भारतीय संप्रभुता गंभीर खतरे में !

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रक्षा सौदों एवं इससे जुड़े मुद्दों पर अक्सर रक्षा विशेषज्ञों ,अन्तराष्ट्रीय-राष्ट्रीय मीडिया की पैनी नज़र रहती है, परंतु कुछ मसले जान बूझकर उजागर नहीं किये जाते, ये बड़े मीडिया हाउस और कॉर्पोरेट हाउस के गठबंधन के परिणाम से होता है .ऐसा ही भारत में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस के साथ हुआ है जो कि अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इंफ़्रा की सब्सिडरी है.
रिलायंस डिफेंस को अब रिलायंस नेवल के नाम से जाना जाता है 2014 से पहले इस कंपनी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, मोदी जी के सत्ता संभालते ही मोदी जी की योजना मेक इन इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया का जादुई फायदा रिलायंस नेवल को हुआ, इस कंपनी के इजराइल,अमेरिका,फ्रांस,रूस,एमिरेट्स,जर्मनी से अचानक लाखों करोड़ के समझौते होने लगे और ये सब हुआ प्रधानमंत्री मोदी जी की मध्यस्थता से, इस संदर्भ में कुछ तथ्यों पर नजर डालते हैं.
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर,रिलायंस डिफेंस या अब बदले हुए नाम रिलायंस नेवल को डिफेंस के क्षेत्र में शून्य अनुभव था. ऐसे में 2015 से 2016 के बीच गुजरात बेस्ड पिपावाव शिपयार्ड का अधिग्रहण रिलायंस डिफेंस करता है और पिपावाव शिपयार्ड रिलायंस डिफेंस बन जाता है, इसके बाद एक जादू की छड़ी घूमती है और न कुछ कंपनी विश्व की बड़ी महाशक्तियों की चहेती कंपनी बन जाती है,जिसमें मोदी जी निर्णायक मध्यस्थ की भूमिका निभाते है.
सन 2015 से 2016 के बीच 35 डिफेंस से संबंधित लाइसेंस रिलायंस डिफेंस को मिलते हैं, जिसमें 12 लाइसेंस 3 दिसंबर 2015 को एवं 16 लाइसेंस एक साथ 5 मई 2016 को दे दिए जाते हैं, जिसमें मिसाइल बनाने के लाइसेंस भी सम्मिलित है .साथ ही नागपुर में 10 सप्ताह से भी कम समय में 289 एकड़ जमीन हेलीकॉप्टर बनाने के लिए दे दी जाती है. आश्चर्य चकित करने वाला तथ्य देखिए – रिलायंस 16 जून 2015 में महाराष्ट्र सरकार के समक्ष जमीन के लिए आवेदन करती है और 26 अगस्त 2015 को देवेंद्र फड़नवीस एक कार्यक्रम में जमीन से सम्बंधित कागजात दे देते हैं ,
ये भारत के इतिहास में पहली बार था जब इतने कम वक्त में इतनी बड़ी जमीन का आवंटन निजी कंपनी को कर दिया गया.रिलायंस डिफेंस जो अब रिलायंस नेवल है के साथ विभिन्न देशों की बड़ी हथियार निर्माता कंपनी और मोदी जी की विदेश यात्रा की टाइमिंग देखिए,सत्ता और औद्योगिक घरानों का घृणित गठभन्धन नजऱ आएगा.
24 दिसंबर ,2015 को रूस की कंपनी अलमज़ अन्ते ने रिलायंस डिफेन्स के साथ लगभग 42 हज़ार करोड़ का समझोता किया,इससे पहले दिसंबर के प्रथम सप्ताह में भारत सरकार ने रूस के साथ चार एस-400 एयर डिफेन्स सिस्टम खरीदने का 32000 हज़ार करोड़ का सौदा किया, गौर करें मोदी जी 23 और 24 दिसंबर 15 को रूस की आधिकारिक यात्रा पर थे.
30 मार्च 2016 को इजराइल की कंपनी राफेल के साथ रिलायंस डिफेन्स (अनिल अम्बानी) की 65000 करोड़ की डील फाइनल हुई और इससे पहले मार्च 3, 2016 को भारत सरकार ने दो अवाक्स ( वार्निंग सिस्टम) खरीद का सौदा इज़राइल सरकार के साथ किया और इसके तुरंत बाद इजराइल की कौन्सेल जनरल येल हशवित ने कहा की मोदी जी शीघ्र ही इज़राइल की यात्रा करेंगे.
रिलायंस डिफेंस ने 21 जून 2017 को फ्रांस की कंपनी थेल्स के साथ राडार,और एयरबोर्न सिस्टम बनाने के लिए जॉइंट वेंचर बनाने का समझौता किया,इससे पहले सिंतबर 2016 में भारत फ्रांस के साथ 36 राफेल जेट विमान का समझौता 59000 करोड़ रुपये में कर चुका था. यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि थेल्स , दसॉल्ट फाल्कन जो कि भारत को राफेल उपलब्ध करवाएगा,उसे तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाता है.
