राजस्थान में विधानसभा चुनाव के प्री-टेस्ट हैं उपचुनाव

-प्रमोदपाल सिंह

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राजस्थान में दो लोकसभा और एक विधानसभा क्षे़त्र के लिए हो रहे उपचुनाव पर प्रदेश की जनता का ध्यान टिका हुआ हैं। अगले साल दिसम्बर में होने वाले विधानसभा चुनाव के प्री-टेस्ट के रूप में इन उपचुनावों को आंका जा रहा हैं। प्रदेश में पूर्व केन्द्रीय मंत्री सांवरलाल जाट के निधन से अजमेर,महंत चांदनाथ के निधन से अलवर लोकसभा सीट खाली हुई। वहीं,मांडलगढ़ विधानसभा सीट कीर्तिकुमारी के निधन से खाली हुई। इन तीनों सीटों पर भाजपा काबिज थी।

भाजपा और कांग्रेस के लिए चुनावी वर्ष के शुरूआत में हो रहे उपचुनाव में जीत के बड़े मायने हैं। इससे यह पता चलेगा कि राजस्थान में बयार का रूख किस तरफ हैं। अजमेर लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए बुधवार को भाजपा के उम्मीदवार रामस्वरूप लांबा और कांग्रेस के प्रत्याशी रघु शर्मा ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए है। अलवर लोकसभा सीट से भाजपा के डा. जसवंत यादव ने नामांकन दाखिल किया। कांग्रेस के डॉ. करण सिंह यादव पहले ही नामांकन भर चुके हैं। मांडलगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा के शक्तिसिंह हाड़ा ने बुधवार को नामांकन भरा। कांग्रेस प्रत्याशी विवेक धाकड़ ने मंगलवार को नामांकन दाखिल किया था। अजमेर सीट से 22,अलवर से 15 व मांडलगढ़ से 18 उममीदवार नामांकन दाखिल कर चुके हैं। इन सभी सीटों पर नाम वापसी की अंतिम तिथि 15 जनवरी है। 29 जनवरी को मतदान होना है। एक फरवरी को मतगणना होगी।

अजमेर लोकसभा सीट पर भाजपा के सांवरलाल जाट ने कांग्रेस के सचिन पायलट को 1 लाख 71 हजार 983 मतों से पराजित किया था. जाट को बाद में केन्द्रीय राज्य मंत्री बनाया गया था। अलवर से लोकसभा सीट पर भाजपा के महंत चांद नाथ ने कांग्रेस के पूर्व केन्द्रीय मंत्री भंवर जितेन्द्र सिंह को 2 लाख 83 हजार 895 मतों से पराजित किया था. वर्ष 2013 के चुनावों में मांडलगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा की कीर्तिकुमारी ने कांग्रेस के विवेक धाकड़ को 16 हजार मतों से हराया था।

पहले गुटबाजी के लिए सुर्खियों में रही कांग्रेस इस बार एकजुटता दिखा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुजरात में सीटों की बढ़ोत्तरी के साथ नई उर्जा के साथ उपचुनावों में जुट गए है। वहीं,प्रदेश की कमान सचिन पायलट के हाथों में सुरक्षित कर आलाकमान का भरोसा अपनी जगह कायम हैं। दरअसल, उसे पता है कि पिछले विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद उसे दिसम्बर 2018 के विधानसभा चुनाव में पूरी तैयारी के साथ लड़ने की जरूरत है।

अलवर जिले में गोरक्षा और मुस्लिम आबादी में बढ़ोतरी को लेकर भाजपा विधायकों की टिप्पणी से विवाद पैदा हो गया था। उसी अलवर में भाजपा के लोकसभा उपचुनाव में उम्मीदवार डॉ. जसवंत यादव ने अलवर चुनाव प्रचार के सिलसिले में जसवंत यादव ढूंडारीया गांव में विवादित बयान दिया। नवजीवन वेबसाइट के मुताबिक वीडियो में जसवंत यादव यह कह रहे हैं कि मैं गांवों में गया था। तो लोगों ने कहा कि आपको वोट देंगे, लेकिन बीजेपी को वोट नहीं देंगे। बीजेपी तो हिंदुओं की पार्टी है। मैंने कहा अगर बीजेपी हिंदुओं की पार्टी हैं तो इसका मतलब क्या कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी हैं। इसके आगे भी कुछ कहा गया हैं।

बकौल सचिन पायलट भाजपा प्रदेश में भी घृणा और हिंसा की राजनीति कर रही है। लेकिन कांग्रेस प्यार और सौहार्द की राजनीति करेंगी और तीनों उपचुनाव जीतेगी। उन्होंने कहा कि जैसा कि राहुल गांधी ने गुजरात में किया। हम यहां भी उसी तर्ज पर काम करेंगे। पायलट कहते हैं कि लोगों ने कांग्रेस के लिए अपना मन बना लिया है। इसके उलट भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी का कहना था कि प्रदेश में कोई सरकार विरोधी माहौल नहीं है। हम सभी तीनों सीटें जीतेंगे। कांग्रेस के कब्जे वाली धौलपुर विधानसभा उपचुनाव अप्रेल में ही जीत चुके हैं।

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