कालूड़ी मामला यू एन ओ तक पहुंच गया लेकिन शोषित समाज के कानों तक नहीं पहुंचा क्यों !

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– ( बी एल बौद्ध )
कई लोगों से मोबाईल पर जानना चाहा कि अभी कालूड़ी मामले का क्या चल रहा है तो कुछ लोगों को तो आधी अधूरी जानकारी है लेकिन अधिकतर लोगों को इस मामले के बारे में बिल्कुल भी खबर नहीं है,कालूड़ी का नाम सुनते ही कई लोग तो किसी महिला का मामला समझकर सवाल करने लगते हैं कि क्या हुआ कालूड़ी के साथ।
इतने सारे व्हाट्सऐप ग्रुप एवं फेस बुक होने के बाद भी लोग कालूड़ी मामले से अनभिज्ञ हैं जबकि यह मामला UNO तक पहुंच गया है लेकिन लेकिन हमारे लोगों के कानों तक अभी तक नहीं पहुंचा जो कि हमारे लिए शर्म की बात है।
कालूड़ी किसी महिला का नाम नहीं है बल्कि राजस्थान प्रदेश के जिला बाड़मेर के एक गांव का नाम है,पाकिस्तान सीमा से सटे इस जिले को बैकवर्ड क्षेत्र माना जाता रहा है लेकिन अब यह जिला शोषित समाज के लिए प्रेरणा का केंद्र बनता जा रहा है।
हुआ यों कि कुछ दिनों पहले की बात है कि राजपुरोहित समाज के कुछ लोगों ने फेस बुक पर लिखा कि आजकल शोषित समाज के अधिकतर लोग जय भीम बोलने लगे हैं जो कि हमें बिलकुल भी पसंद नहीं है इसके अलावा आजकल धरना प्रदर्शन करने की भी इन लोगों की हिम्मत बढ़ती जा रही है जो कि सही नहीं है इतना लिखने के बाद इससे आगे जो लिखा गया है वो इतना गंदा एवं घृणात्मक दृष्टि से लिखा गया है कि उसे आप तक पहुंचाना भी उचित नहीं है।
उनका लिखा हुआ ये सब कुछ जब कालूड़ी गांव के शोषित समाज के युवाओं ने पढ़ा तो उन्हें बहुत बुरा लगा एवं उनका खून खोल उठा लेकिन हमारे युवाओं ने हिंसा फैलाने की बजाय दोषियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराना ही उचित समझा और थाने में जाकर पुरोहित समाज के दोषी लोगों के विरुद्ध नामजद  F.I.R दर्ज करवा दी, जिससे कालूड़ी गांव के सभी राजपुरोहित समाज के लोग लामबंद होगये और कहने लगे कि इन ढेढ़ चमारों की इतनी हिम्मत की हमारे युवाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करादें।
शोषित समाज के युवाओं को डरा धमकाकर रिपोर्ट वापिस लेने का दवाब बनाया जाने लगा लेकिन इन युवा भीम सैनिकों में बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों से जोश और कुछ कर गुजरने का जुनून  कायम हो चुका था इसलिए हमारे ये बहादुर युवा अन्याय और अत्याचार करने वालों से बिलकुल भी नहीं डरे और साफ साफ कह दिया कि आपको जो कुछ भी करना है वो करो लेकिन अब हम किसी भी सूरत में रिपोर्ट वापिस नहीं लेंगे।
भीम सैनिकों का जवाब सुनकर कालूड़ी गांव के राजपुरोहित समाज के लोग तिलमिला उठे और आनन फानन में खाप पंचायत बुलाई गई एवं पंचायत ने फैसला सुनाया कि  कालूड़ी गांव में रहने वाले मेघवाल समाज के सभी 70 घरों का सामूहिक बहिष्कार करें, अपनी दुकानों से इन्हें कोई भी सामान बिक्री  न करें,सार्वजनिक कुएं से पानी न लेने दें,इनको मजदूरी पर भी नहीं रखें, इनके बच्चों को सरकारी स्कूलों में जाने से रोकें,आम रास्ते पर चलने पर भी इन्हें बेइज्जत करें एवं इनको दिया गया कर्ज तुरंत ब्याज सहित वसूल करें।
ये सब पाबंदी लगाने के बाद कालूड़ी गांव के शोषित समाज के लोगों का जीवन जीना दूभर हो गया है और वे इन पाबंदियां के खिलाफ लगातार धरना प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है बल्कि आरोपी ये कह रहे हैं कि हमारा आप लोग कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते हो, अभी भी मौका है अपना मुकदमा वापिस ले कर हमारे खेतों में मजदूरी पर आ सकते हो लेकिन कालूड़ी मामले को लेकर पूरे बाड़मेर जिले से एवं अन्य जिलों के बुद्धिजीवी लोग शोषित समाज के साथ खड़े हो गए हैं एवं दोषियों को सजा हो इस पर अड़े हुए हैं।
हम उन लोगों को सैल्यूट करते हैं जिन्होंने इस मामले को UNO तक पहुंचाया है लेकिन हम सभी लोगों की भी जिम्मेदारी बनती है कि कालूड़ी गांव की हकीकत को जानें, समझे एवं एक ठोस रणनीति तैयार कर कालूड़ी गांव के हमारे लोगों को न्याय दिलाने का पूरा पूरा प्रयास करें।

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