हमारी नैतिकता संविधान के भीतर है- अरुणा रॉय

पी.यू.सी.एल. राजस्थान राज्य का 10वां राज्य अधिवेशन

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अजमेर (9 जून 2019)

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‘भारत में लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं के पुनः निर्माण’(Rebuilding Democracy and Democratic Institution) पर पी.यू.सी.एल. राजस्थान राज्य का 10वां राज्य अधिवेशन विजय सिंह पथिक कालेज के सभागार में प्रारम्भ हुआ। पी.यू.सी.एल. राज्य महासचिव डा. अनन्त भटनागर ने पी.यू.सी.एल. की ऐतिहासिक जानकारी से अवगत कराते हुए उदघाटन सत्र का संयोजन किया।पी.यू.सी.एल. राज्य उपाध्यक्ष डी.एल. त्रिपाठी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि आज का सम्मेलन ऐतिहासिक बनने जा रहा हैं। आज स्थिति अत्यन्त विकट हैं।अनेक कानून पी.यू.सी.ल की पहल और संघर्ष के कारण ही आ पाए हैं। आज जरूरत इस बात की हैं कि संविधान पर जो हमला हो रहा हैं,

उसे हम रोकें और संविधान को सशक्त करें।  आज नफरत फैलाई जा रही है, यह दुःखद है।समानता की लड़ाई सदियों से चली आ रही हैं ।देश की एक जुटता के लिए हमें काम करना होगा। उस अवसर पर त्रिपाठी जी ने प्रेमचंद की एक कविता सुनाई और अधिवेशन में आए अतिथियों और

प्रतिभागियों का स्वागत किया।

रिटायर्ड आई.ए.एस. श्री हर्ष मंदर ने लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर  अपनी बात रखते हुए कहा कि देश के इतिहास में ऐसा समय भी आता है जब  आने वाली पीढियां हमसे पूछेगी कि आपने क्या किया।आज संविधान की बहाली की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर आन पड़ी हैं।1947 में स्वतंत्रा प्राप्ती के बाद गांधी जी ने 40 दिन का उपवास रखा, जब देश आज़ादी का उत्सव मना रहा था

पर देश में हिंसा का माहौल भी था।55000 सैनिक जिस हिंसा को नहीं रोक पाए, वह हिंसा एक व्यक्ति (गांधी जी) रोक पाए।गांधी जी ने कहा था कि – मैं दिल्ली नहीं छोड़ सकता,

जब तक एक मुस्लिम बच्चा बिना डर के क्रिकेट नहीं खेल सके।

मेरा काम तब तक पूरा नहीं हो सकता, जब तक आपसी भाईचारा न आ पाए।यही आज की चुनौति है। जब आज़ादी  मिली,  तब प्रश्न था कि किस तहर का देश हिन्दुस्तान रहेगा? हर व्यक्ति बराबर का हक रखेगा, पर इस सोच के खिलाफ मुस्लिम लीग खडी थी।

जब पाकिस्तान बना तब भी बहुत से मुसलमान पाकिस्तान नहीं गए

तथा वे हिन्दुस्तान में ही रहे, इसी भावना के साथ कि यहां पर सभी

को समान अधिकार हैं। भारतीय संविधान के छः शब्द बहुत ही महत्वपूर्ण  है।धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद, न्याय, स्वतंत्रता,समानता और बंधुता ।हर्ष मंदर ने अपनी बात चालू रखते हुएकहा कि जब पहलू खान

पर चाबुक पड़ता है तो उसका दर्द मे महसूस करता हूं, यहीं बंधुता हैं।बंधुता अत्यन्त आवश्यक है।

2014 में तीन मे से एक ने मोदी का समर्थन किया तब बहुत से कारण थे।2019 के चुनावों में न रोजगार की बात हुई, न अर्थव्यवस्था की

बात हुई और ना किसानों की स्थिति की बात हुई।इस बार केवल नफरत की बात हुई। टेरर के अक्युज्ड को चुनाव

लड़वाया गया। इस बार पांच मे से 2 वोट आरएसएस की विचारधारा के पक्षमें गए। बंधुता पूरे देश में चरमरा गई हैं। इस बढ़ती नफरत को देखते हुए हमने ‘‘कारवां ए मोहब्बत’’ यात्रा चालू की I

बहुप्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता और मैग्सेसे अवार्ड विजेता श्रीमती अरूणा  राय ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमिकी बात करते हुए कहा कि 1975 में

ऐसा ढांचा बना जो आज भी खडा है।पी.यू.सी.एल. को दबाने, डराने की कोशिशें हुईं पर यह संगठन मजबूत

होता गया । आज देश के हालात ठीक नहीं है।हमें संविधान को पढ़ना होगा,पुनः समझना होगा ताकि कुतर्क का

हम जवाब दे पाएं। नैतिकता को हमें लाना होगा।हमारी नैतिकता संविधान के भीतर हैं। नैतिकता स्थापित करना बहुत जरूरी हो गया हैं। हिंसा और अहिंसा के बीच क्या सोच है, उसे अच्छी तरह समझना होगा। सूचना का अधिकार हमने संघर्ष से प्राप्त किया। लेकिन सूचना मांगते है

तो देते नहीं। नफरत की सोच बढ रही है, पर नफरत की सोच को हटाया जा सकता है।हमें अपनी लडाई जारी रखनी होगी ।

उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता युवा वकील शादान फरासत ने कहा

चुनाव  परिणाम हमारे सामने हैं।  पिछले पांचसात सालों से फेक न्यूज का चलन बढ चला हैं। टी.वी. न्यूज चैनलों पर समाचार रहे नहीं।व्हाटसप, फेसबुक, सोशल मीडिया, फाल्स न्यूज, फेक न्यूज से भरे पडे है।हमें जमीन से जुडकर काम करना होगा। जनता के बीच रहकर

काम करना होगा। युवा लोग कानून की जानकारी लें।

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