प्रोफेसर हरिनारायण ठाकुर पर वर्चस्ववादी गुंडों ने किया हमला 

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– धर्मवीर यादव ‘गगन’
 हरिनारायण ठाकुर बेतिया, बिहार में प्रोफ़ेसर हैं , नाई जाति से हैं. जिस कॉजेल में प्रोफ़ेसर हैं, उसी कॉजेल में कार्यक्रम के दौरान वर्चस्ववादी गुंडों ने उनपर हमला कर दिया, माईक तोड़ दिया, सभी वक्ताओं और दर्शकों के साथ बदतमीजी की. भद्दी भद्दी गालियाँ दी.दुनिया की सबसे धर्मनिरपेक्ष जगह विश्वविद्यालय होते हैं. ऐसे धर्मनिरपेक्ष जगह पर इस तरह के हो रहे व्यवहार से मैं महसूस कर रहा हूँ कि नि:संदेह हम सबसे खतरनाक समय में जी रहे हैं .
दरअसल आप ‘जाति’ देख कर चुप हैं .आपके छात्रों, रिसर्चरों पर हमले होते रहे और आप देखते रहे.आज आपके प्रोफेसर्स पर हमले होने शुरू हो गये हैं और आप ‘जाति’ देख कर चुप हैं.’जाति’ देख कर विरोध कर रहे हैं.अपनी जाति पर हमले की बारी का इंतज़ार कर रहे हैं.मनुमानस आपको जातियों में बिखेर कर चुन चुन कर इसी तरह चुन चुन कर मरता हैं. उसके शासन का यही राज है.
यह बिखराव ही आप पर हमले का मुख्य कारण है.दलितों-पिछड़ों की कुछ जातियाँ यह सोच रही हैं कि हम उनको वोट देते हैं. हम उनके साथ हैं. हम सुरक्षित हैं.आप मुगालते में हैं .जल्दी इस मुगालते से बाहर निकल आईये,आज जो लोग बोल रहे हैं वो मारे जा रहे हैं.
जिस दिन ये आवाजें बंद होंगी.उसी दिन आपको बोलना पड़ेगा.जिस दिन आप बोलेंगे उस दिन आपको उसी तरह मारा जायेंगे जिस तरह आज बोलने वालों को मारा जा रहा है , इसलिए वैचारिक और वर्गीय लड़ाई लड़िये . तभी आप फूलन, फुले, अम्बेेडकर, पेरियार, बिरसा और मंडल की लड़ाई को आगे बढ़ा पायेंगे, अन्यथा चुन चुन कर मारे जायेंगे.

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