मिशन..मिशन…काहे का मिशन…?

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(डॉ.एम.एल परिहार)


मिशन..मिशन…काहे का मिशन…? 

काम धंधा करो, कुछ कमा भी लो…

कल मेरे पास एक युवा का बार बार मिस्ड कॉल आ रहा था। आखिर मैंने ही वापस कॉल कर पुछा , भाई ! बार बार मिस्ड कॉल क्यों कर रहे हो ?
वह विनम्रता से बोला,. सर , मोबाइल में बैलेंस नहीं है इसलिए । भीम बिजनेस एक्सपो के बारे में जानना चाहता हूं।
मैंने पूछा, आप क्या करते हो?
युवक ने कहा, मैं मिशन में काम करता हूं
कोई पढाई नौकरी या काम धंधा ?
नहीं ,सर..सिर्फ मिशन में काम करता हूं।
मैंने अपना समझकर उसे समझाया
भैया, कल से मिशन में काम करना बंद कर लो,पूरी तरह से बंद। परिवार और खुद के लिए काम धंधा करो ।यह कमाने की उम्र हैं इसलिए कुछ कमा लो ताकि शादी कर घर बसा सको, फिर मिशन का काम करना। आपके मोबाइल में बात करने के लिए दस रुपये तक नहीं हैं क्या मिशन में काम करोगें और क्या उसे आगे बढाओंगे ? उल्टा आप तो बाबासाहेब के मिशन को बदनाम कर रहे हो। माता पिता या पत्नी को घर परिवार चलाने व बच्चों की एजुकेशन के लिए पैसा नहीं दोंगे तो सबसे पहले घर वाले ही इस कथित “मिशन ” को घर से बाहर फेंक देंगे और कोसेंगे। यही नहीं दूसरों को भी इस रास्ते चलने के लिए मना करेंगे। खैर….
साथियों आज हमारे चारो ओर ऐसे काफी युवा मिशन में काम करने के नाम पर अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं और परिवार के सपने तोड़ रहे हैं। हमें यह याद रखना है कि आर्थिक समृद्धि के बिना हमारा उद्धार है ।धन की कमी के कारण सारे मिशन और आंदोलन अधबीच ही धराशायी हो जाते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को पहले किसी छोटे मोटे बिजनेस या सरकारी नौकरी में आधार मजबूत बना कर ही बुद्ध व बाबासाहेब की मानवतावादी विचारधारा के प्रचार के लिए सामाजिक क्षेत्र में आना हैं। अंबेडकर की फोटी लगी पसीने से तरबतर टी शर्ट पहने,सिर पर नीली पट्टी बांधने, गले में नीला दुपट्टा डालकर सिर्फ “जय भीम” के नारों से कारवां आगे नहीं बढेगा बल्कि इसके लिए पहले वैचारिक जागृति व आर्थिक मजबूती जरूरी हैं।

(डॉ.एम.एल परिहार)

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