मेरे इस भीम संकल्प को याद रखियेगा …!

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प्रिय साथियों,

आप द्वारा दी जा रही जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभार।

मैं जो भी हूँ ,आप सबके प्यार ,स्नेह और मार्गदर्शन की वजह से हूँ। इसलिए आप सबका खूब खूब धन्यवाद ,साधुवाद,आभार ।

आज 43 साल पूरे हुए ,44 वा प्रारम्भ हुआ। हालाँकि यह दिन भी और दिनों जैसा ही है। अलग कुछ भी नहीं । लेकिन कई वर्षों की एक इच्छा को आज पूरा होते देख रहा हूँ । गत वर्ष एक जरुरी फैसला लिया गया था ,जो कि कुछ वर्षों से लंबित था ,उस निर्णय को पुनः स्मरण करवाने के लिये यह पुरानी पोस्ट फिर से साझा कर रहा हूँ .

कई बरसों से देह दान की इच्छा रही ,वह अब जा कर साथी कमल टांक एवं ललित दार्शनिक के सहयोग से पूरी हुई। मैं हृदय से आभारी हूँ कमल जी और ललित जी का कि उनकी मदद से यह महत्वपूर्ण कार्य हो सका। आभारी हूँ अपने परिजनों का भी कि उन्होंने सहमति दी।

कई सालों से मेरा यह सोच रहा है कि आखिरी सांस तक जमकर देश और समाज के लिए काम किया जाये और जब मौत आ जाये तो उसके बाद इस देह का उपयोग मेडिकल छात्रों के शोध व अध्ययन के लिए हो ।

मैं इस मौके पर कहना चाहता हूँ कि मेरी स्वाभाविक मौत हो या अस्वाभाविक ,घर पर हो या सड़क पर अथवा आंदोलन या अभियान में । मौत के तुरंत बाद बिना कोई रीति रिवाज किये शांतिपूर्ण ढंग से देह को एस एम एस मेडिकल कॉलेज ,जयपुर को दे दिया जाये।

अपनी देह को जलाने या दफनाने के काम के बजाय मैं यही पसंद करूँगा कि वह मेडिकल विज्ञान के लिए काम आये ।अगर कुछ अंग जरूरतमंदों के लिए उपयोगी हो तो उन्हें भी काम में ले लिया जाये।

मैं किसी प्रकार का अंतिम संस्कार नहीं चाहता । कोई तीसरा या उठावना नहीं चाहता और ना ही 12 दिन तक बैठ कर शोक मनाने के निठल्ले काम से मेरी सहमति है। किसी तरह की शोक सभा नहीं की जानी चाहिए, मृत्युभोज और गंगा जल ,पिंडदान तथा तर्पण और नदी नाले में ले जा कर अस्थियों के विसर्जन जैसी अवैज्ञानिक चीजे तो कतई नहीं की जाये,क्योकि इनमें मेरा कोई यकीन नहीं है।

आत्मा की शांति ,परमात्मा की प्राप्ति ,स्वर्ग- नरक तथा पुनर्जन्म जैसे खोखले शब्दों से मैं स्वयं को दूर करता हूँ।मैं नहीं चाहता कि मेरे विदा होने के बाद किसी तरह की स्मृति बाकी रहे ,किसी समाधि ,किसी मूर्ति या किसी चित्र की कोई आवश्यकता नहीं है।

अगर आप मुझसे प्यार करते है तो मेरे मरने के बाद नहीं ,मेरे जीते जी साथ जुड़े ,सहयोग करें और वंचितों ,पीड़ितों ,दलितों ,दमितों के लिए न्याय और समानता पर आधारित समाज रचना के अभियान में साथ चलें ।

सब कुछ इस लोक में कीजिये ,परलोक में मेरा विश्वास नहीं है ।सब कुछ जीते जी ,अभी और यहीं ,बाद मरने के कुछ भी मान्य नहीं होगा।

आज इस अवसर पर कुछ और बातें भी कहनी जरुरी है -मित्रों ,मैं समाज में इसलिए सक्रिय नहीं हूँ कि मुझे चुनावी राजनीती करनी है ,मैं 14 अप्रेल 2012 में आजाद चौक भीलवाड़ा में आयोजित कबीर फुले अम्बेडकर चेतना यात्रा की समापन सभा में जो घोषित कर चुका हूँ,उसे फिर से दोहराता हूँ – “ मैं जीवन में कभी भी कोई सा भी चुनाव नहीं लडूंगा ,किसी भी राजनीतिक दल का सदस्य नहीं बनूँगा और ना ही राजनीतिक पार्टी बनाऊंगा .पद ,प्रतिष्ठा और पुरस्कार की चिंता किये बगैर आम इन्सान की बेहतरी के लिये अंतिम समय तक काम करूँगा “

इस भीम संकल्प पर अडिग हूँ ,मेरी पक्षधरता ,मेरे सरोकार सबके सामने है ,सामान्य ग्रामीण व्यक्ति हूँ ,गलतियाँ करता हूँ ,पता चलने पर सुधारता भी हूँ ,कई बार गलत लोगों का साथ दे देता हूँ ,पता चलता है तो किनारा करता हूँ ,माफ़ी मांगता हूँ ,स्वयं को फटकारता हूँ ,खुद को सुधारता हूँ और आगे बढ़ता हूँ ,ऐसी ही एक भयानक भूल जो मुझसे वर्ष 2015 में हुई ,उसको इस वर्ष सुधारूँगा. मेरी चुप्पी और विपरीत भूमिका की वजह से भीलवाड़ा जिले के करेडा कस्बे के दलित परिवारों के लोगों को न्याय नहीं मिल पाया ,उनके साथ अन्याय हुआ ,मैंने हाल ही में उन तमाम पीड़ितों से मिल कर क्षमा मांगी और उनके पक्ष में पत्र लिखें ,जल्दी ही उनके इंसाफ के लिये एक प्रचंड आन्दोलन शुरू करूंगा. आप भी इस संघर्ष के साझेदार बनियेगा .

आप सबने आज जन्मदिन मुबारक कहा ,शुभकामनायें दी ,मेरे मंगल की कामना की ,उसके लिये हृदय से आभार ,साधुवाद ,शुक्रिया .

शीघ्र ही मोर्चे पर आप सबसे मुलाकात होगी .

आपका

सदैव सा

भंवर मेघवंशी
( संपादक – शून्यकाल )

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