क्या वास्तव में हमें राजनीति से दूर रहना चाहिए ?

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राजनीति बहुत गंदी होती है, इससे तो दूर ही रहना चाहिए,इस तरह की बातें कौन लोग बोलते हैं, क्यों बोलते हैं ?
( बी एल बौद्ध )
भारत आजाद होने से पहले जो लोग रियासतों के राजा थे और आजादी के बाद उनके वंशज विधायक सांसद और मंत्री बनकर बैठे हैं वे लोग भी कहते हैं कि राजनीति गंदी है इससे दूर ही रहना चाहिए। पहले छात्र नेता थे फिर विधायक बने और अब मंत्री बन बैठे हैं लेकिन दूसरों को नसीहत दे रहे हैं कि राजनीति बहुत गंदी है इससे दूर ही रहना चाहिए। पहले दादाजी थे फिर पिताजी राजनीति में आ धमके और अब तो पोता भी नेताजी बन गये हैं और लोगों को कह रहे हैं कि राजनीति बहुत गंदी होती है इससे दूर ही रहना चाहिए।
एमबीबीएस की पढ़ाई पढ़कर डॉक्टर बने लेकिन डॉक्टरी रास नहीं आयी, नौकरी छोड छाड़कर राजनीति में चले आये, विधायक बने मंत्री बने अब सांसद की तैयारी है लेकिन जनता को नसीहत दे रहे हैं कि राजनीति बहुत गंदी है इससे तो दूर ही रहना चाहिए।
भारत की सबसे बड़ी सर्विस आईएएस बनने का मन में एक सपना था और वह भी पूरा हुआ,कलेक्टर बना लेकिन अनपढ़ विधायक और सांसद भी कलेक्टर से बड़े नजर आने लगे फिर वही हुआ छोड़दी कलेक्ट्री बन गए विधायक लेकिन ये साहब जादे भी कह रहे हैं कि राजनीति बहुत गंदी है इससे तो दूर ही रहना चाहिए।
पहले सरपंच बना फिर विधायक और अब सांसद बनने का सपना देख रहे हैं लेकिन लोगों को कह रहे हैं कि राजनीति बहुत गंदी है इससे तो दूर ही रहना चाहिए। अपने को कोई  महाराज कहता है तो कोई योगी तो कोई साध्वी और कोई फकीर। महाराज ने मठ छोड़ दिया, योगी ने छोड़ दिया योग , साध्वी ने साधना छोड़दी तो फकीर भी भोग रहा है सरकारी सुविधाओं का भोग।सभी चले आये राजनीति में,लेकिन लोगों को कहते हैं कि राजनीति बहुत गंदी है इससे तो दूर ही रहना चाहिए। अब इस बात को समझना जरूरी है कि डॉक्टर, कलेक्टर,महाराज योगी,साध्वी और फकीर ये सब अपना अपना पेशा छोडछाड़कर राजनीति में क्यों चले आये ?
