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Makar Skranti and science!

मकर सक्रांति और विज्ञान !

- अंकित राज

मनोरंजन की दृष्टि से त्योहारों और मेलों अपना सांस्कृतिक महत्व है,लेकिन मनोरंजन के नाम पर अन्धविश्वास और अवैज्ञानिक मान्यताओं को बढ़ावा देना बेहद शर्मनाक है। इसी तरह के अज्ञानता और अंध्विश्वास से लबरेज है “मकर सक्रांति”

पहले तो ये जान लीजिए कि “मकर और सक्रांति” का मतलब क्या होता है? मकर- ये प्राचीन खगोल विज्ञानियों द्वारा रचित 12 राशियों में से एक राशि का नाम है। सक्रांति- गति। प्राचीन समय में खुद को खगोल विज्ञानी कहने वालों ने सूर्य के मार्ग को 12 भागों में बांटा था। इस मार्ग को नाम दिया गया “क्रांति वृत्त” ,ये 12 भाग है – मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन। प्रत्येक भाग को राशि कहा गया और सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश को ‘सक्रांति’ कहते हैं।

मकर सक्रांति किसे कहते है? जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश होता है, तब इस सक्रांति को ‘मकर सक्रांति’ कहते हैं।

झोल क्या है?

अब जरा छुटपन में पढ़े अपने साइंस क्लास को याद कीजिए,क्या पढ़ाया गया था? यही न कि पृथ्वी गतिशील है, सूर्य नहीं। पृथ्वी सूर्य के चारो तरफ चक्कर लगाती है, सूर्य अपने जगह पर स्थिर है,लेकिन मकर सक्रांति मानने का तर्क कहता हैं कि सूर्य गतिशील है और ये दूसरी राशियों में प्रवेश भी करता है। 21वीं सदी में भी सूर्य द्वारा पृथ्वी के गिर्द चक्कर लगाने की बात करना कितना शर्मनाक है। ये समाज में फैले अन्धविश्वास को दर्शाता है।

अब भी ये मान लेना चाहिए कि पुराण – ग्रन्थ आधुनिक विज्ञान के विपरीत है। ज्यादा से ज्यादा वैज्ञानिक सोच का प्रचार प्रसार हो इसमें ही सबकी भलाई है। मकर सक्रांति मनाईये, लेकिन दान, पूण्य और कर्मकांड करने के लिए नहीं ,बल्कि मनोरंजन के लिए। जाइए धूप में खूब पतंग उड़ाइए, तिल के लड्डू खाइए (गर्म होता है, ठण्ड में फायदा करेगा)

(नोट- पोस्ट के लिए उपयुक्त जानकारी राकेश नाथ जी की किताब से मिली ) फोटो क्रेडिट – गूगल

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