पाण्डेय जी ने किया दलित आदिवासियों के ख़िलाफ़ एक राष्ट्रवादी गुनाह !

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( भंवर मेघवंशी )
” हिंदुत्व वादी सवर्ण नेता नित्यानंद पांडेय ने एससी ,एसटी समुदाय का सामाजिक एवं आर्थिक बहिष्कार करने की अपील की है “
कोई राष्ट्रवादी युवा वाहिनी है ,जो आरएसएस जनित लगती है ,क्योंकि उसके लेटरहेड पर संघ की शाखाओं में गाया जाने वाला गीत ‘स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित,रक्त का कण कण समर्पित, चाहते हैं मातृभू ,तुझको अभी कुछ और दें’ छपा हुआ है ,इसका ऑफिस करनाल के नेवल रोड पर दुकान नम्बर 4 में है और कोई नित्यानंद पांडे इसके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है ।
इस राष्ट्रवादी संगठन के इन राष्ट्रवादी महाशय ने देश भर के अनुसूचित जाति एवम जनजाति के व्यक्तियों के खिलाफ शत्रुता,घृणा और वैमनस्य की भावना फैलाते हुए  ‘एस सी एसटी के लोगों का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार करने’ की सार्वजनिक लिखित अपील जारी की है .
महान राष्ट्रवादी पंडित नित्यानंद पांडे ‘सवर्ण समाज’ के ‘सम्मानित लोगों ‘ को ‘राष्ट्रवादी नमन’ करते हुये इस प्रकार से अपील करते है –
” राष्ट्रवादी युवा वाहिनी देश के सवर्ण समाज के प्रचंड आग्रह को ध्यानगत रखते हुये उनके सम्मान, भावनाओं हेतु ‘एससी एसटी एक्ट बिल की तत्काल वापसी’ करने हेतु माननीय प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री उ.प्र. ,राज्यपाल उ.प्र.,प्रदेश अध्यक्ष भाजपा उ.प्र. को पत्र प्रेषित किया है ।
 जब तक केंद्र सरकार ,राज्य सरकार और भाजपा बिल वापस नहीं लेती है ,तब तक सवर्ण समाज के सभी बंधुवर से अपील है कि वह अपनी सुरक्षा हेतु एससी /एसटी समाज का बहिष्कार करें ,उन्हें अपनी कंपनियों/प्रतिष्ठानों / ,व्यवसाय में नौकरी न दें,इनके साथ सामाजिक व्यवहार न रखें ।
आपकी एकजुटता ही हम और हमारी पीढ़ी का उज्ज्वल भविष्य तय करेगा ,बंधुवर ,आशा ही नहीं अपितु विश्वास है कि आप समस्त भारत के सवर्ण समाज के सम्मान की रक्षा में इस वैचारिक आंदोलन को अपना प्रचंड समर्थन प्रदान करेंगे -भवदीय – नित्यानंद पाण्डेय ।”
पाण्डेय जी ने अपना मंतव्य साफ साफ शब्दों में प्रकट कर दिया है ,वो चाहते है कि इस देश के सवर्ण दलित और आदिवासी तबके का पूर्णतः बहिष्कार कर दें ,उनसे कोई संबंध न रखें ,उनको अपने मकान,दुकान ,खेत खलिहान,व्यापार वाणिज्य के प्रतिष्ठान कहीं भी काम न दें ,यहां तक कि काम धंधे में पार्टनर तक नहीं रखें । मतलब सम्पूर्ण छुआछूत ! छाया तक से भी परहेज करें ।
हालांकि नित्यानंद का यह कृत्य अजा जजा अत्याचार निवारण कानून के तहत दण्डनीय अपराध है, अगर देश भर के एस सी एसटी के मुर्दा लोग जाग जाएं और हर थाने में एक शिकायत दर्ज हो जाये तो पाण्डेय जी अपनी बाकी जिंदगी नित्य ही आनंद प्राप्त कर सकते है ।
एस सी एसटी एक्ट इसीलिए तो बना है ,अब तो यह और भी जरूरी लगता है ,क्योंकि एक आज़ाद देश मे ,एक लोकतांत्रिक देश में देश की 30 प्रतिशत जनता के विरुद्ध बाकी नागरिकों को खुलेआम उकसाया जा रहा है ,भड़काया जा रहा है ,उनके विरुद्ध नफरत फैलाई जा रही है और उनके सामाजिक आर्थिक बहिष्कार की सरेआम अपीलें की जा रही है ,ऐसे में लगता है कि आने वाले दिनों में देश के दलित आदिवासी समुदाय के प्रति जातिय नफरत और हिंसा बढ़ सकती है ,इसके लिए अब यह अत्यावश्यक है कि इस तरह का कठोर कानून जातिवादी तत्वों को ठीक करने के लिए अपना अस्तित्व बनाये रखें।
