सांचोर की सच्चाई जानकर सिहर उठेंगे आप !

राजस्थान में दलित आदिवासी दमन – 9

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दक्षिणी पश्चिमी राजस्थान के जालोर जिले के सांचोर कस्बे में रानीवाड़ा चार रास्ता पर स्थित अम्बेडकर प्रतिमा से 2 अप्रेल भारत बंद रैली सांचोर के मार्किट की तरफ शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रही थी ,आसपास के गांवों से हजारों की तादाद में लोग अपने हाथों में नीला झंडा उठाये हुये अनुशासित रूप से आगे बढ़ रहे थे कि उन पर करणी सेना ,बजरंग दल तथा व्यापार महासंघ से जुड़े लोगों ने हमला कर दिया .

हमलावर ‘ भीम सेना मुर्दाबाद ‘ ‘ जयकारे बजरंगी – हर हर महादेव ‘ के नारे लगाते हुये निरंतर दलित आदिवासी समुदाय के प्रदर्शनकारियों को उकसा रहे थे ,पुलिस को सौंपे गये एक वीडियो में यह साफ़ दिख रहा है कि जब सवर्ण हिन्दू समुदाय के लोग दलित आदिवासी समुदाय की शांतिपूर्ण रैली के खिलाफ़ नारे लगाते हुये उनका रास्ता अवरुद्ध करने की कोशिस कर रहे थे ,तब बंद समर्थकों के नेतृत्व करने वाले लोग अपने लोगों को शांत कर रहे थे और टकराव टालने का प्रयास कर रहे थे ,जबकि दूसरी ओर हिंदुत्ववादी और जातिवादी लोग पूरी तैयारी के साथ भिड़ने को तत्पर दिखलाई दे रहे थे .

सांचोर पुलिस थाने में हाडेतर निवासी गणेशाराम मेघवाल द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर संख्या 155/18 के मुताबिक 2 अप्रेल की शांतिपूर्ण रैली पर करणी सेना ,बजरंग दल तथा व्यापार महासंघ के लोगों ने लाठियों ,तलवारों और पिस्तोलों से लैश हो कर हमला किया ,रैली में शामिल दलितों आदिवासियों को ‘ नीच , ढेढ़ और कोडा ‘ कह कर अपमानित किया ,बाबा साहब अम्बेडकर को माँ बहनों की गंदी गंदी गालियाँ दी और जान से मारने की नियत से धारदार हथियारों से हमला कर दिया ,जिसमें 42 प्रदर्शनकारी घायल हो गये ,हमलावरों ने डॉ अम्बेडकर की मूर्ति को भी अपमानित किया तथा उसे क्षतिग्रस्त कर दिया .

यह विशेष रूप से ध्यान देने की बात है कि हमला करने वाले ,रैली का मार्ग अवरुद्ध करनेवाले तथा तोड़फोड़ व आगजनी करनेवाले ज्यादातर लोग गले में भगवा दुपट्टा डाले हुये थे ,वे हिंदूवादी संगठनों से सक्रिय रूप से जुड़े हुये लोग थे ,उनके खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है ,लेकिन पुलिस ने एक भी सवर्ण उपद्रवी को आज तक नहीं पकड़ा . ये लोग आरएसएस की शाखाओं में लगाये जाने वाले नारे लगा रहे थे .

प्रत्यक्षदर्शी बताते है कि सवर्ण जातिवादी उपद्रवियों ने मूला राम वागेला ,नेहरु सामरानी , गणपत लाल गोलासन तथा सुरेश राम भुवाना की मोटर साईकलों में आग लगा कर उन्हें राख कर दिया, उनके द्वारा आग लगाते हुये के फोटो और वीडियोज भी पुलिस के उच्च अधिकारीयों को सौंपे जा चुके है .

इतना ही नहीं बल्कि दलित आदिवासी विरोधी इन उपद्रवकारियों ने सांचोर में स्थित मेघवाल समाज की धर्मशाला में संचालित छात्रावास को भी निशाना बनाया,8 कमरों के दरवाजे तोड़ दिये और करीब 5 लाख की सम्पत्ति तहस नहस कर दी .हथियारों से लैश इन तत्वों ने जगह जगह पर दलित आदिवासी प्रदर्शनकारियों पर हमले किये ,जिसमें तकरीबन 50 लोग घायल हो गये .

