किए है,बधाई दो.

• आज मैने काला चश्मा, शूज,शर्ट,बाईक,कार खरीदी है कैसे लग रहे है ? जरूर बताए.

• मेरे चचेरे भाई की साली के मामा के बेटे के ब्याह में जा रहा हूं इसलिए आपको भी बता दू.

• आज मेरी जीवनसंगिनी, मेरा लव,मेरी लाइफ, माई ब्युटीफुल लाइफ का जन्मदिन है आप सभी बधाई दो क्योंकि मैंने भी तो बधाई भेजी थी.देखो हिसाब बराबर होना चाहिए.

– डॉ एम एल परिहार

( सुप्रसिद्ध लेखक व चिंतक )

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