तो क्या अब भाजपा राहुल गांधी को लेकर गंभीर है ?

-प्रमोदपाल सिंह

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विगत 27 दिसंबर 2017 को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ट्वीट में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के उपनाम की स्पेलिंग गलत लिखी थी। लोकसभा उन्हें विशेषाधिकार हनन का दोषी ठहराकर उन्हें निष्कासित भी कर सकती है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ भी 1978 में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया गया था। लोकसभा ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि एक साल बाद उन्हें वापस भी ले लिया गया था।

ताजा मामले में भाजपा के सांसद भूपेंद्र यादव राज्यसभा में राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव प्रस्तुत किया हैं। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने इस नोटिस को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के पास भेज दिया है। अब चूंकि संसद का शीतकालीन सत्र खत्म होने के साथ ही यह मामला लोकसभा के पास पहुंच गया है। अब बजट सत्र के दौरान ही इसका हल निकलेगा।

लेकिन इस विशेषाधिकार को राजनीतिक शह और मात का खेल माना जाए अथवा राहुल को घेरने का कोई मौका। शुरूआत गुजरात चुनाव के दौरान हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के घर पर हुई एक दावत का जिक्र किया था। जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी समेत कई कांग्रेस नेता शामिल बताए गए थे। इसे लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी से माफी की मांग करते हुए संसद सत्र को पूरे चार दिनों तक चलने नही दिया। सत्तारूढ़ भाजपा सरकार की ओर से अरुण जेटली ने संसद में सफाई दी थी। तब जाकर यह गतिरोध खत्म हुआ था। तब अरुण जेटली के इसी सफाई पर ट्वीट किया। जिसमें उन्होंने जेटली की स्पेलिंग को जेट‘लाइ’ लिखा था। विवाद यहीं से हुआ। इसी वर्तनी पर जेटली और भाजपा गंभीर हो गए। अब यह राहुल की गलत वर्तनी का मामला था या जेटली की कार्यप्रणाली का उपहास के रूप में गढ़ा गया कोई नया शब्द। शब्द का शब्दार्थ और भावार्थ ही इस विशेषाधिकार के मूल में। भाजपा का निहितार्थ भले कुछ भी हो। परंतु मामला विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव तक जा पहूंचा। एक तरह से यह मोदी बनाम राहुल की लड़ाई बनती जा रही है। कुल मिलाकर भाजपा राहुल को ’पप्पू’ जैसे शब्द से उपहास करते करते उनमें अब एक मजबूत होते जा रहे राजनेता का अक्स देखने को मजबूर हो गई। इससे पहले भाजपा ने राहुल को कभी गंभीरता से नही लिया। नरेन्द्र मोदी ने तो बिल्कुल भी नही।

प्रतिक्रिया में कांग्रेस इसे भाजपा द्वारा गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बता रही है। कांग्रेस के अनुसार अगर इस तरह की बातों पर मामले होने लगेंगे तो आने वाले दिनों में हर छोटी बात पर विशेषाधिकार लाया जाएगा। गुजरात में प्रधानमंत्री ने के ग़लत बयान को भाजपा सदन के बाहर का मामला बता रही थी। कांग्रेस का सवाल हैं कि तब राहुल का ट्वीट सदन के भीतर का मामला कैसे समझा जा रहा है। गुजरात में पाकिस्तान से जुड़े प्रधानमंत्री के बयान को लेकर हुआ हंगामा जेटली के बयान देने के बाद खत्म हो चुका था तब राहुल गांधी के ट्वीट पर विशेषाधिकार हनन पेश करने का औचित्य कांग्रेस की समझ से बाहर हैं। लेकिन जहां भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हो रही हैं। वहां भाजपा हमले का कोई मौका नही गंवाना चाहती। आगामी दिनों में राहुल को घेरने के ओर भी मामले सामने आएगें। बस भाजपा मौके की फिराक में हैं। तो क्या अब भाजपा को राहुल को लेकर गंभीर समझा जाए।

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