पुलिस की शह और समर्थन तथा मिलीभगत से असामाजिक तत्व बेखौफ़ होकर सुबह 11 बजे से लेकर शाम तक तांडव करते रहे ,सांचौर से रैली करके गाँव लौट रहे लोगों को भी दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया ,तीन पिकअप गाड़ियों के शीशे तोड़ दिये ,उनमें सवार लोगों को नीचे उतार कर भगा भगा कर लाठियों से भीड़ ने मारा .

पुलिस की भूमिका यहाँ पर भी ठीक नहीं थी ,उन्होंने उपद्रव करने वालों को रोकने के बजाय भारत बंद समर्थकों पर ही लाठियां भांजी ,आंसू गैस के गोले दागे और कईं राउंड फायर किये ,यहाँ तक कि मेघवाल छात्रावास में भी आंसू गैस छोड़ी और लाठीचार्ज किया .
सांचोर में कुल 13 मुकदमे दर्ज है ,जिनमें एक मुकदमा ( 143/18 ) पुलिस द्वारा दलितों के खिलाफ दर्ज है ,जबकि मुकदमा क्रमांक 144 से लेकर 150 तक के 7 मुकदमें पुरोहित ,राजपूत ,विश्नोई तथा माली समुदाय के व्यापारियों द्वारा दर्ज करवाए गये है ,दलितों द्वारा भी 4 मुकदमें दर्ज करवाये गये है .

प्राप्त जानकारी के मुताबिक दलित आदिवासी प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज 8 मुकदमों में 289 लोग नामजद किये गये है ,जिनमें 62 सरकारी कर्मचारी भी आरोपी बनाये गये है , कुल 49 लोगों को 151 सीआरपीसी के तहत गिरफ्तार किया गया , 49 लोग अभी भी जोधपुर जेल में है ,जिनमें मेघवाल छात्रावास के 16 स्टूडेंट भी शामिल है ,इसमें से 8 छात्र तो उपद्रव के वक्त परीक्षा दे रहे थे ,6 सरकारी कर्मचारी भी जेल में है ,पुलिस अभी भी धरपकड़ के नाम पर आतंक मचाये हुये है ,सांचोर में 5 मई तक धारा 144 लागू कर दी गई है .

दलितों आदिवासियों के बंद का सांचोर में पूर्वनियोजित षड्यंत्र के तहत विरोध किया गया ,1 अप्रेल की रात में ही सवर्ण तबके के व्यापारियों ने पुलिस से मिलकर बता दिया कि वे कल बंद नहीं रखेंगे और बंद का खुलकर विरोध करेंगे ,पुलिस प्रशासन को सारी सुचना होने के बावजूद निहत्थे प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा नहीं की गई और उपद्रवियों ने गाड़ियाँ जलाई ,बाबा साहब की मूर्ति तोड़ी ,छात्रावास पर हमला किया ,लोगों को मारा पीटा और उल्टा उन्हीं पर केस दर्ज करवा कर उन्हीं को जेल भेज दिया .

फंसाने की कार्यवाही न केवल पूर्वनियोजित थी ,बल्कि उसका सेंट्रली एक जगह से संचालन भी हो रहा था ,ऐसा दलित आदिवासियों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर की भाषा से पता चल जाता है ,7 में से 4 प्रकरणों को एक ही व्यक्ति या स्थान पर ड्राफ्ट किया गया है और सभी मुकदमों में आरोपियों को नामजद करने में किसी हिटलिस्ट की मदद ली गई है .

मुकदमा नम्बर 149/18 में लगाये गये आरोपों पर गौर कीजिये – दलित आदिवासी प्रदर्शनकारी ‘ सुप्रीम कोर्ट –हाय हाय ‘ के नारे लगा रहे थे ,वे हिन्दू धर्म व सनातन धर्म के इष्ट भगवान राम एवं माँ गायत्री को गन्दी व आपत्तिजनक गालियाँ दे रहे थे . इसी एफआईआर में लिखा है कि “मुलजिमान पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर हिन्दू देवी देवताओं तथा वर्गों तथा समुदायों के मध्य परस्पर वैमनस्य फैला रहे थे और लोगों को झगड़ा ,बलवा ,दंगा ,उन्माद फ़ैलाने के लिये उदीप्त और प्रेरित कर रहे थे “.

