आम जन का मीडिया
Made interesting by the Malaviya bye election!

निर्दलीय गोपाल मालवीय ने कहा – ” हर हाल में लडूंगा मांडलगढ़ उपचुनाव !”

विभिन्न समाजों का समर्थन मिलने से उत्साहित !!

मांडलगढ़ उपचुनाव में कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने से खफा हो कर बगावत पर उतरे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पूर्व प्रधान गोपाल मालवीय ने स्पष्ट किया कि -” वे जन भावनाओं का सम्मान करते हैं ,चूंकि आम जन की ही मांग पर उन्होंने निर्दलीय पर्चा दाखिल किया है ,इसलिए अब पीछे हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता है .”

शून्यकाल से विशेष बातचीत में मालवीय ने कहा कि उन पर नाम वापसी के लिए बहुत दबाव डाला जा रहा है ,लेकिन वे झुकने वाले नहीं है और हर हाल में चुनाव लड़ेंगे । मालवीय ने जातिवाद के खिलाफ झुकने से इनकार करते हुए कहा है कि उनके साथ हर जाति ,धर्म के लोग है ,वे उनका भरोसा नही तोड़ सकते है ।
इस तरह मालवीय ने साफ कर दिया कि चुनाव तो वो लड़ेंगे ही ,चाहे जो भी दबाव आये ,वो डरने वाले अथवा झुकने वाले नहीं है ।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अपने इस बागी उम्मीदवार को लेकर काफी चिंतित है ,जिला अध्यक्ष अनिल डांगी सहित कई स्थानीय और प्रादेशिक नेताओं ने गोपाल मालवीय को समझाने की भी कोशिस की ,मगर उन्हें सफलता नहीं मिल पाई है ,अब डॉ सी पी जोशी ,अशोक गहलोत , सचिन पायलट और प्रभारी पर उम्मीदें टिकी हुई है कि उनके प्रभाव से मालवीय अपने कदम पीछे खींच सकते है ,कई लोगों का यह भी कहना है कि जहाजपुर विधायक धीरज गुर्जर चाहेंगे तो इस समस्या का निदान हो जाएगा ,गुर्जर ने भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे गोपाल मालवीय को मनाने की कोशिश करेंगे ,लेकिन राजनीतिक जानकर मानते है कि धीरज गुर्जर स्वयं भी गोपाल मालवीय को टिकट नहीं देने के सी पी जोशी के फ़ैसले से सहमत नहीं है ,इसलिए उनके द्वारा किस स्तर पर मालवीय को समझाने के प्रयास होंगे ,यह विचारणीय तथ्य है ।

जिले के अधिकांश लोगों की प्रतिक्रिया रही है कि कांग्रेस गोपाल मालवीय को समझा देगी और वे अपना नाम वापस ले कर कांग्रेस के उम्मीदवार विवेक धाकड़ के पक्ष में प्रचार करने लगेंगे ,लेकिन जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं ,धाकड़ के रणनीतिकारों की सांसें फूलती नजर आ रही है ,दरअसल चुनाव भले ही विवेक धाकड़ लड़ रहे है ,मगर हर कोई यह जानता है कि इस चुनाव में कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव डॉ सी पी जोशी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है ,इस सीट पर टिकट फाईनल करने से ले कर चुनाव की पूरी रणनीति बनाने तक का काम जोशी ने स्वयं की निगरानी में करवाया है ,उनके खासमखास लोग इस चुनाव अभियान की बागडौर हाथ मे लिये हुए है ,वे हर तरीके से इस उपचुनाव में विजयश्री का वरण करने को आतुर है ,ताकि राजस्थान विधानसभा के आसन्न चुनावों में खुद को बतौर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट कर सकें ।

हालांकि ऊपरी रूप से जिला कांग्रेस और प्रदेश कांग्रेस स्वयं को एकजुट दिखा रही है ,मगर नेताओं के आपसी मतभेद और गुटबाज़ी किसी से छिपे हुए नहीं है ,मांडलगढ़ ,बिजौलिया इलाके के तो सैंकड़ों स्थानीय नेता कांग्रेस का दामन छोड़कर खुलेआम निर्दलीय उम्मीदवार गोपाल मालवीय के पक्ष में चले गये है ,ऐसे में कांग्रेस के लिए मालवीय की उम्मीदवारी काफी मुश्किल पैदा करने वाली हो गई है ।

