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आरक्षित वर्ग राजस्थान पत्रिका का सम्पूर्ण बहिष्कार करे !

- भंवर मेघवंशी

राजस्थान पत्रिका अखबार के मालिक गुलाब कोठारी ने अपनी आदत के मुताबिक आज फिर देश मे मौजूद आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था के ख़िलाफ़ जहर उगला है ,उन्होंने लिखा है कि -” चुनावों तथा नौकरियों के आरक्षण ने देश मे जो असुरक्षा का वातावरण बना दिया है ,सवर्ण मुंह ताकने वाला हो गया , आरक्षण के बूते अक्षम भी आगे बढ़ने लगा ”

कोठारी जी को सदियों से जारी जाति की अमानवीय ,अवैज्ञानिक और जघन्य कुव्यवस्था से कोई दिक्कत नहीं है ,वे श्रम ही नहीं श्रमिकों का भी विभाजन कर देने वाली वर्णव्यवस्था से भी परेशान नही है , उनको जाति गत भेदभाव , जाति गत छुआछूत , जातिजन्य अन्याय ,अत्याचार ,उत्पीड़न ,शोषण किसी से कोई समस्या नहीं है ,उनकी निरंकुश कलम जाति के आधार पर सदियों से जारी सामाजिक आरक्षण पर एक शब्द भी नहीं लिखती ,उन्हें जाति से किसी भांति की असहमति नहीं है ,वे पूरी श्रद्धा और गर्व से जाति तथा जातिवाद का पालन करते है ,पर वे जाति आधारित आरक्षण को देश और हिन्दू समाज के लिए बेहद खतरनाक मानते है ।

सवर्ण हिंदुओं के स्वयम्भू प्रवक्ता जातिवाद की मैली मानसिकता के धनी कलमकार गुलाब कोठारी कहते है कि जातिगत आरक्षण ने देश मे जहर घोल दिया है !
शायद कोठारी इस सच से मुंह छिपा रहे है कि जहर आरक्षण नही है ,बल्कि जहर जाति है ,आरक्षण तो इस जहर का प्राथमिक उपचार मात्र है ,कोठारी जी आरक्षण की व्यवस्था लागू होने से पहले ही तकरीबन पांच हजार साल से यह समाज साढ़े छह हजार जातियों में बंटा हुआ है ,इसलिए इतना सा सामान्य ज्ञान बढ़ा लें कि आरक्षण ने हिन्दू समुदाय को नहीं बांटा ,बल्कि उसने ऑलरेडी बंटे हुए हिन्दू समाज और देश को एक करने में महत्ती भूमिका निभाई है ।
कोठारी महाशय ,यह आरक्षण ही है ,जिसने हिंदुओं को एक बना रखा है ,इसी की वजह से छद्म ही सही पर एकता बनी हुई है ,वरना आपकी वर्ण और जाति की गन्दी व्यवस्था ने तो इस देश और समाज के हजारों हजार साल से टुकड़े टुकड़े कर रखे है ।
आप कहते है कि आरक्षण अक्षम ,अयोग्य और प्रतिभाहीन लोगों को आगे बढ़ता है ,सही कहा आपने आज के आरक्षण ने नही ,आपके सदियों से आज तक जारी अघोषित सामाजिक आरक्षण ने जरूर सर्वथा आयोग्य लोगों को आगे बढ़ाया है । इस सामाजिक व धार्मिक आरक्षण ने सत्ता ,संपत्ति ,ज्ञान और तमाम संसाधनो पर आपका एकतरफा वर्चस्व स्थापित कर रखा है ,उसके बावजूद यह देश हजारों साल गुलाम रहा ,घोर दरिद्र है तथा अनपढ़ है उसके लिए आपका यह कथित समक्ष सवर्ण तबका जिम्मेदार है । इस बात को समझ लीजिए और फिर लिखा कीजिये श्रीमान !

आप एक निष्पक्ष पत्रकार होने के बजाय महज सवर्ण जातिवादी ,पुरातनपंथी , रूढ़िवादी और कट्टरपंथी हिन्दू बन चुके है , आपको आरक्षण के इतिहास ,वर्तमान की कोई समझ नहीं है ,आपने राजस्थान पत्रिका को सवर्ण हिन्दू कुंठाओं की अभिव्यक्ति का प्लेटफॉर्म बना दिया है , कोई बात नहीं ,पत्रिका आपकी अपनी दुकान है ,निजी जागीर ,आप जो चाहे ,जैसा चाहे इस देश के 85 प्रतिशत दलित ,आदिवासी और पिछड़े वर्ग जैसे आरक्षित समुदाय के खिलाफ जहर उगल सकते हैं ,आपको यह आज़ादी प्राप्त है ,लेकिन इस देश के आरक्षित समुदाय को भी यह स्वतंत्रता है कि वह आपकी सवर्ण पत्रिका की होली जलाएं ,उसे नही खरीदे ,ना पढ़ें और सम्पूर्ण बहिष्कार कर दें .

कोठारी जी , जब तक आप इस देश के वंचितों के खिलाफ लिखना बन्द नहीं करेंगे ,तब तक के लिए मैं आपकी पत्रिका का बहिष्कार जारी रखूंगा ,मैं राजस्थान पत्रिका मंगवाना बन्द कर रहा हूँ और पढ़ना भी ,क्योंकि जो हमारे हित के ख़िलाफ़ बात करेगा ,उसे मैं कभी माफ़ नहीं करूंगा । मैं आज से आपको कोटि बैरी सम मान कर तज रहा हूँ और आरक्षित वर्ग के हर व्यक्ति से यही करने का आव्हान करता हूँ.

(लेखक स्वतन्त्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता है)

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