मेरी भूटान यात्रा -2

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भूटान में प्रवेश करते समय आपको बिल्कुल भी अहसास नही होता है कि आप किसी अलग देश मे प्रवेश कर रहे हो ,सब कुछ सामान्य ,जैसे भारत मे ही घूम रहे है ,वैसा ही । प्रवेश प्रक्रिया भी सरल है ,बॉर्डर गेट के सामने ही रॉयल गवर्नमेंट ऑफ भूटान का वह ऑफिस मौजद है जो भारतीय नागरिकों को वोटर कार्ड दिखाने और एक फॉर्म भर कर देने पर एक अस्थायी प्रवेश पत्र जारी कर देता है ,इसमें वोटर आईडी के साथ 2 पासपोर्ट साइज के फोटो लगते है ,पर्यटको की अधिकता वाले दिनों में इस प्रक्रिया में अधिकतम एक घण्टा लग सकता है जबकि आम दिनों में यह महज आधे घण्टे का काम है ,आपका एक् फ़ोटो भी खींचा जाता है और आपके फिंगरप्रिंट लिए जाते हैं ,इसके लिए व्यक्तिगत मौजूदगी अपेक्षित रहती है ।

हालांकि मुझे परमिट मिलने में थोड़ी सी प्रतीक्षा करनी पड़ी ,क्योंकि मेरा जर्नलिस्ट होना उन्हें रास नही आया ,यह अंडरटकिंग देनी पड़ी कि मैं कोई रिपोर्टिंग नही करूँगा ,सिर्फ पर्यटक के नाते ही मेरा यह विजिट रहेगा ।

परमिट मिलने के बाद आप आराम से भूटान के सुरम्य क्षेत्र का भ्रमण कर सकते है ,लेकिन एक सावधानी जरूर रखें ,प्रवेश पत्र जारी करने वाला यह कार्यालय सुबह 9 से 5 बजे तक ही खुला रहता है और शनिवार ,रविवार को बंद रहता है इसलिए कार्यदिवसों पर ही ऑफिस टाइम पर जाना उचित होता है ,हालांकि बिना परमिट बने भी आप बॉर्डर के शहर फुँशलिंग में 5 किलोमीटर के इलाके में घूम सकते है और अपना वोटर आईडी दिखा कर रात भी रुक सकते है ।

यहाँ के होटल काफी साफ सुथरे ,वेल फर्निश्ड और अच्छी सेवा देने वाले है , रेट भी वाज़िब होते है ,लूट नही है ,बाजार भी लगभग इसी प्रकार के है ।

एक बात और बताता चलूं कि भारतीय मुद्रा रुपये की कीमत और भूटानी मुद्रा न्यूगलटरम है जिसे न्यूट्रम बोला जाता है ,दोनों की कीमत बराबर है ,यहां सहजता से भारतीय रुपये स्वीकार लिए जाते है और बदले में आपको न्यूट्रम दे दिए जाते है ।

अगर आप सड़क मार्ग से भूटान में आ रहे है तो भारतीयों के लिए पासपोर्ट या वीसा जरूरी नही है,मगर फ्लाइट से आने वालों को अपना पासपोर्ट दिखाना पड़ता है ,जो छह माह पुराना बना होना चाहिये ।

अरे ,यह बताना तो मैं भूल ही गया कि आप यहां किस साधन और रास्ते से आ सकते है ! अगर आप ट्रेन से आना चाहते है तो आपको दिल्ली से न्यू जलपाईगुड़ी तक ट्रेन मिलती है ,वहां से टैक्सी लेकर बॉर्डर तक आना होगा ,अगर आप सड़क मार्ग से आने के इच्छुक है तो कलकत्ता ,गैंगटोक और सिलीगुड़ी आदि रास्तों से भूटान ट्रांसपोर्ट सर्विस की बसें और प्राइवेट टेक्सी आराम से मिल जाती है । आप दिल्ली से बागडोगरा अथवा कोलकाता से बागडोगरा फ्लाइट ले सकते है ,एयर इंडिया से लेकर स्पाइस जेट ,गो एयर ,इंडिगो ,विस्तारा आदि की फ्लाइट्स बागडोगरा पंहुचाती रहती है ,एयरपोर्ट से प्रीपेड टेक्सी हायर कर सकते है जो कि 3 हज़ार रुपये तक लेकर आपको बॉर्डर तक पंहुचा देती है ,लेकिन अगर आप बारगेनिंग करना चाहते है तो एयरपोर्ट से बाहर आ जाइये ,थोड़ा मोल भाव कीजिये ,आपको 22 सौ से 25 सौ के बीच एसी /नॉन एसी टेक्सी मिल जाएगी जो अगले 4 घंटे आपको फुँशलिंग पंहुचा देगी ।

रास्ता टकाटक है,सड़कें बढ़िया बन चुकी है ,बागडोगरा से जयगांव के रास्ते पर आप तीस्ता और तुरसा जैसी सदानीरा नदियां मिलती है ।

रास्ते मे बंगाल सफ़ारी के वन क्षेत्र में सड़क पर मदमस्त जंगली हाथियों का झुंड आ गया ,गाड़ियां अपनी अपनी जगह ठहर गयी ,कुछ छोटे वाहन चालक तो डर कर गाड़ी मोड़कर पीछे भी जाने लगे ,पर हमारी गाड़ी के ड्राइवर तो इसी इलाके के थे ,वो इन हाथियों से सुपरिचित निकले ,बोले -चिंता नही कीजिये ,अभी निकल जाएंगे ,वाकई कुछ ही मिनट में वह गजसमूह जंगल की तरफ बढ़ चला और हम अपनी मंजिल की तरफ । ये नज़ारे सिर्फ सड़क मार्ग की यात्रा में ही संभव है ।

हवाई यात्रा की अपनी सहूलियतें और अपने नुकसान है ,इसलिए अगर फ्लाइट से आप भूटान आने के इच्छुक है तो आपको दिल्ली या कोलकोता से ड्रयूक एयर अथवा ड्रयूक एयर लाइन्स की उड़ान पकड़नी होगी ,जो पारो पंहुचाती है। ड्रयूक भूटान का ही प्राचीन नाम है, इसी के नाम पर उनकी एयर लाइन्स है ,ड्रयूक एयर सरकारी है और ड्रयूक एयर लाइन्स निजी एयर लाइन्स है,जिस पर तासी कम्पनी का मालिकाना हक है । अन्य किसी भी देश की उड़ानों को आने जाने की इजाज़त नही है ,सिर्फ ड्रयूक ही इसके लिए स्वीकृत है ।
ड्रयूक एयर दिल्ली ,कोलकाता ,ढाका ,काठमांडू ,यंगून और बैंकाक से भी उड़ान भरती है ।

पारो बहुत ही छोटा हवाईअड्डा है ,जो एयरपोर्ट कम और बौद्ध मठ ज्यादा दिखलाई पड़ता है ,पहाड़ियों के बीचोंबीच बनाया गया है ,इन चट्टानों में उड़ान भरना और उतारना और किसी के वश की बात नही है । मेरा तो सुझाव है कि ट्रेन या बस लीजिये अथवा बागडोगरा तक डोमेस्टिक फ्लाइट ले लीजिए ,सस्ता भी रहेगा और प्रकृति के नजारे भी देख पाएंगे ।

– भंवर मेघवंशी
( सामाजिक कार्यकर्ता एवम स्वतंत्र पत्रकार )

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