एससी एसटी एक्ट में नित्यानंद पांडेय टाइप के वैमनस्यता बढ़ाने वाले तत्वों के बारे में साफ लिखा हुआ है कि -अगर कोई अजा जजा के सदस्यों के खिलाफ शत्रुता,घृणा या वैमनस्य की भावनाओं की या तो लिखित या मौखिक शब्दों द्वारा या चिन्हों द्वारा या दृश्य रूपण द्वारा अभिवृद्धि करेगा या अभिवृद्धि करने का प्रयत्न करेगा या उनके किसी समूह का सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार करेगा या उसकी धमकी देगा ,वह कारावास से ,जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी ,किंतु पांच साल तक की हो सकेगी ,और जुर्माने से दंडित होगा।  संदर्भ -अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण संशोधन अधिनियम  की धारा 3 (1)(यू) व 3 (1) ( ज़ेड सी )
अब यह इस देश के अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों पर निर्भर करता है कि वे नित्यानंद महाराज को क्या और कैसी दक्षिणा देना पसंद करेंगे ? क्योंकि उन्होंने दलित आदिवासी तबकों की बहिष्कार की अपील करके कानूनन तो अपराध कर ही दिया है ,इसलिए पहला काम तो यह किया जाये कि उनके सम्मान में जगह जगह मुकदमें दर्ज हों ,देश के हर थाने में शिकायत दी जाये, हर पुलिस अधीक्षक तक ज्ञापन पहुंचे ताकि पांडेय जी के विरुद्ध ठीक से कार्यवाही हो सके ।
दूसरी बात इस अपील के दूरगामी परिणामों को सोचते हुए की जानी होगी,क्योंकि दलित आदिवासियों का एक अघोषित बहिष्कार शुरू हो चुका है ,इसका काउंटर करना होगा ,इसके लिए उनकी दुकानों का बहिष्कार ,उनके मंदिरों को दूर से ही नमस्कार ,उनको दान ,मान और मतदान न देने का सामूहिक निर्णय किया जाये। अपनी इकोनॉमी खड़ी की जाए।
देश का मेहनतकश दलित आदिवासी तबका इस लायक तो है ही कि वह अपनी जरूरत की चीजें बना सके,बेच सके और खरीद सके । एक बिजनेस मॉडल खड़ा करना होगा ,एक राजनीतिक विकल्प बनाना होगा ,सब कुछ नया करना होगा ,सब कुछ वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी ,अगर कोई समाज हमसे संपर्क न रखना चाहे तो हम कब तक जबरदस्ती उसके गले पड़ेंगे । छोड़िए ,वो उनके ,हम हमारे । हम अपना बनाएं ,अपनो को साथ लेकर बनाएं ,अपनो के लिए बनाएं ,ताकि किसी के मोहताज न रहें ।
तब तक के लिए मंदिरों में जाना बंद कर दीजिए,उनकी दुकानों से सामान मत खरीदिये और अगर आपके नाम उनकी बेनामी संपत्तियां है तो उस पर कब्ज़ा कर लीजिए,खा जाईये, डकार भी मत लीजिये,दंगे फसाद में मत जाईये, मुसलमानों और ईसाइयों से लड़ना झगड़ना बन्द कर दीजिए, भगवा रैलियों और आरएसएस की शाखाओं का पूर्णतः बहिष्कार कर दीजिए ।
अब से किसी को सेठ जी ,पटेल जी ,लम्बरदार जी ,ठाकुर जी ,पंडित जी मत कहिए ,उनके गली मोहल्लों को सफाई के अभाव में सड़ने दीजिये ,घर साफ मत कीजिये,गली साफ मत कीजिये,उनके झूठे बर्तन,जूते मत चमकाईये ,उनके कपड़े मत धोइये, उनके पशु चारण मत कीजिये,उनके खेतों में मत जाइये।
यहां तक कि नमस्ते ,दुआ ,सलाम भी  मत कीजिये ,छोड़ दीजिए ,उनको सताइये मत ,वो बेचारे अपने सवर्ण सम्मान की रक्षा कर रहे है ,उनको डिस्टर्ब मत कीजिये ।
थोड़े दिन करके तो देखिये ।
यह देश किसी एक जात या जमात से थोड़े ही चलता है ,यह मुल्क किसी एक समुदाय या वर्ग की बपौती थोड़े ही है ?
नित्यानंद पांडेय क्या सोचते है कि वे ही देश है ,उनका राष्ट्रवाद अगर हम दलित आदिवासियों के बहिष्कार से शुरू होता है तो वो करके दिखाएं और इसके परिणाम भुगतने को भी तैयार रहें ।
( लेखक शून्यकाल डॉटकॉम के संपादक है )

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