साहित्यिक जुलाई !

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( अनंत भटनागर )

अमूमन हिंदी दिवस/सप्ताह/पखवाड़े के चलते सितम्बर में साहित्यिक कार्यक्रमो की धूम रहती है।इस बार अजमेर में जुलाई साहित्यमयी रही । कई कार्यक्रमों में शिरकत के साथ किसी न किसी रूप में भागीदारी भी रही। 4 जुलाई को आर डी सैनी जो कि राजस्थान लोकसेवा आयोग के सदस्य हैं की श्वान सेवा पर आधारित संवेदनात्मक पुस्तक “प्रियओलिव”पर लेखक से संवाद व चर्चा का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ।

इस कार्यक्रम में लेखक से संवाद में भागीदारी की 7 जुलाई को गुलेरी जयंती पर कला अंकुर द्वारा “कहानी दिवस”का आयोजन किया गया जिसमे हिंदी कहानी में अजमेर के योगदान पर मुख्य वक्ता के रूप में उद्बोधन दिया।

वेद माथुर जी द्वारा रचित बहुचर्चित पुस्तक “बैंक ऑफ पोलमपुर”का अजमेर में लोकार्पण 14 जुलाई को हुआ।इस कार्यक्रम में भी उनकी पुस्तक पर मुख्य वक्ता के रूप में चर्चा की। इसी पुस्तक की समीक्षा भी की, जो दैनिक भास्कर में छपी। 23 जुलाई को राजस्थान साहित्य अकादमी की ओर से गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज में कविता प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन हुआ,जिसमे राम जैसवाल जी और हेमंत शेष जी के साथ वक्ता के रूप में बोलने का अवसर मिला। इसी दिन श्रमजीवी कॉलेज में चंद्रप्रकाश देवल व हेमंत जी के सान्निध्य में कवि गोष्ठी का आयोजन भी हुआ।

प्रभा खेतान फाउंडेशन के सहयोग से कलम कार्यक्रम का आयोजन 27 जुलाई को हुआ। प्रिय कवयित्री अनामिका जी से भेंट के साथ इस कार्यक्रम में उनसे संवाद करना अविस्मरणीय रहा। उनकी सौम्यता,सहजता,स्पष्टता, प्रबुद्धता व वाक् कौशल ने श्रोताओ को भीतर तक भिगो दिया। यह कार्यक्रम लम्बे समय तक याद किया जायेगा,इसमें सूत्रधार होने का सुख मैं भी नही भूल पाऊंगा।

इसी महीने अजयमेरु प्रेस क्लब द्वारा कवि गोष्ठी व साहित्य अकादमी की ओर से नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला भी हुई।

जुलाई के आखिरी दिन प्रेमचंद जयंती पर कोई आयोजन तो नही करवा सके,लेकिन इस दिन अच्छी खबर यह मिली कि अजमेर की श्रुति गौतम की कहानी को दैनिक भास्कर व प्रलेस द्वारा आयोजित युवा लेखन प्रतियोगिता में एक लाख रूपये का प्रथम स्थान मिला। इसे भी जुलाई की ही उपलब्धि में शामिल समझना चाहिए।

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