आम जन का मीडिया
Media has become an enemy to such an extent!

मीडिया मुसलमानों का इस हद तक दुश्मन हो चुका है !

सप्ताह भर पहले के अखबार उठाईये हिन्दी से हिन्दुत्व मीडिया बने समाचार पोर्टल और टीवी के शीर्षक देखिये, उन शीर्षकों को देखियेगा जिसमें मालेगांव ब्लास्ट के आरोपी कर्नल श्रीकांत पुरोहित को जमानत मिली है.

अखबार के, पोर्टल्स के शीर्षक, और टीवी के स्लग कुछ इस तरह हैं-‘ नो साल जेल से रिहा बाहर आये कर्नल पुरोहित.’ यहां ‘आये’ का जिक्र है, जो इस बात की तस्दीक करने के लिये काफी है कि यह ‘आये’ सम्मान के लिये बोला जा रहा है, लिखा जा रहा है, प्रसारित किया जा रहा है.

अब जरा एक खबर को गौर से देखिये, अभी कुछ न्यूज पोर्टल्स और टीवी चैनलों पर एक खबर प्रसारित हो रही है, खबर डॉ. जाकिर नाईक को लेकर है. उन्हीं मीडिया संस्थानों ने इस खबर का शीर्षक कुछ इस तरह लिखा है- ‘जाकिर नाईक ने खेला मुस्लिम कार्ड, बोला- हिंदू राष्ट्रवादियों की सरकार है, इसलिए सताया जा रहा है’ 


जाकिर नाईक किसी बम विस्फोट के आरोपी नहीं हैं, उन पर किसी शहर में बम फोड़कर लोगों की जान लेने का भी आरोप नही हैं, उसके बावजूद मीडिया उन्हें अपमानित कर रहा है सिर्फ इसलिये कि जाकिर नाईक ‘जाकिर’ हैं कोई कर्नल पुरोहित नहीं.

कर्नल पुरोहित मालेगांव ब्लास्ट का आरोपी है, उस पर बम फोड़कर सात लोगों की जान लेने का आरोप है और वह जमानत पर जेल से बाहर आया है, न कि उसे अदालत ने बेकसूर बताते हुये बरी किया है. इसके बावजूद उसका महिमामंडन किया जा रहा है. आखिर किसलिये ?

सिर्फ इसीलिये कि कर्नल पुरोहित कर्नल परवेज नही है ? मीडिया के दौगलेपन का यह सिलसिला आज से नहीं दशकों से चालू हैं, कई बेगुनाह नौजवान तो ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ मीडिया की वजह से आतंकवादी माना गया और बाद में वे अदालतों से बरी होकर आये हैं. मीडिया ऐसी कायराना हरकत करके साबित कर रहा है कि उसकी मुसलमानों से दुश्मनी किस हद तक जा पहुंची है.

  • वसीम अकरम त्यागी                                                                                    ( लेखक मुस्लिम टुडे के संपादक है और जाने माने युवा चिन्तक है )

Leave A Reply

Your email address will not be published.