NGO सेक्टर की सरकारी फंडिंग में लागू हो आरक्षण !

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– दिलीप मंडल

भारत में NGO सेक्टर में काफी पैसा है. काफी मतलब अरबों रुपए की बात है. सरकार ने कई काम से अपने हाथ खींच लिए हैं और वे काम एनजीओे से कराए जा रहे हैं.

देश में सरकारी सेक्टर के बाद NGO सेक्टर रोजगार और आमदनी का बेहद महत्वपूर्ण सेक्टर हैं.

2017 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 33 लाख NGO हैं. हर 400 आदमी पर एक NGO है. आप अंदाजा लगाइए कि यहां कितना पैसा है. NGO की यह भीड़ यूं ही नहीं है.

लेकिन चूंकि एनजीओ को काम देने का निर्णय अक्सर उच्चपदस्थ अधिकारियों के हाथ में होता है और सरकार खुद संसद में मान चुकी है कि उच्च पदों पर SC-ST-OBC के लोग या तो बिल्कुल नहीं हैं या बेहद कम हैं. तो इस वजह से एनजीओ सेक्टर में इन समुदायों का काम नहीं मिल पाया.

जिन समुदायों के बड़े अफसर है, उन समुदायों के एनजीओ ही फल-फूल रहे हैं.

मिसाल के तौर पर सेक्रेटरी लेबल पर इस समय केंद्र में SC और OBC का एक भी अफसर नहीं है. जब वहां आपके अफसर हैं ही नहीं, तो आपको काम कौन देगा?

चूंकि NGO मुख्य रूप से सरकारी पैसे पर या CSR के पैसे पर चलते हैं, इसलिए मेरी मांग है और आपको इसका समर्थन करना चाहिए कि

NGO को काम और फंड देने में सामाजिक विविधता का ध्यान रखा जाए और NGO के लिए रिलीज होने वाले आधे फंड उन संस्थाओं को जाएं, जिनके प्रमुख संचालक SC, ST. OBC के हों.

रोजगार और कमाई के इतने बड़े क्षेत्र से सिर्फ सवर्ण पैसे कमाएं, यह न सिर्फ गलत है,बल्कि राष्ट्रहित में भी नहीं है.

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