धुम्रपान करने वाले दोस्तों के नाम रक्षित परमार का खुला पत्र

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प्रिय मित्रों ,

आप मेरे अच्छे दोस्त है,गलती से आप स्मोकिंग की चपैट में आ चुके है,हां मुझे यह भी मालूम है कि इस बुरी लत से आप निस्संदेह पिछा छुडाना चाहते है मगर आप कामयाब नहीं हो पा रहे तो प्लीज इस आप इस पोस्ट ज़रूर पढ़े । ज़रा अपने बारे में सोचे कि आप स्मोक करके खुद के दुश्मन क्यों बन बैठे है ? पल भर के लिए सोचिए,अपने उन मित्रों के बारे में जो स्मोक नहीं करके अपने आपको और अपने दोस्तों,अनगिनत लोगों को निष्क्रिय धुम्रपान का शिकार होने से बचाते है ।

धुम्रपान की चपैट में आप अधिकांश दोस्त एक बडी बात जो कभी महसूस ही नहीं कर सके,वह है,आपके आस पास के निर्दोष दोस्त और दूसरे लोग जो आपके द्वारा छोड़ गये विषैले,रासायनिक धुएं को न चाहते हुए भी आपकी दोस्ती और आपकी दादागिरी दोनों के डर से बस सहते रह जाते है,न चाहते हुए भी उनको आपकी तरफ से या तो उनको अपना मुंह फेरना पड़ता है या उठकर चले जाना पडता है, तब भी आप धुएँ के छल्लों के साथ गुलछर्रे उड़ा रहे होते हो ! कैसे हो मेरे दोस्त लोग तुम ?

प्राणघातक विषाक्तता से सने हुए धुएं को तुम दिन में जाने कितनी ही बार अपने फेफड़ों के भीतर यूं घुस जान देते हो ! दोस्तों न जाने कितने ही लोगों को आपके द्वारा छोड़े गये धुएं से एलर्जी की समस्या होने लग जाती होगी ओर यकीनन ऐसा होता भी है । कही न कही स्मोकिंग करने वाले दोस्तों के परिवारजन भी उस धुएं से या इसकी बदौलत मुंह में बने गंदे , बदबूदार श्वास की बदौलत आपसे किनारा करने लग जाते है और इस बीच आपको भी कही बार बहुत बुरी तरह अपमानित महसूस भी होना पड़ता है , मगर गलती किसकी है ? यह भी तो सोचिए ।

मुझे अच्छी तरह से मालूम है कि मेरी इस पोस्ट से मेरे प्रति आपकी खीज़ ओर भी बढ़ेगी,आप में से कई दोस्त मुझसे दूरियाँ बनाने की सोचेंगे , कही लोग मुझे सोशल मीडिया पर ब्लॉक और अनफ्रैंड करके मेरी इस बात को सिरे से ही खारिज कर वहीं पुराने वाले धुएं से सने छल्ले उडाने के ख़्वाब देखेंगे , देखेंगे ही नहीं बल्कि हकीकत में उडायेंगे भी ।

जो दोस्त शादीशुदा है वो कैसे और क्यों स्मोकिंग करके अपनी अर्धांगिनी के पास चले जाते है , उन्हें अपनी इस लत पर जाने किस बात का गर्व होता है ! ज़रा समझना चाहिए न भाई , उन्हें इस बारे में अवश्य सोचना चाहिए । आप धुम्रपान छोड़ने का मानस बनाए तो जाने कितने लोग चैन की सांस ले सकेंगे ! आप सीगरेट , बीडी , चीलम , जी चाहे उतनी पीये लेकिन आपकी बुरी आदतों का शिकार कोई ओर क्यों हो भई ? ये भी तो सोचो !

हां अगर आप छोड़ सकते है तो अभी भी कोई देर नहीं हुए । छोड़ दीजिये ! दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर मांझी ने तो एक पहाड़ काट कर रास्ता ही बना दिया था तो ये तो एक बहुत मामूली सी बात है आपके लिए ओर हां आप ऐसा बेशक इसे कर भी सकते है , ओर इतनी क्षमता तो आप में अब भी शेष बची है जो आपकी ज़िंदगी में एक बार पुनः बचपन की तरह तंदुरुस्ती का सुरज उगा सकती है । बात जब आपके आत्मसम्मान की आये हालांकि आये ही नहीं । अब तो समझो कि आ ही गयी है तो आपके इरादों को एक बार दुबारा मज़बूती के हथोड़े से सख्त करने की आवश्यकता है ।

जीते जी क्यों अपने फेफड़ों को उस अनावश्यक धुएं से सराबोर होने देते हो । क्यों कुदरत के इस ख़ूबसूरत उपहारों को नेस्तनाबूद करने पर तुले है आप ? ज़रा दिल पर हाथ रखकर सोचिएगा । मां जिसने हम सबको जन्म दिया है क्या वो ऐसी कल्पना भी कर पाती है कि अपने बेटे के सुकोमल फेफड़े स्मोकिंग की आड़ में जल बुनकर राख में तबदील होने लग जाये ? जी दोस्तों कतई नहीं ! मगर हम उनकी नैक भावनाओं के इतर आगे बढते चले जाते है । कई दफा उतने आगे निकल जाते है कि वापस मुड़ने का हौंसला तक नहीं रह जाता । तब कहीं लोगों के मन में आता है कि नहीं अब बस ।

अब तो अपन कुछ नहीं कर सकते ! बस यही तो हमारे मानसिक रुप से हार जाने का संकेत है । व्यक्ति को कभी भी मन से नहीं हारना चाहिए । चाहे तन आपका साथ न दें । दुनिया की कोई भी मां अपने बेटे का ऐसा हश्र कभी नहीं देखना चाहती है दोस्तों प्लीज़ कुछ तो इस बात को समझने का प्रयास करना ।

देशभक्ति दिखाने की हिम्मत है तो प्लीज़ नो स्मोकिंग को लाइफ में जगह दीजिये ।

आपका ही
रक्षित

( फोटो क्रेडिट – प्रवक्ता डॉटकॉम)

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