सोशल मीडिया से अभी तक बहुजन समाज ने क्या खोया, क्या पाया ?

272
पिछले कुछ वर्षों से तकरीबन हम सभी लोग सोशल मीडिया पर जुड़े हुए हैं इसलिए यह जानना भी बहुत जरूरी है  कि अभी तक सोशल मीडिया से हमने क्या खोया और क्या पाया ?
( बी एल बौद्ध )
लोकतंत्र के वैसे तो तीन स्तम्भ होते हैं लेकिन मीडिया को भी चौथा स्तंभ माना गया है और इस चौथे स्तंभ का हाल यह है कि पूरे भारत में जितने भी राष्ट्रीय अखबार छपते हैं उनमें से किसी एक का मालिक भी शोषित बहुजन समाज का व्यक्ति नहीं है एवं यही हाल टी वी चैनलों का भी है इसलिए हम भारत की मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं मान सकते।
जब तक सोशल मीडिया अस्तित्व में नहीं आया था तब तक हमें इनकी मीडिया के पास मजबूरीवश जाना पड़ता था कि फलां तारीख को बाबा साहेब अंबेडकर से संबंधित एक कार्यक्रम रखा गया है, कृपया इस सूचना को अपने अखबार में छापने का कष्ट करें, लेकिन मनुवादी मीडिया वाले या तो हमारी खबर को बिलकुल भी नहीं छापते थे और कभी कभी छापते भी तो उस खबर को इतनी छोटी बनाकर एक ऐसे कोने में कहीं छापते थे कि वो किसी को आसानी से दिखे भी नहीं, उस खबर को ढूंढने के लिए हम लोग दो तीन बार अखबार को उलट पुलट करके देखते थे तब कहीं जाकर हमारी नजर उस खबर पर पड़ती थी तथा समाज के अन्य लोगों की तो उस पर नजर ही नहीं पड़ पाती थी इसलिए बादमें कार्यक्रम की सूचना देने के लिए लोगों को पोस्ट कार्ड भेजना शुरू करना पड़ा था।
कहने का तात्पर्य यह है कि भारत का मीडिया आज भी शोषित बहुजन समाज का समाचार छापकर अथवा टी वी चैनल पर दिखाकर बिलकुल भी खुश नहीं है,वह तो केवल धन कमाने के लिए बेहूदगी भरे विज्ञापन दिखाता है,सुबह से लेकर शाम तक पाखंडवाद फैलाता है और शोषित समाज को जलील करने वाली खबरें दिखाता है, मनुवादी सरकार बनवाने के लिए हिंदू मुस्लिम की डिबेट्स करवाता है, ऐसे में “हमारा मीडिया सोशल मीडिया” हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण बन जाता है।
सबसे पहले बात खोने की करते हैं,तो इसके लिए सेवा निवृत्त डायरेक्टर जनरल बी आर मेघवाल  की उस बात पर विचार करना बहुत जरूरी है जो कि उन्होंने जोधपुर राजस्थान में समता सैनिक दल की एक सभा के दौरान कही थी,उस सभा में वे बतौर मुख्य अतिथि पधारे थे उस वक्त वे BSF जोधपुर में इंस्पेक्टर जनरल हुआ करते थे,जब उनका नम्बर सभा को सम्बोधित करने का आया तो उन्होंने कहा कि आप लोग मेरी बात सुनने से पहले मुझे यह बताने का कष्ट करें कि आपको लच्छेदार और मजेदार भाषण सुनना पसंद है या फिर सच्चाई को सामने रखते हुए बाबा साहेब अंबेडकर के मिशन को जानना चाहते हो ,इस पर सभी ने एक स्वर में कहा कि हम सच्चाई के साथ बाबा साहेब के मिशन को जानना चाहते हैं, तब मेघवाल जी ने कहा था कि सच्चाई कड़वी होती है और सच कहने के लिए जोखिम भी उठाना पड़ता है, BSF के कमांडो मेरे पीछे बॉडीगार्ड बनकर खड़े हुए हैं जिन्हें आप भी देख रहे हैं उनके सामने सच कहना मेरे लिए बहुत बड़ा जोखिम है, लेकिन आज मेरा समाज मेरे साथ है इसलिए जोखिम भी उठाऊँगा क्योंकि हमारे पास खोने के लिए कुछ भी तो नहीं था,झोपड़ी,छप्पर और कच्चे मकानों से निकलकर सरकारी नौकरी में आये थे बाबा साहेब अंबेडकर की बदौलत बड़े अधिकारी बन गए .
