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जन साहित्य पर्व कल से …!

“संयुक्त सांस्कृतिक मोर्चा” द्वारा जयपुर में ‘जन-साहित्य पर्व’ का दो दिवसीय आयोजन गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर- दिनांक 24-25 जनवरी 2018 को करने का निश्चय किया है। इस आयोजन के संदर्भ में दिनांक 23 जनवरी 2018 को प्रेस क्लब,जयपुर में एक प्रेस काॅन्फ्रेंस का आयोजन किया । इस दौरान आयोजित प्रेस काॅन्फ्रेंस को प्रसिद्ध रचनाकार कात्यायनी, चर्चित कथाकार रामस्वरूप किसान, समाजषास्त्री डाॅ. राजीव गुप्ता,वरिष्ठ पत्रकार ओम सैनी, कथाकार संदीप मील संबोधित किया।

प्रसिद्ध रचनाकार कात्यायनी ने बोला की आज साहित्य को समाज के दर्पण की विलासिता के स्त्रोत में बदला जा रहा है। उसे आम जन की पहुंच से दूर सिर्फ कुछ लोगों के मनोरंजन के लिए केन्द्रित किया जा रहा है। हमारा मानना है कि आम जन का अपने दुःख दर्दों से लेकर बेहतर भविष्य की कल्पना का साहित्य अब भी रचा जा रहा है, लेकिन आवारा पूंजी केहमलों ने उसे हाशिये पर धकेल दिया है। जन साहित्य पर्व समाज को समानता और न्याय की तरफ ले जाने वाले साहित्य पर चर्चा और विमर्श का मंच है। अमानवीयता के खिलाफ प्रतिरोध की संस्कृति ही इस पर्व का केन्द्रीय स्वर है। हमारे देश की संघर्षशील, मेहनतकश और गरीब जनता को देखते हुए हमारे यहाँ आज भी साहित्य की मूलधारा इसी ‘जन’ से सम्बन्धित है और उसकी चुनौतियाँ तथा मूल्य-प्रणाली भी अलग हैं। उसके सवाल भी अलग हैं और कला के मानदंड भी।

वरिष्ठ पत्रकार ओम सैनी ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहाकि हम चाहते हैं कि हमारा जो सौन्दर्यबोध और मूल्य-पद्धति है, उसमें प्रेमचंद के अनुसार सादगी और उच्च चिंतन की विशेष जगह है। साहित्य पर्व संस्कृति की जीवन्तता का हिस्सा है। संस्कृति की रचना सदैव जन -साधारण करता है और “श्रम ही संस्कृति है” की उपेक्षा के प्रत्युत्तर में जन साहित्य पर्वों का आयोजन आज के युग की जरूरत है, ताकि साहित्य के भी माध्यम से निरंकुशता के विरुद्ध जन आवाजों को अभिव्यक्ति दी जा सके। “संयुक्त सांस्कृतिक मोर्चा” जनवादी लेखकों, विचारकों, रंगकर्मियों, जनवादी संगठनों और संस्कृतिकर्मियों का एक मोर्चा है,जिसके द्वारा इस दो दिवसीय जन साहित्य पर्व का आयोजन 24-25,जनवरी 2018 को , स्थान- देराश्री शिक्षक सदन, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में किया जाना है, जिसमे देश भर
के जाने माने लेखक, चिन्तक और साहित्यकार शामिल होंगे .

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