अब तो समझ में आ गई होगी आपको गद्दार नेताओं की गंदी राजनीति !

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(बी एल बौद्ध )
अजा जजा एक्ट को लेकर 2अप्रैल को शोषित समाज के बुद्धिजीवियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, अभिवक्ताओं,विद्यार्थियों, शिक्षित बेरोजगारों, कामगारों, मजदूरों,गृहणियों एवं विशेषकर तकरीबन सभी सामाजिक संगठनों ने एक साथ मिलकर भारत बंद किया था जो कि भारत के ही नहीं बल्कि विश्व के इतिहास में दर्ज हो गया। दो अप्रैल के भारत बंद की विशेषता यह रही कि बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक सभी दुकानों के शटर बंद रहे। इस बंद से शोषित समाज के हौसले बुलंद हुए तो वहीं मनुवादी सरकारें सोचने पर मजबूर हो गई कि अचानक से यह सब कैसे हो गया जबकि इसके बारे में न तो भारत की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक शब्द तक बोला गया और न प्रिंट मीडिया ने एक शब्द तक छापा गया ।

इस भारत बंद के बाद शोषित समाज के लोग अपने नेताओं से बहुत ज्यादा नाराज चल रहे हैं क्योंकि अपने समाज के इन नेताओं के एक इशारे पर समाज की लाखों की भीड़ एकत्रित होकर उनके साथ खड़ी मिलती थी लेकिन जब समाज को इन नेताओं की जरूरत पड़ी तो सबके सब नेता भूमिगत हो गए।

2अप्रैल को दोपहर के बाद सरकार ने भारत बंद को कूचलने में कोई कसर बाकी नहीं रखी, अत्याचार की सभी हदें पार करदी गई थी निर्दोष लोगों को गोलियों से भूना जा रहा था, बेवजह लाठियां बरसाई जा रही थी, बस्तियों में घुसकर महिलाओं को बेइज्जत किया जा रहा था, यहां तक की निर्दोष लोगों पर संघीन धाराएं लगाकर उनको जेलों में डाला जा रहा था एवं बाबा साहेब अंबेडकर पर भी पुलिस द्वारा अभद्र टिप्पणी की जा रही थी यहाँ तक कि नीले रंग के मिशन ध्वजों एवं पंचशील के शांति ध्वजों को भी सड़कों पर डालकर पुलिस ने अपने जूतों से रौंद डाला। इतना सब कुछ होने पर भी शोषित समाज के इन नेताओं का बिलकुल भी दिल नहीं पसीजा कि हमारे समाज के साथ सरकार ऐसा बुरा बर्ताव क्यों कर रही है ?

इन गद्दार नेताओं को जरा सी भी शर्म महसूस नहीं हुई कि आरक्षित सीटों से हम चुनाव जीतकर आये हैं तो फिर आज समाज के अधिकारों के लिए हम चुप क्यों हैं। लेकिन कोई बात नहीं है शोषित समाज के लोग अब अपना मन बना चुके हैं कि चुनावों में इन नेताओं की नेतागिरी को मटियामेट करके ही दम लेंगे।

शोषित समाज के इन नेताओं को भी एहसास हो चुका है हमारा समाज हमसें बहुत ज्यादा नाराज चल रहा है और चुनावों के समय अपने समाज की बस्तियों में भाषण देना तो बहुत दूर की बात है वहां प्रवेश करना भी मुश्किल होगा इसी के चलते इन नेताओं ने अपने आकाओं से गुहार लगायी है कि हमारी राजनीति खतरे में पड़ चुकी है आने वाले चुनावों में समाज हमसे जवाब पूछेगा की आपने अजा जजा के लिए क्या किया ?

इस बात को लेकर अंदर ही अंदर जमकर मंथन किया कि इन नेताओं की राजनीति को कैसे बचाया जाए एवं आखिरी में गंदी राजनीति का खेल रचा गया जिसके तहत नो अगस्त को भारत बंद करने की पटकथा लिखी गई और मनुवादी मीडिया के द्वारा इसका प्रचार शुरू करवाया गया लेकिन जब इन नेताओं को अपने गुप्त सूत्रों से पता चला कि नो अगस्त का भारत बंद सफल होना मुश्किल है इसलिए अब ये नेता शायद भारत बंद को रद्द भी कर सकते हैं और इनकी राजनीति बचाने के लिए सरकार संसद में SC, ST एक्ट पर अध्यादेश लाने की चर्चा करने लगी है।

शायद अब आप सभी को समझ में आ गया होगा कि हमारी दो अप्रैल की क्रांति का फल भोगने के लिए हमारे समाज के कुछ गद्दार नेता कैसी गंदी राजनीति कर रहे हैं।

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