आज सच बोलने के चलते यदि  नौकरी से वापिस जाना भी पड़ा तो भी क्या हुआ बाबा साहेब की बदौलत पाया हुआ जो कुछ भी उनके मिशन के चलते चला जाता है तो कोई गम नहीं होगा हम क्या खो देंगे उस झोपड़ी और घास फूस के छप्पर वाले जीवन स्तर से तो कोई नीचा कर नहीं सकेगा, यदि बाबा साहेब अंबेडकर हमारे लिए नोकरी का बंदोबस्त नहीं करते तो हम अपने जीवन में ज्यादा से ज्यादा एक झोपड़ी के साथ एक दो नयी झोपड़ी और खड़ी कर लेते इससे ज्यादा कुछ भी नहीं कर पाते, सदियों से तो हमारे साथ यही तो हो रहा था। मेघवाल जी की बात सोशल मीडिया पर भी बिलकुल खरी उतरती है ,खोने के लिए क्या था हमारे पास वो 15 पैसे वाला पोस्ट कार्ड आज भी तैयार है।
हमारे काफी लोग वर्षो से मिशन का काम कर रहे थे लेकिन सोशल मीडिया आने के बाद मिशन को बहुत ज्यादा गति मिली है बदलाव तो पहले भी हो रहा था लेकिन बहुत ही कम लोग प्रभावित होते थे लेकिन अब महत्वपूर्ण बात यह है कि सोशल मीडिया से हमने क्या पाया ?
हमने सोशल मीडिया से कुछ ही नहीं बल्कि बहुत कुछ पाया है जो कि निम्नानुसार है:-
1- हम लोग आदमी हैं और आदमी को सामाजिक प्राणी माना गया है। हम लोग सामाजिक प्राणी होते हुए भी अपने समाज से अलग हो गए थे या धीरे धीरे अलग होते जा रहे थे, लेकिन सोशल मीडिया ने हमें वापिस अपने समाज से जोड़ दिया है और पूरे देश में हमारे लोगों की खबरें समय पर हम सबको मिल रही हैं और हम लोग भी समाज हित में अपने अपने स्तर पर जैसा भी बन पा रहा है अच्छा करने का प्रयास कर रहे हैं।
2- हमारे अधिकतर लोग बहुजन महापुरूषों की विचारधारा से अनभिज्ञ थे और अनजाने में मनुवादी विचारधारा को अपने कंधों पर ढोये जा रहे थे ,लेकिन सोशल मीडिया पर जुड़ने से वास्तविकता का ज्ञान प्राप्त हुआ और अब धीरे धीरे बहुजन महापुरूषों की विचारधारा की ओर बढ़ रहे हैं और मनुवाद से किनारा कर रहे हैं।
3- अधिकतर लोग बाबा साहेब अंबेडकर को महापुरूष तो मानते थे लेकिन उनके मिशन को जानते नहीं थे लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से बाबा साहेब को अब जानने भी लगे हैं एवं बाबा साहेब अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं से भी समाज को अवगत कराने लगे हैं और बहुत सी जगह शोषित समाज के लोग अपने पूर्वजों के बौद्ध धम्म को अपनाने लगे हैं।
4- शोषित समाज के ज्यादातर बड़े अधिकारी एवं अधिकतर कर्मचारी उच्च जातियों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की गिरफ्त में आ चुके थे, उनके साथ ही उठना बैठना और पार्टी करने में मशगूल हो चले थे लेकिन सोशल मीडिया पर जुड़ने के बाद स्वर्ण जातियों को छोड़कर अपने समाज के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से मेलजोल बढ़ने लगा है और एक साथ बैठकर सामाजिक चिंतन भी करने लगे हैं।
5- पहले अधिकतर लोगों को दुश्मन और दोस्त की पहचान ही नहीं थी लेकिन सोशल मीडिया पर जुड़ने से दुश्मन की हर गतिविधियों को जानने की समझ पैदा हो गई है और दोस्तों से मिशन की बातें होने लगी हैं।शोषित समाज के वरिष्ठ अधिकारीगण सामान्य कार्यकर्ताओं से भी मोबाइल पर सामाजिक चर्चा करने लगे हैं।
6- पहले मनुवादी मीडिया की बात को ही सच मान लिया जाता था लेकिन सोशल मीडिया पर जुड़ने से मनुवादी मीडिया की झूठ को पकड़ने की समझ अपने अंदर पैदा हो गई है।