इस सवाल का बड़ा सीधा सा जवाब है कि बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान की बदौलत शोषित बहुजन मूलनिवासी समाज प्रगति की ओर अग्रसर होने लगा,मटकी की जगह गले में टाई और कमर में  झाड़ू की जगह बेल्ट बांधने लगा,धर्म ग्रन्थों ने जिसे कंगला बना दिया था बाबा साहेब के संविधान की बदौलत उसने अपना बंगला बना लिया। धर्म ग्रन्थों में जिसे पढ़ने का अधिकार नहीं था संविधान की बदौलत वह पढ लिखकर शिक्षा अधिकारी बन गया, शहरों से दूर कच्ची बस्तियों में रहने पर जिनको मजबूर किया गया था वह जिला मुख्यालय पर जिला अधिकारी बन बैठा, जो कदम कदम पर दंड का भागी माना जाता था वह दंडाधिकारी बनकर दंड देने लगा तो फिर क्या होना था धर्म के ठेकेदारों को यह सब बर्दाश्त से बाहर होने लगा और भारत का संविधान  धर्म ग्रथों पर भारी पड़ने लगा।
इसको रोकना इनके लिए आसान नहीं था लेकिन राजनीति में आकर एवं अपना बहुमत दिखाकर  अपनी मन मर्जी के मुताबिक संविधान में कुछ भी संशोधन कर सकते हैं यहां तक की पूरा का पूरा संविधान भी बदली कर सकते हैं। इन लोगों ने बाबा साहेब अंबेडकर की उस बात को गहराई से समझा जिसमें उन्होंने राजनीति को मास्टर चाबी बताया था और कहा था कि इससे सभी बंद तालों को खोला जा सकता है लेकिन ये लोग बंद ताले खोलना नहीं चाहते हैं और जो ताले अभी तक खुल चुके हैं उन्हें भी ये लोग वापिस बंद करना चाहते हैं तो इन्होंने सोचा कि डॉ भीमराव अंबेडकर ने राजनीति को मास्टर चाबी कहा था और इससे बंद ताले खोलने की बात बताकर गये हैं तो राजनीति रूपी मास्टर चाबी से खुले हुए तालों को वापिस बंद भी तो किया जा सकता है।इसलिए ये लोग खुले हुए तालों को वापिस बंद करने के लिए राजनीति में चले आये।
राजनीति बहुत गंदी है,इससे तो दूर ही रहना चाहिए, ऐसा बोलने वाले बाबा साहेब अंबेडकर की विचारधारा के सबसे बड़े विरोधी हैं एवं शोषित बहुजन मूलनिवासी समाज के शत्रु हैं ,जो कि बंद तालों को बंद ही रखना चाहते हैं और खुले हुए तालों को राजनीति रूपी मास्टर चाबी से वापिस बंद करना चाहते हैं और ये लोग दिनरात इसी काम में लगे हुए हैं और अभी तक बहुत से तालों को तो वापिस बन्द कर  भी  चुके हैं।
जिस प्रकार कई बार चोर डाकू अपनी मदद के लिए कुछ लालच देकर मदद के लिए कुछ अच्छे व्यक्तियों को मजबूरी में अपने साथ लेकर चले जाते हैं और वे कहीं पर चोरी या डाका डालते हैं तो वह साथ गया हुआ व्यक्ति भी अपने स्वार्थ के चलते चुप रहता है वही हाल पूना पैक्ट की बदौलत बने नेताओं का हो चुका है वे अपने स्वार्थ के वशीभूत हो गए हैं और समाज के लिए चाहकर भी नहीं बोल पा रहे हैं, लेकिन बाबा साहेब अंबेडकर की विचारधारा से जुड़े हुए यदि कुछ नये लोग राजनीति में आ जाएंगे तो जो ताले बंद किये हैं वे भी वापिस खुल जाएंगे, इसलिए ये लोग अच्छे लोगों को रोकने के लिए बोलते रहते हैं कि राजनीति बहुत गंदी है इससे तो दूर ही रहना चाहिए।
सभी अमबेडकरवादियों कृपया आप ध्यान दो,
इन विदेशी मूल के मनुवादी लोगों को कुछ भी कहने दो।
अपने तो सब लोग मिलकर शोषित बहुजन समाज को जगा दो।
राजनीति बहुत जरुरी है समाज को यह बात समझा दो।
 2019 में अपनी ताकत को जबरदस्त उत्साह के साथ दिखा दो।
राजनीति बहुत गंदी है इससे दूर ही रहना चाहिए ये बात बोलने वालों को सच में ही राजनीति से दूर कर दो।
जिस प्रकार बाल्टी में गंदा पानी भरने से बाल्टी गंदी नहीं हो जाती है , गंदे पानी को फैंक दो व उसमें साफ पानी भर दो बाल्टी तो पहले भी साफ थी और अब भी साफ ही रहेगी। उसी प्रकार राजनीति से गंदे नेताओं को बाहर निकाल दो, अच्छे व्यक्तियों को नेता बना दो। राजनीति गंदी नहीं होती है बल्कि पहले भी साफ थी और भविष्य में भी बिलकुल साफ सुथरी रहेगी।
 ( लेखक समता सैनिक दल से जुड़े है  )

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