2 अप्रेल 2018 के भारत बंद के प्रदर्शनकारियों पर सवर्ण हिन्दू समाज का आरोप है कि वे ‘ जानबुझकर सुप्रीमकोर्ट की अवमानना ‘ कर रहे थे तथा ‘ समस्त हिन्दू धर्म की भावनाओं को गहरा आघात और ठेस पंहुचा रहे थे ‘ .

सांचोर की सच्चाई को समझना बहुत जरुरी है ,दलित आदिवासियों पर हमला करनेवाले भगवा धारी थे ,वे जयकारे बजरंगी – हर हर महादेव के नारे लगा रहे थे ,वे अम्बेडकर को माँ बहन की गालियाँ दे रहे थे ,दलितों को नीच कह कर अपमानित कर रहे थे ,उनको दौड़ा दौड़ा कर मार रहे थे और अंततः उनको फंसाने और जेल भेजने के लिये उन पर समस्त हिदू धर्म की भावनाएं आहत करने का आरोप लगा कर मुकदमे दर्ज करवा रहे थे .

अब भी दलित और आदिवासियों को कुछ समझ नहीं आया तो फिर उनकी कईं पीढ़ियों को इन उपद्रवकारियों की सेवा ही करनी होगी ,सिर झुका कर चलना होगा ,इनकी गुलामी में रहना होगा ,इनकी मर्जी से रैली करनी होगी ,ये चाहेंगे वह बोलना होगा ,वही खाना होगा और इनकी पसंद का ही कपड़ा पहनना होगा ,जिंदगी उनकी मर्जी से जीनी होगी,एक नई गुलामी का दौर शुरू करना चाहते है ये लोग . ये पेशवाई कानून से हम पर राज करना चाहते है .

सांचोर में दर्ज मुकदमें जताते है कि उन्होंने दलित और आदिवासी वर्ग को समस्त हिन्दू समाज से अलग कर दिया है और उनको अलग मानते हुये “ धर्म शत्रु “ का दर्जा देते हुये उनसे बदला लेने की कार्यवाही शुरू हो चुकी है .

पुलिस ,प्रशासन ,राजनेता ,सरकार ,मीडिया और मार्केट सब उनके साथ है ,नामजद मुकदमें दर्ज होने और सबूत सौंपे जाने के बावजूद उनके खिलाफ एक भी व्यक्ति पर कार्यवाही नहीं हो रही है और आपके 45 लोग जेल में है ,जिनको जमानत नहीं मिल रही है ,सैंकड़ों लोग अभी नामजद है ,जो फरार है ,उनको पुलिस सूंघती फिर रही है ,समाज के गद्दार रोज अपने आकाओं तक मुखबिरी करके जानकारियां पंहुचा रहे है .

हमारे जनप्रतिनिधि बिल में घुस गये है ,बड़े बड़े साफे बांध कर मंचों को सुशोभित करने वाले , क्रान्तिकारी भाषण देने वाले ,कैडर कैम्पों में ज्ञान पेलने वाले ,विंगें फिंगे चलाने वाले ,व्हाट्सएप और फेसबुक वीर सब सुरक्षित माँदों में छिप गये है ! वे तब आयेंगे जब समाज सब कुछ अपने स्तर पर झेल लेगा ,पर ध्यान रखना इस बार आते ही हिसाब किताब बराबर कर लेना सबका ,अपने गद्दारों ,डरपोकों ,वर्ग शत्रुओं और बाज़ार की मनुवादी ताकतों सबको जवाब डे देना . कुछ भी बाकी नहीं रहना चाहिए .

अब यह लडाई नहीं ,बल्कि जंग है और जंग में सब जायज है .वैसे भी अपने दुश्मनों को माफ़ सिर्फ मुर्ख ही करते है .

-भंवर मेघवंशी
( स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता )

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