7- पहले हमारे लोग अपना अधिकतर समय टी वी देखने में ही बिताते थे लेकिन सोशल मीडिया पर जुड़ने के बाद टी वी देखना तकरीबन बंद सा ही कर दिया है और अपना कीमती समय अपनी सोशल मीडिया पर देने लगे हैं एवं देवताओं के जगरातों की जगह भीम जागरण एवं संविधान पाठ होने लगे हैं।
8-सोशल मीडिया पर जुड़ने के बाद लोगों ने मिशनरी साहित्य की खरीददारी करना शुरू कर दिया गया है और खरीदकर अपने समाज में मुफ्त में वितरित भी किया जाने लगा है एवं बहुत सी शादियों में भी बाबा साहेब अंबेडकर का साहित्य उपहार स्वरूप दिया जाने लगा है।
9-पहले शोषित समाज के गद्दार नेताओं को वफादार समझकर उनके लिए भीड़ का जुगाड़ करते थे लेकिन सोशल मीडिया पर अधिकारियों, कर्मचारियों, युवाओं एवं विद्यार्थियों के जुड़ने के बाद शोषित समाज के गद्दार नेताओं ने रैलियां करना बंद कर दिया है और यदि करते भी हैं तो उनकी रैलियों में पहले की भांति भीड़ नहीं जुटती है।
11- सोशल मीडिया पर जुड़ने के बाद शोषित बहुजन समाज में बड़े बड़े राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय कवि, गायकार, कलाकार, सम्पादक और पत्रकार,मिशनरी प्रचारक, सामाजिक चिंतक एवं विचारक पैदा होने शुरू हो गए हैं, सोशल मीडिया पर लिखित लेखों को बहुजन समाज के सम्पादक अपने साप्ताहिक और दैनिक समाचार पत्रों में उचित स्थान देने लगे हैं।
12- सोशल मीडिया पर जुड़ने के बाद बड़े अधिकारी, कर्मचारी और युवा एक मंच पर आने लगे हैं, एक दूसरे से विचार विमर्श भी काफी  करने लगे हैं एवं तकरीबन प्रत्येक रविवार को जगह जगह कैडर कैम्प आयोजित होने लगे हैं एवं अजमेर सहित कई शहरों में हर महीने की 14 तारीख को भीम क्रांति दिवस मनाने लगे हैं।
13- सोशल मीडिया पर जुड़ने के बाद पाखंड, अंधविश्वास और पूजा पाठ से लोग अपने आपको अलग करने लगे हैं और मन्दिरों से मुक्त होते जा रहे हैं साथ अपने घर में ब्राह्मण का प्रवेश निषेध किया जाने लगा एवं ब्राह्मण को दान,सम्मान व मतदान नहीं देने के लिए संकल्प करने लगे हैं। शादी के निमंत्रण पत्र पर बाबा साहेब अंबेडकर और तथागत बुद्ध की तस्वीर छपने लगी हैं गणेश गायब होने लगा है इस बदलाव में भी सोशल मीडिया की बहुत बड़ी भूमिका है।
14- सोशल मीडिया से मनुवादियों के षड्यंत्रों से समाज को समय रहते आगाह किया जाने लगा है एवं लोग अन्याय का विरोध करने लगे तथा कहीं पर भी समाज के किसी व्यक्ति के साथ जुल्म होता है तो शोषित समाज के लोग तुरंत मददगार बनकर पहुंचने लगे हैं यह भी सोशल मीडिया से ही संभव हो पा रहा है।
15- राजस्थान का डांगावास कांड एवं डेल्टा मेघवाल प्रकरण,घेनड़ी प्रकरण, भादु कोटड़ी से सरोज बैरवा की अर्ज, पाली खिंवाड़ा की नीतु मेघवाल की फरियाद,अलवर के पहलू खान की हत्या सहित अनेकों मामलों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने का काम भी सोशल मीडिया ने ही किया।
16- सोशल मीडिया की बदौलत ही रोहित वेमुला आत्महत्या की सच्चाई से पूरा देश वाकिब हुआ तथा गुजरात का ऊना कांड भी सोशल मीडिया के बदौलत ही राष्ट्रीय स्तर तक हाईलाइट हो पाया और जिग्नेश मेवाणी नामक शोषित समाज का एक नोजवान युवा उभरकर सामने आया एवं उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर में विद्यार्थियों के मान सम्मान की लड़ाई लड़ने वाले एडवोकेट चन्द्र शेखर आजाद उर्फ रावण को जेल से रिहा कराने माहौल भी सोशल मीडिया के माध्यम से बनाया जा रहा है।
