आम जन का मीडिया
Let's talk of meditation and samadhi!

आइये ध्यान और समाधि की बात करते हैं !

- संजय जोठे

इस देश की सबसे बुनियादी बकवास की जड़ में यही दो चीजें हैं। कोई भी बाबा, योगी, भगवान, तांत्रिक या पोंगा पण्डित ही क्यों न हो वो ध्यान और समाधि के नाम पर जितनी आसानी से और जितनी बकवास कर सकता है उतनी किसी अन्य विषय पर नही होती। ये ऐसे मुद्दे हैं जिनमे गूंथकर कोई भी मूर्खता पिलाई जा सकती है।

जिस तरह से ध्यान के लाभ गिनाये गए हैं वैसे तो खुद इन गुरुओं के जीवन में भी नजर नही आते, दुसरों को खूब सन्तोष सिखाते हैं लेकिन खुद कभी सन्तुष्ट नही होते। जिस दिव्य ज्ञान और सिद्धियों के दावे होते हैं वे खुद उनके ही काम नही आते।

इस ध्यान और समाधि के नाम पर जितना पाखण्ड और अकर्मण्यता फैलाई गयी है वो अतुलनीय है। अभी हमारे शहर में एक सन्त जी पधारे हैं वे मिट्टी के दस लाख शिवलिंग बनवाकर लोगों को ध्यान में ले जाएंगे। अब हजारों लोग हफ्तों तक यही काम करेंगे। कल्पना कीजिये इतने लोग सड़क या नालियाँ साफ़ करने लग जाएँ तो पूरा शहर चमन हो जाए, लेकिन नही वे दस लाख शिवलिंग बनाएंगे और कुवों, नदियों में फेंककर उन्हें भी बर्बाद करेंगे।

गौर से देखिये, भारतीय गुरुओं का परलोकवादि अध्यात्म ही इस देश की असली बीमारी है। वो ही असली जहर है जिसने सब बर्बाद किया है। कुछ सृजनात्मक उद्यम करने की बजाय ये ऐसे ही पागलपन में लगाये रखते हैं। स्कूल में कुछ लोग हमारी क्लास में आते थे और एक रजिस्टर दे जाते थे जिसमे एक हजार बार एक खास मन्त्र को लिखना होता था। ऐसा करने वाले बच्चे संस्कारवान माने जाते थे।

अनपढ़ लोग कर्मकाण्ड में फंस मरते हैं और पढ़े लिखे लोग अध्यात्म और ध्यान समाधि में उलझाये जाते हैं।

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