राजसमन्द !

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– सीमा आज़ाद 
जी हां,
वो विक्षिप्त है
उसे भगवा राष्ट्र के विचार ने विक्षिप्त बना दिया
जी हां,
वो नशेड़ी है
मनुस्मृति की एक खुराक लेता है हर रोज
हां जी
स्त्रियों का रक्षक भी है वो
नशे की उस खुराक से ही
ये सदविचार आते हैं उसके दिमाग में-
“बचपन में पिता,
जवानी में पति
वृद्धावस्था में पुत्र का संरक्षण है जरूरी,
स्त्रियां स्वतंत्र होने के लायक नहीं।”
हां जी,
हिंसक भी है वो
क्योंकि भगवा राष्ट्र में
प्रेम ही होता है
हत्या और दंगे की वजह,
और प्रेम है
कि होता जा रहा है।
जी हां,
हत्या का वीडियो भी बनाया उसने
क्योंकि वो नहीं चाहता था
कि
हत्या का क्रेडिट मिल जाय
किसी दूसरे भगवा विक्षिप्त को
और वही ले उड़े
सरकारी ओहदा और उपहार।
हां जी,
वीडियो को जन-जन तक पहुंचाया
आन्दोलनों की खबरों को ब्लॉक कर देने वाली
जुकरबर्गिया टीम ने
ताकि
सहम जायें हम
या
बढ़ जाये हिंसा बर्दाश्त करने क्षमता
या फिर ओतप्रोत हो जायें
भगवा हिंसा की इस झांकी से
जी हां
सहम गये हम
लेकिन डर अक्सर बदल जाता है
गुस्से में
लो जी,
गुस्सा बढ़ गया हमारा
तुम्हारे भगवा राष्ट्र के खिलाफ।

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