17- सोशल मीडिया की बदौलत ही कांशीराम जी की बामसेफ गाँव और ढाणियों तक पहुंचने में सफल हो सकी है साथ ही नेशनल दस्तक, दलित दस्तक,आवाज, लॉर्ड बुद्धा चैनल, भँवर मेघवंशी का शून्यकाल चैनल सहित अनेकों चैनल सोशल मीडिया की बदौलत ही धूम मचाये हुए हैं।
18-  EVM के द्वारा वोटों के घपले के खिलाफ जन जागरूकता अभियान सोशल मीडिया के माध्यम से ही बहुजन समाज तक पहुंच पा रहा है।
19-  एस सी, एस टी एक्ट को लेकर शोषित समाज ने दो अप्रैल को भारत बंद की घोषणा की थी भारत के इतिहास में हमने पहली बार भारत बंद किया था जो कि पूरी तरह सफल रहा है और सबकी मेहनत से इस एक्ट को वापिस उसी रूप में लागू किया गया,यह सब सोशल मीडिया की बदौलत ही सम्भव हो पाया।
20- कांशीराम जी द्वारा स्थापित बहुजन समाज पार्टी को मनुवादियों ने षड्यंत्रकारी से पिछले लोकसभा चुनावों में 21 सांसदों से शून्य पर पहुंचा दिया था लेकिन आजकल बी एस पी अध्यक्ष बहन मायावती का नाम गठबंधन होने पर प्रधानमंत्री उम्मीदवार के लिए चर्चा में आने लगा है इसमें सोशल मीडिया की क्रांति की बहुत बड़ी भूमिका है।
21-  बी जे पी ने अपने चाटुकार नेताओं को 2 अप्रैल के भारत बंद का श्रेय देने के लिए एक बार पुनः 9 अगस्त को भारत बन्द का नाटक रचा था लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से इनके नाटक का पर्दाफाश कर दिया गया और इनके भारत बंद को फुस्स हो गया।
22- मूलनिवासी दिवस के दिन ब्राह्मणों ने दिल्ली में संसद के सामने पुलिस की मौजूदगी में भारत के संविधान को जलाया गया और साथ ही करोड़ों लोगों के मसीहा, संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर के मुर्दाबाद के नारे लगाये गए हैं और इस कृत्य को मनुवादी मीडिया ने दबाने का प्रयास किया क्योंकि इन्हें मालूम है कि संविधान जलाने वालों को सजा मिलेगी, लेकिन सोशल मीडिया ने जमकर मोर्चा संभाला और उन देशद्रोहियों को सजा दिलाकर रहेंगे।
23- भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को उनकी मृत्यु के बाद मनुवादी मीडिया ने सभी समाजों का मसीहा बनाने का जोरदार प्रयास किया लेकिन उनके प्रयासों की सोशल मीडिया ने बुरी तरह हवा निकाल दी एवं लोगों को एहसास करा दिया कि एक अच्छे आदमी के भेष में शोषित बहुजन समाज का बहुत बड़ा शत्रु छुपा हुआ था।
उपरोक्त सभी बिन्दुओं पर गहनता से मंथन करने पर हम सभी लोग अच्छी तरह समझ सकते हैं कि सोशल मीडिया हमारे लिए बहुत ही लाभदायक साबित हो रहा है, सोशल मीडिया से हमने खोया कुछ भी नहीं है लेकिन पाया बहुत कुछ है,इसीलिए मनुवादी लोग इसे कमजोर करना चाहते हैं और तरह तरह की रणनीति बनाई जा रही है लेकिन अब हम लोग जागरूक हो गए हैं इसलिए इनकी किसी भी रणनीति को सफल नहीं होने देंगे।
1 Comment
  1. सुभाष राठी says

    लाजवाब पोस्ट है जिसमें आज की हक़ीक़त बताई गई है शोषल मिडिया ही दलितों, पिछड़ों का मिडिया है और सब बिकाऊ है।
    जय भीम

Leave A Reply

Your email address will not be published.