रोचक बना दिया मालवीय ने उपचुनाव को !

समर्थकों की बात मान कर अपना जनाधार बचाने में सफल रहे मालवीय .

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आखिरकार सस्पेंस ख़त्म हो ही गया , कांग्रेस के बागी गोपाल मालवीय ने समय सीमा समाप्त होने तक अपना नामांकन पत्र वापस नहीं लिया ,इससे साबित हो गया कि वे मांडलगढ़ से चुनाव लड़ेंगे .

गौरतलब है कि राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की मांडलगढ़ विधानसभा सीट से नाम वापसी नहीं करके कांग्रेस के बागी निर्दलीय प्रत्याशी गोपाल मालवीय ने उपचुनाव को रोचक बना दिया है . हालाँकि उनकी मौजूदगी से दोनों दलों को नुकसान होने के कयास लगाये जा रहे है ,जहाँ कांग्रेस को अपने परम्परागत दलित आदिवासी मतों में बिखराव की संभावना लग रही है ,वहीँ भाजपा को भी अपने वोट बैंक के खिसकने का खतरा महसूस हो रहा है .

नाम वापसी का आखिरी दिन होने तथा कांग्रेस के बड़े नेताओं से दिल्ली में मिल कर आने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि वे अपना पर्चा उठा लेंगे ,मगर मालवीय के समर्थकों ने सुबह से ही उनके घर को घेर लिया ,लोग आक्रोशित भी थे और उत्साहित भी ,किसी ने पानी की टंकी पर चढ़ जाने की धमकी दी तो कोई सड़क पर ही लेट गया ,नतीजा यह हुआ कि गोपाल मालवीय अपने घर से निकल कर निर्वाचन अधिकारी कार्यालय तक ही नहीं जा पाये ,नाम वापसी करवाने आये नेता भी मायूस हो कर लौट गए ,अंततः अपने समर्थकों का मान रखते हुए बाहर आकर मालवीय ने चुनाव लड़ने की घोषणा की,जिससे उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह की लहर दौड़ गई .

बताया जाता है कि कांग्रेस विधायक धीरज गुर्जर के प्रयासों से लगभग मान चुके गोपाल मालवीय की भावनाएं डॉ सी पी जोशी और कांग्रेस प्रत्याशी के व्यवहार से अत्यंत आहत हो गई ,क्योंकि डॉ जोशी ने न केवल मालवीय का टिकट कटवाया बल्कि उनसे दिल्ली में इस बार मिलना भी उचित नहीं समझा ,कांग्रेस उम्मीदवार विवेक धाकड़ तो एक बार भी गोपाल मालवीय से मिले भी नहीं ,आज भी जब मालवीय ने कहा कि अगर धाकड़ उनसे आकर कह देंगे तो वे नाम वापस ले लेंगे ,लेकिन विवेक धाकड़ ने उनसे मिलने तक से मना कर दिया ,ऐसी स्थिति में कांग्रेस के सारे नेताओं के प्रयासों पर पानी फिर गया और मालवीय का नामांकन बना रह गया ,वैसे राजनीति के जानकर इसे मालवीय के राजनीतिक भविष्य और जनाधार को बरक़रार रखने के लिए उचित कदम ही मान रहे है . .

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