कोशीथल क्या तुम्हारे बाप का है ?

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तुम किसे गांव में आने से रोक रहे हो ?
हाल ही में भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और राजसमन्द जिले के डायन भगाने का दावा करने वाले भोपाओं का स्टिंग कर दैनिक भास्कर की इस विशेष टीम ने सच्चाई से हम सभी को रूबरू करवाया। जो लोग सच्चाई को पसंद करते है, उन लोगों ने इस सच्चाई बाहर लाने वाले जाबांज पत्रकारों की टीम की सराहना की।
आज सोशल मीडिया के जरिए मालूम हुआ है कि भीलवाड़ा जिले के कोशीथल गांव के कुछ युवाओं ने आज के दैनिक भास्कर अंक की प्रतियां जला दी। सप्लाई देने वाले वाहन चालक को धमकाया और गांव में वापस नहीं आने की चेतावनी दी। विरोध कर रहे युवाओं ने बकायदा गांव में जगह-जगह एक नोटिस चस्पा किया है कि दैनिक भास्कर के लोग गांव में नहीं आए। यह निन्दनीय कृत्य है। आखिर दैनिक भास्कर के लोग क्यों कोशीथल में नहीं आ सकते है ? कोई भी व्यक्ति कौन होता है किसी को गांव में आने से रोकने वाला ? किसी को गांव में आने से रोकना और उन्हें धमकी देना कानूनन अपराध है।
कई लोग मेरे लिए कह रहे है शेषू भोपा का स्टिंग मैंनें करवाया है। बता दूं कि ये मौका मुझे मिलता तो मैं ओर अच्छी तरह से स्टिंग करता। पर मैं ग्रामीण पत्रकार हूं, छोटा पत्रकार हूं, स्टिंग की जिम्मेदारी अभी मुझ जैसों को नहीं मिलती है। जिन पत्रकारों ने स्टींग किया वे पत्रकारिता के धुरंधर खिलाड़ी है। जिन पत्रकारों को मेरे गांव के कुछ युवा रोकना चाह रहे है वे पत्रकार किसी के बाप के रोके नहीं रूकते है।
जानकारी के लिए बता दूं दैनिक भास्कर की एक विशेष टीम है, इस टीम के सदस्य निडर, निर्भिक और बेबाक है। वे अंतराष्ट्रीय तस्करों के सामने जाकर उनके मुंह से उनके राज निकाल ले आते है। चम्बल के बीहड़ और बीहड़ में रहने वाले डाकुओं के किस्से सुनकर अपने जैसे कांप जाते है, इस टीम के पत्रकार उन डाकुओं के सामने पालथी मारकर उनकी कहानियां और उनके राज ले आते है। मतलब वे चम्बल के डाकूओं का स्टिंग भी कर चुके है। वे सब के राज ले आते है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि वो देश के आमजन को सजग करने के लिए यह अपनी जान जोखिम में डालते है। जहां किन्हीं पर अत्याचार हो रहा होता है, जहां किन्हीं के साथ अन्याय हो रहा होता है और जहां कहीं गलत हो रहा होता है ये टीम वहां पहुंचती है, सच्चाई को कुरेद कर बाहर निकालती है और हम सभी तक पहुंचाती है।
चूंकि मैं कोशीथल में पैदा हुआ, वहीं खेला, पढ़ा, बड़ा हुआ और पत्रकारिता आरम्भ की, इसलिए मुझे यह जानकर बहुत दुःख हुआ है कि मेरे गांव के लोग झूठ, फरेब, अत्याचार, अन्याय को पसंद कर रहे है और सच्चाई का विरोध कर रहे है। दैनिक भास्कर के एजेंट जयंति लाल नेहरिया को धमकाया जा रहा है कि उसने भोपे वाली खबर करवाई जबकि जयपुर की टीम के आने की जानकारी जयंति लाल को होने की बात तो दूर इन जिलों के दैनिक भास्कर ब्यूरो चीफ व संवाददाता को भी नहीं थी। जयपुर वाली विशेष टीम यूं आती है, यूं जानकारियां लेकर चली जाती है और फिर वाट लगा देती है।
मेरी तम्मना है कि मैं भी विशेष टीम में शामिल होऊं . . .
रही बात मेरी . . . तो बीते हुए समय पर नजर डाल लो, 17 साल की उम्र में डर को खूंटी पर टांग दिया था।
 – लखन सालवी
( लेखक पत्रकार  है )

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