सबसे महत्वपूर्ण बात जो कांग्रेस उम्मीदवार और पार्टी की चिंता बढ़ा रही है वो है बागी निर्दलीय प्रत्याशी गोपाल मालवीय के पक्ष में विभिन्न समाजों का समर्थन मिलना है ,कांग्रेस के वोट बैंक के रूप में रहे दलित ,आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के विभिन्न सामाजिक संगठनों का गोपाल मालवीय की तरफ़दारी करना कांग्रेस की पराजय के संकेत देता है,जैसे कि भील आदिवासी महासभा का यह ऐलान कि वे कांग्रेस प्रत्याशी का विरोध करेंगे ,क्योंकि उनके समुदाय के साथ तिलस्वां महादेव मंदिर की दान पेटी को लेकर धाकड़ परिवार द्वारा दुर्व्यवहार किया गया ,जो कि सम्पूर्ण भील समाज का अपमान है ,महासभा के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश चन्द्र भील ने कहा कि माण्डल गढ़ विधानसभा में भील समुदाय के मतदाताओं की संख्या तकरीबन 22 हजार है ,जो कि कांग्रेस के परंपरागत वोटर रहे हैं ,मगर इस बार समाज अपना निर्णय अलग लेगा ,इसी तरह अनुसूचित जाति की रेगर समाज के युवाओं ने भी धाकड़ समुदाय का अपने समुदाय के प्रति व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई है ,उन्होंने गांवों में कांग्रेस प्रत्याशी के समुदाय द्वारा दलित जातियों के प्रति किये जा रहे भेदभाव और उत्पीड़न का सवाल उठा कर कांग्रेस के रणनीतिकारों को असहज कर दिया है ।

इस विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति का बड़ी संख्या का समाज बलाई समाज है , वह भी कांग्रेस का परम्परागत मतदाता रहा है ,उसमें भी इस बार कांग्रेस के खिलाफ रुझान दिखलाई पड़ रहा है ,चूंकि सत्तारूढ़ दल भाजपा के जिला महामंत्री रोशन मेघवंशी के नेतृत्व में इस बार बलाई समुदाय का बड़ा हिस्सा भाजपा की तरफ आकर्षित है और उन्हें अधिक प्रभावित करने के लिए नामांकन के वक्त केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल को भी विशेष रूप से बुलाया गया था ,प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मेघवाल ने जिला महामंत्री रोशन मेघवंशी से लगभग आधा घंटे अकेले में चर्चा कर दलित मतों को भाजपा के पक्ष में लाने की रणनीति को अंतिम रूप दिया ,वहीं यह जानना रोचक होगा कि तिलस्वां महादेव की मेघवंशी समाज की सामूहिक विवाह कमेटी के अध्यक्ष कांस्या के पूर्व सरपंच सीताराम मेघवंशी भी गोपाल मालवीय के समर्थक माने जा रहे है ,ऐसे में इस समुदाय के वोट भी कांग्रेस की झोली से खिसकते नजर आ रहे है ।

हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस अपने परम्परागत वोट को मैनेज करने में सफल हो जाएगी ,लेकिन दूसरी तरफ यह देखा जा रहा है कि कांग्रेस का वोट बैंक मालवीय की तरफ शिफ्ट होता नजर आ रहा है ,जबकि अभी तो मालवीय ने अपना प्रचार अभियान प्रारंभ भी नहीं किया है ,संभवत वो नाम वापसी के बाद 16 जनवरी से अपने अभियान को गति देंगे ,तब ही स्थिति स्पष्ट हो पायेगी कि कौन किसके साथ है ?

फिलहाल दोनो पार्टियां और इलाके के मतदाता इस बात पर नजर टिकाये हुये है कि गोपाल मालवीय अपनी हिम्मत बरकरार रखते है या अपने पर हमला करने वाले लोगों के सामने झुक जाते है ,अगर वो रुके और झुके तो उनका राजनीतिक वजूद खतरे में होगा और उन्होंने बगावत कायम रख कर लड़ने का साहस दिखाया तो उनकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर तक होगी ,जो कि उनके राजनीतिक कैरियर के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है ।

– भंवर मेघवंशी
( लेखक शून्यकाल यूट्यूब चैनल के संपादक और स्वतन्त्र टिप्पणीकार है )

Leave A Reply

Your email address will not be published.