प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी का सरदार सरोवर बाँध पर एक बार फिर झूठा बयान !

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(बड़वानी,मध्यप्रदेश )

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से सरदार सरोवर बांध पर झूठा बयान दिया है | सरदार सरोवर बाँध से किसानों की खेती के लिये पानी, ऑर कच्छ , सौराष्ट्र और राजस्थान के सूखे इलाके में पीने का पानी पहुंचाने के लिये बनाया गया था |  लेकिन बांध से किसानों के बदले 481 कंपनियों को दिया जा रहा है, जिसकी सूची हमारे पास है | सरदार सरोवर बांध में 139 मीटर तक जो पानी भरना है इसके लिये गुजरात सरकार और केंद्र की सरकार चाहती है की मध्यप्रदेश पानी छोड़ता जाये | लेकिन मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को बांध से सिर्फ बिजली का ही लाभ मिलना है और जितनी बिजली का उत्पादन होगा उसका  57 प्रतिशत मध्यप्रदेश को और महाराष्ट्र को 27 प्रतिशत मिलना है |  आज न अपेक्षित बिजली पा रहे है ये दोनो राज्य, न ही हजारो विस्थापितो का पुनर्वास पुरा हुआ हैं | मोदीजी भले ही गुजरात का सपना माथे पर चढ़ाये, लेकिन वह पूरा नहीं कर पायेगा |

मेधा पाटकर जी ने बताया की  हमारे हाथ में जो सूचीयाँ मिली है उनके आंकड़े बताते हैं की  इस साल  2019 में जनवरी से मई महीने तक मात्र 223 मीलियन यूनिट बिजली बनी है, जो  15 सालों में सबसे कम, याने न्यूनतम है, जबकि हकीकत में मध्यप्रदेश के पास बिजली  उत्पादन पर्याप्त है | गुजरात सरकार भी निजी कंपनियों से बिजली खरीद रहा है और सरदार सरोवर बांध से बिजली बनाना टाल रहा है | क्योंकि उनको सिर्फ कंपनियों के लिये पानी चाहिए  और इसीलिए कच्छ और सौराष्ट्र के किसान भी आक्रोशित है, जिन्हें प्रधानमंत्री मोदीजी कहते हैं कि कुछ लोग सरदार सरोवर बांध के संबंध मात्र भ्रम फैला रहे हैं लेकिन असलियत में मोदीजी ने खुद लाभों का भ्रम फैलाया है | 2014 में 2019 मीलियन यूनिट बिजली बनी , 2015 में 2149 मीलियन यूनिट बिजली बनी, 2016 में 3200 मीलियन यूनिट बिजली बनी, तो फिर 2017 से बांध के 17 मीटर्स उंचाई के गेट बंद होने के बाद भी बिजली का निर्माण कम क्यों  होता गया | और जो पानी मध्यप्रदेश पहले से ही छोड़ रहा है उसमें कमी नहीं लेकिन जलवायु परिवर्तन. मोदीजी जानते हैं  आज के विकास की गलत आवधारणा का ही तो नतीजा है | जिसकी जिम्मेदार राज्य की सरकारें हैं |  और मध्यप्रदेश की सरकार ने जो भूमिका मुख्य रूप से ली है उसपर उन्होंने अड़े रहना चाहिए |  नर्मदा घाटी के लोग मध्यप्रदेश की नयी सरकार में स्थानापन्न पूर्व में समर्थक रहे मंत्री, मुख्यमंत्री से क्या यह अपेक्षा नहीं कर सकते हैं ?

            धार जिले के 24 गावों में 6000 परिवार है  लेकिन कुछ अधिकारी भ्रमित करके बता रहे हैं की पूरे डूब क्षेत्र में 6000 परिवार है जो बिलकुल गलत है | जबकि पूरे डूब क्षेत्र में करीबन 30,000 परिवार निवासरत हैं और जो 16,000 परिवारों को डूब से बाहर किया है, वह पूरी तरह से अवेधानिक है | जिसको 2010 में केंद्र की विशेषज्ञों की कमेटी ने नकारा है   |

            आज भी नर्मदा घाटी के हर गाँव में लोगों के साथ  हजारों पेड़  और मवेशी मन्दिर, मस्जिदे, जमात खाना, पीर दरगाह, जैन मंदिर है और जिस तरह से पूर्व की सरकार मन्दिरों से मूर्तियाँ हटाई उससे शिवलिंग भंग जैसे हो गये हैं | आज भी गाँव के गाँव भरे पड़े हैं | पुनर्वास नीति, कानूनों का पालन बाकी है | बिना पुनर्वास न तो गाँव खाली हो सकते हैं न तो बांध में पानी भर सकते हैं | हम केंद्र की सरकार को चुनौती देते हैं की हम बिना पुनर्वास बांध में पानी नहीं भरने देंगे | केंद्र शासन निष्पक्ष भूमिका अदा करे अन्यथा आदिवासी विरोधी और विस्थापित विरोधी साबित हो जायेगी जरुर |

            हम मध्यप्रदेश की सरकार का स्वागत करते हैं की जिन्होंने हमारे साथ सत्याग्रह में आकर संवाद किया और आज उसी संवाद को जारी रखा है मुख्यमंत्री हो या मंत्री हो, अभी अधिकारी, कलेक्टरो ने संवाद  जारी रखा है जबकि पूर्व की सरकार ने  संवाद कभी 15 साल में किया ही नहीं |

            लेकिन बांध से सरदार सरोवर बांध से मध्यप्रदेश के 192 गाँव और एक नगर को बिना पुनर्वास डुबाना सरासर अन्याय है, सुनीता बहन ने बताया आज गाँवो से स्कूलों को पुनर्वास स्थल पर स्थान्तरित करने से हजारों बच्चो की स्कूल छुट गई है | एक तरफ सरकारे ‘सर्व शिक्षा अभियान’. ‘स्कूल चले हम’ के अभियान में करोड़ो रूपये खर्च कर रही है और दुसरी ओर नर्मदा घाटी के बच्चो के साथ अन्याय |

            देवराम कनेरा ने बताया की पुनर्वास स्थल पर आज भी भी सर्वोच्च अदालत के 8 फरवरी 2017 के आदेश अनुसार आज भी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराइ गई है | आज भी नालियों का निर्माण, पानी निकासी की व्यवस्था, पीने के पानी, की व्यवस्था नहीं की गई है और जो टीनशेड्स बनाये गये हैं उनमे मात्र भ्रष्टाचार है |

            वहीं रेत खनन पर मेधा पाटकर जी ने बताया कि रेत खनन से यमुना नदी खत्म सी हुई है आज यही स्थिति नर्मदा में हुई है | आज सरदार सरोवर बांध के जलग्रहण क्षेत्र में 2015  से ही जबलपुर उच्च न्यायालय और हरित पर्यावरण न्यायाधिकरण ने रोक लगा रखी है | लेकिन आज भी भरसक रेत खनन जारी है I छोटा बड़दा में रेत खनन में हुई 5 मजदूरों की मौत के अलावा सेकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और नर्मदा मैय्या की तो हत्या की जा रही है | आज मध्यप्रदेश की राज्य सरकार ने समझना चाहिए नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवन रेखा है जो पिछली सरकार ने किया वह इस सरकार ने नहीं करना चाहिए | नर्मदा घाटी की यहीं है चुनौती……

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