मुसलमान तो कहीं नहीं जाएंगे, कटियार साहब !

आप क्यों नहीं चले जाते ,जहाँ जगह मिले वहां ?

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– आशुतोष कुमार

भारत में जो मुसलमान है ,ये बीस करोड़ भारतीय भारत में ही रहेंगे,कटियार जी.आपको पसंद नहीं है तो आप चले जाइए.जहां जगह मिले.मुस्लिम आबादी के लिहाज से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश भारत आपसे ज़्यादा मुसलमानों का अपना वतन है.क्योंकि आपको भारत के संस्कार नहीं मिले हैं.जहां से मिले हैं,वहाँ शौक से चले जाइए.

ये बीस करोड़ मुसलमान भारत की मिट्टी से बने हैं.इन्होने भारत की धरती को अपने खून से सींचा है और भारत की हवाओं को अपने पसीने के फूलों से मुअत्तर किया है.इस मिट्टी और इस हवा से उन्हें कौन जुदा कर सकता है! आपको पता नहीं.आपकी वैचारिक जड़ें यहाँ की मिट्टी में हैं नहीं. आपको इज़ाज़त है.जाने की.

आपके उदगार जिस भाषा में व्यक्त होते हैं, जिसके बिना एक लफ्ज़ आप नहीं बोल सकेंगें,उस हिन्दवी ज़बान में मुसलमान पोर पोर में समाए हुए हैं. जिस हिन्दूपन में तमाम हिन्दुस्तानियों की साँसें गुंथी हुई हैं, उसमें मुसलमान पूरमपूर समाए हुए हैं. हिंदू, इस खूबसूरत प्यारे नाम पर भी उन्ही के दस्तख़त हैं. रसोई के जिस रस और आस्वाद में हमारी जान बसती है, उसमें मुसलमानों के पसीने की खुशबू है. हमारे सबसे आलीशान नाज़ुक मोहक परिधान मुसलमानों की ईजाद है. हमारी खेतीबारी, व्यापार , राजनीति , न्याय प्रणाली , विचार प्रणालियाँ – सब पर उनके हाथों की अमिट गहरी छाप है. इसे कौन हटा सकता है. आपको अच्छा नहीं लगता यह सब तो आप यहाँ क्या कर रहे हैं.

आप ताजमहल का नाम तेजमहल रख देंगे, लेकिन दुनिया में ताजमहल एक ही है और वो यहीं रहेगा ,कहीं नहीं जाएगा . लाल किला यहीं रहेगा. यौमे आज़ादी पर हर साल तिरंगा वहीं लहराएगा. तिरंगा, हरा-सफ़ेद-केशरिया, भी वही रहेगा. आज़ादी की पहली लडाई के महानायक बहादुरशाह जफर को दुश्मनों ने भले दो गज जमीन तक यहाँ नसीब न होने दी हो, पर उसकी आरजू और उसका इंतज़ार यहाँ उठने गिरने वाली हर सांस में समाई है. वली, मीर, ग़ालिब, इक़बाल, फैज़ यहाँ की हर धडकन में समाए हैं. इन्हें कौन कहाँ ले जाएगा .

आपको इन सब से अजनबियत महसूस होती है, घबराहट होती है, कुछ पल्ले नहीं पड़ता ? अरे, तब तो यह मुल्क आपके रहने लायक नहीं है. वैसे तो हम चाहते हैं कि आप यहीं रहें , यहीं के होके रहें , यहाँ की तहजीब सीख कर रहें, लेकिन अगर बहुत ज़्यादा परीशानी महसूस हो रही है तो सोच लीजिए .कोई और जगह देख लीजिए.हम भारी मन से ही सही, लेकिन आपको ससम्मान विदा करेंगे.

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