दक्षिण कोरिया की LIG NEX 1 के साथ रिलायंस नेवल ने 17 अप्रैल 2017 को सामरिक संबद्धता  का समझौता किया ,जिसके तहत रिलायंस नेवल को मिलिट्री हार्डवेयर बनाने में साउथ कोरिया की फर्म सहायता करेगी, इससे पहले 2015 में सिओल में मोदी जी दक्षिण कोरिया के साथ रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हो चुके थे.
रिलायंस नेवल ने फ्रांस की देहर ऐरोस्पेस के साथ 22 जून 2017 को समझौता किया,इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी जून 2017 के पहले सप्ताह में फ्रांस की यात्रा पर थे ये उनकी तीसरी फ्रांस यात्रा थीं. 6 जून 2015 को अनिल अम्बानी की कंपनी रिलायंस पावर को बांग्लादेश में 3 हज़ार मेगावाट का गैस बेस्ड पॉवर प्लांट एवं एल एन जी टर्मिनल लगाने का समझोता हुआ, उस वक्त 6 से 7 जून प्रधानमन्त्री जी बांग्लादेश की यात्रा पर थे.
अब आप एक तथ्य पर गौर करें की एक ऐसी कंपनी जो कि एक वर्ष में ही बनी है- रिलायंस डिफेन्स,उसे रूस,इजराइल ,फ्रांस से लगभग 1 लाख करोड़ के डील किस बिना पर मिले, साथ ही ये संयोग कैसे हुआ कि पहले भारत सरकार ने खरीद के हज़ारों करोड़ के आर्डर उन्हें दिए,फिर अनिल अम्बानी की कंपनी के साथ डील हुई, ये भी कैसे हुआ कि 35 बड़े लाइसेंस एक ही झटके में दे दिए गए। यहां यह प्रश्न करना भी लाजमी है कि जब भारत में बी ई एल,बी ई एम एल,बी एच ई एल जैसी रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनी विद्यमान हैं तो बाहर भारत की तरफ से अनिल अंबानी की कंपनी को विभिन्न अंतराष्ट्रीय करारों के लिए आगे करने का क्या अर्थ है ?
अब ज़रा अनिल अंबानी की विश्वसनीयता पर गौर करते हैं रिलायंस कम्युनिकेशन और रिलायंस पावर  सहित अनिल अंबानी ग्रुप पर 1 लाख करोड़ से ऊपर का कर्ज है जिसमें से 45000 करोड़ का जो कर्ज रिलायंस कम्युनिकेशन को दिया गया था वह कर्ज लगभग डूब चुका है .कम्युनिकेशन का शेयर जो 1000 रु हुआ करता था 16 रु पर है वहीं कभी 450 रु बिकने वाला रिलायंस पावर 40 रु पर है इसके अलावा अनिल अंबानी पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस के सवालों से लेकर 2 जी में संलिप्तता के आरोप भी लगते रहे है।
ऐसी स्थिति में विदेश यात्राओं के दौरान लगातार अनिल अंबानी को साथ ले जाना और जिन देशों से भारत रक्षा के क्षेत्र में समझौता कर रहा हैं उन देशों की अंतराष्ट्रीय रक्षा समझौते में सम्बद्ध कंपनी के साथ अनिल अंबानी की कंपनियों के समझौते स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि यद्यपि मोदी जी ने अपने चुनाव पूर्व के वादे रक्षा सौदों से बिचोलिये की अवधारणा को समाप्त कर दूंगा की दिशा में कदम उठाते हुए,स्वयं को बिचोलिये की भूमिका में स्थापित कर लिया है। इसका सबसे बड़ा फायदा विदेशी मुल्कों को यह हुआ कि उन्हें बिचोलिये के द्वारा सौदों में होने वाली देरी से निजात मिल गयी। आज के इस ‘उत्तर सत्य’ युग में जहां सत्य के ऊपर आभासी या काल्पनिक आवरण चढ़ा दिया जाता है वहां विभिन्न मसलों पर तथ्यात्मक परख ,तार्किक विवेचन के माध्यम से ‘उत्तर सत्य’ युग  के वाहक कॉर्पोरेट सत्ता गठभन्धन को बेनकाब किया जा सकता है।
– अरविन्द वर्मा
( इस लेख के लिए आधार सामग्री रिलायंस इंफ़्रा,रिलायंस डिफेंस,रिलायंस नेवल,पिपावाव शिपयार्ड द्वारा बी एस सी,एन एस सी में फ़ाइल किये गए डिस्क्लोज़र, डी आई पी पी द्वारा जारी डिस्कोलज़र ,प्रधानमंत्री के दौरों का मीडिया कवरेज तथा विभिन्न विदेशी कंपनी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति द्वारा ग्रहण की गई है। लेखक लिखे गए तथ्यों की प्रामाणिकता के लिए जिम्मेवार है।)

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