’एकलो रैबारी,पडे लाख माथे भारी’

-प्रमोदपाल सिंह

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गोडवाड़ इलाके में 20 जनवरी की रात और 21 जनवरी का दिन पशुपालक रैबारी समाज के नाम पर लिखा जाएगा। जिसने सामाजिक जागरूकता के लिए पूरे इलाके को ’म्हारो एकलो रैबारी,पडे लाख माथे भारी’ के गीतों से गूंजा दिया और अब तक चारागाह और जंगल की समझ रखने वाले रैबारी,देवासी अथवा राईका नाम से पुकारे जाने वाले इस समाज ने अपनी ताकत दिखाने की सफल कोशिस की। जहां चारों और नकारात्मकता का माहौल खडा हैं। वहीं,इस समाज ने नशामुक्ति व बालिका शिक्षा का सकारात्मक संदेश देने के लिए बाली और देसूरी तहसील के चुनिंदा सत्रह गांवों से 1500 बाइक के साथ डीजे और रथों व अन्य वाहनों पर सवार पांच हजार लोगों ने अपनी रैली निकाली।

इस समाज की युवा पीढी पिछले कुछ वर्षों से शिक्षा के प्रसार की दिशा में उन्मुख हुई। जब से राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पारखी नजरों ने मुण्डारा के भाजपा नगर अध्यक्ष ओटाराम देवासी में स्थापित सामाजिक शक्ति को देखा। तभी से उन्हें सक्रिय राजनीति में अपने सहयोगी के बतौर चुन लिया था। इसी के साथ यह समाज अपनी ताकत को पहचानने लगा। परिणामस्वरूप रतन देवासी को भी कांग्रेस ने अपनाया। अब तो धीरे-धीरे इस समाज के कई लोग बोर्ड,राजनीतिक संगठनों में स्थान पाने के साथ-साथ महत्वकांक्षी भी होने लगे। वरना स्थापित नेता के तौर पर गुजरात के कांग्रेेस नेता सागर राईका ही का ही इकलौता नाम राजनीति के मंच पर था।

देवासी समाज एवं युवा संगठन ने 20 जनवरी की रात को सादड़ी में ’एक शाम फूला भारती जी महाराज के नाम‘ भजन संध्या का आयोजन किया। फूला भारती जी रैबारी समाज ही नही समूचे गोडवाड़ के मान्य संत थे। इन्हें ’हका महाराज’ के नाम से ज्यादा जाना जाता हैं। जिन्होंने नशामुक्ति,जीव दया और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनूठे कार्य किए। उन्हीं को प्रेरणास्त्रोत मानकर रैबारी समाज उनके बताए मार्ग पर चलने लगा हैं। समाज के युवा संगठन ने इस भजन संध्या में ’म्हारो एकलो रैबारी,पडे लाख माथे भारी’ को गाकर रैबारी समाज को गौरव दिलाने वाली गुजरात की गीताबेन रैबारी को बुलाया तो उन्हें सुनने सात हजार से अधिक लोग पंहुचे। गीताबेन का लोगों में इतना क्रेज था कि सारी सड़के भजन संध्या की तरफ जाती दिखी।

‘कच्छ की कोयल’ के नाम से मशहूर गीताबेन रैबारी का ’रोणा शेरमा’ दस माह से यू ट्यूब पर धूम मचा रहा है। 16 अप्रैल 2017 को यह गीत यू ट्यूब पर अपलोड किया गया। इस गीत को अब तक करोड़ों लोग देख-सुन चुके हैं। उसने केवल दो ही गीत गाए हैं, ’रोणा शेरमा’ और ’एकलो रैबारी’ ये दोनों गीत पूरे गुजरात में काफी प्रसिद्ध हुए हैं। इसके अलावा उसने गरबे का एक अलबम भी किया है। जब गीताबेन ने सादड़ी ’म्हारो एकलो रैबारी,पडे लाख माथे भारी’’ गाया तो समूचा रैबारी समाज झूम उठा।

इस कार्यक्रम में राज्य मंत्री ओटाराम देवासी तो पंहुचे ही,राज्य मंत्री पुष्पेन्द्रसिंह राणावत भी रात बारह आये। बढ़ती ठिठुरन के बीच लोगों का इतना सैलाब सादड़ी में कभी प्रधानमन्त्री की सभा में देखा गया था। बाद में किसी भी राजनीतिक-सामाजिक आयोजन में किसी समाज की इतनी बड़ी ताकत देखने को नही मिली। यह इस समाज का रचनात्मक कार्यक्रम जरूर हो सकता हैं,लेकिन प्रेक्षकों की नजर में यह समाज एक बड़ा वोट बैंक भी हैं। युवाओं का संदेश भी यह हैं कि अब उन्हें खालिस वोट बैंक ही नही समझा जाए। अब यह समाज जाग उठा हैं। एक-एक रैबारी अपना वजन बताने को अब तैयार हो चुका हैं।

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