सम्भावना की संगोष्ठी में  ‘नेचुरल रिंगटोन’ का पाठ

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  • डॉ. कनक जैन

चित्तौडगढ। सम्भावना द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम मे कहानीकार कर्नल मुकुल जोशी ने अपनी कहानी नेचुरल ’रिंगटोन’ का पाठ किया।
मंगलवार को विजन स्कुल आफ मैनेजमेन्ट मे कर्नल जोशी ने बडे प्रभावपूर्ण ढंग से कहानी सुनाई। कहानी मे पहाडी गांव के वातावरण, खानपान, आस्थाएं, मानवीय पारिवारिक सम्बन्धों से लेकर गीत और परम्पराओं को पिरोया गया है। कुमाऊनी भाषाओं के आंचलिक शब्दों ने कहानी को मर्मस्पर्शी बना दिया। आधुनिक जीवन मे पढाई या आजीविका के कारण गांव छोडकर मजबूरी मे शहर मे बस जाने पर होने वाली छटपटाहट भी कहानी मे बारिकी से चित्रित हुई है।

 

कहानी पाठ के बाद महेन्द्र खेरारू के प्रश्न  के जवाब मे कहानीकार ने बताया कि आधुनिक सोशल मीडिया के कारण बडी संख्या मे रचनाएं इन पर आ रही है, पर जल्दबाजी के चलते इनमे सार्थकता की कमी है। हालांकि नये रचनाकारो को इससे प्रोत्साहन मिल रहा है, इन रचनाओ मे से वे ही बचेगी जो शास्वत होगी। एम.एल.डाकोत ने पश्चिमी संस्कृति ओैर भारतीय संस्कृति में बेहतर कौन का सवाल उठाया। जोशी ने बताया कि भारतीय संस्कृति विश्व में प्राचीन और श्रेष्ठतम मानी जाती है, पर हमें सभी से उपयोगी तत्वों को ग्रहण करना चाहिए। कवि नन्दकिशोर निर्झर ने कहानी पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि रचना में रचनाकार बोलता है। कहानी पर योगेश शर्मा ने भी अपने विचार प्रकट किये। कार्यक्रम का संचालन कर रहे लक्ष्मण व्यास के प्रष्नों के जवाब में कर्नल जोशी ने बताया कि सेना में काम करना नौकरी मात्र नहीं है, यह देश की सेवा और जीवन जीने की शैली और कला है।

 

प्रारम्भ में कहानीकार का परिचय देते हुए डॉ. कनक जैन ने बताया कि मुकूल जोशी का कहानीसंग्रह ‘‘मैं यहां कुशल से हूं’’ प्रकाशित हो चुका हैं, उनकी कहानियां हंस, ज्ञानोदय, कथादेश जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वे चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल सहित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी चेन्नई एवं पंचमढ़ी आदि स्थानों पर कार्य कर चुके हैं। कार्यक्रम में स्थानीय कॉलेज में हिन्दी विभागाध्यक्ष अखिलेश चाष्टा, चित्रकार मुकेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार नटवर त्रिपाठी, विकास अग्रवाल, गोपाल जाट, ओम पालीवाल, रमेश शर्मा, बाबुखां मंसूरी, वर्षा वाडिका, पूजा जोशी, हरीश खत्री आदि साहित्य प्रेमी उपस्थित थे। विजन कॉलेज की निदेशक डॉ. साधना मण्डलोई ने कहानीकार जोशी का स्वागत करते हुए उनके उद्बोधन को विद्यार्थियों एवं साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणास्पद बताया। संभावना के अध्यक्ष डॉ. के.सी. शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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