आम जन का मीडिया
if my childhood would not have been married!

काश,मेरा बाल विवाह नहीं हुआ होता !

- अनाम

बाल विवाह से हम सब परिचित है। हम हमारे आसपास हो रहे बाल विवाह को देखते भी है और सम्मिलित भी होते है।समाज की पिछडी हुई जातियों और गांव में रहने वाली बड़ी आबादी में बाल विवाह जैसी भयंकर कुप्रथा जो बरसों से चली आ रही है, वह आज भी समाज में चरम सीमा पर विद्यमान हैं।

बाल विवाह एक ऐसा विवाह है जिसमे जिनका विवाह होता है, उन्हें न तो विवाह के बारे में पता होता है, नहीं एक दूसरे के बारे में।
बाल विवाह होने के बाद जब दोनों बालिग हो जाते है और विवाह के बारे में पता चलता हे तो उनके पांवो तले जमीन खिसक जाती है, उनके सारे अरमान टूट चुके होते है। उनके पास अब सिर्फ पश्चाताप के अलावा कुछ नही बचता है। ऑप्शन तो रहते है लेकिन युवावस्था की पहली सीढ़ी में वे इतना बड़ा जोखिम अकेले नही उठा पाते है।

बाल विवाह का शिकार होने के बाद जब लड़का, लड़की को पंसद नही करने के या लडकी लड़के के अनुरूप नही होने बावजूद लड़के को उस लड़की के साथ जबरदस्ती रहना पड़ता है।यही हाल लड़की का भी होता है, यदि उसको वह लड़का पंसद नही है तो। तब जिंदगी अपना असली रंग दिखाना शुरू करती है .वह पल जीता है, हर पल मरता है जीता वह अपने माँ-बापू के लिए और मरता वह अपने आप के लिए। जख्म गहरे होते है उसके बावजूद वह आह नही कर सकता.वह कराह की आवाज भी नही कर पाता। मन ही मन मरने की कसम खाता है लेकिन माँ बापू की याद उसे मरने नही देती।

क्या जिए? क्यों जिए? किसलिए जिए? किसके लिए जिए? हरदम यही सवाल सुलगता रहता है कि काश उस दिन पुलिस वहां आ जाती और बाल विवाह रुकवा देती। घावों की गहराई इतनी गहरी हो जाती है ,हरपल इस दुनिया को छोड़ देने की इच्छा होती है।सुबह के उठने से रात को सोने तक सीवा रोने के कुछ नही होता है..फिर भी वह जिन्दा होता है।

हर साँस उसे तकलीफ देती है,हर रात उसे जख्म देती है,सबकुछ छोड़कर चले जाने की इच्छा होती है,फिर भी उसकी साँस चलती रहती है। जख्म किसी को बयां नही हो पाते, घाव किसी को दिखा नही सकते,हरदम अंदर ही अंदर बस अपना दर्द समझते रहते है।

बाल विवाह पीड़ित के पास नए विवाह का रास्ता होता है, लेकिन वह बिल्कुल भी आसान नही होता है। घर वालो को बोलना, घर वालो को अपने पक्ष मे करना और दूसरे पक्ष वाले को मुंह मांगी रकम देना। उसके बाद नए विवाह के लिए राशि जुटाना यह सब जख्म पर नमक लगाने जैसा है।क्योंकि इन सब के बाद वह एक बहुत बड़े कर्ज में डूब जाता है।

यदि आप लड़की है तो फिर खेल थोडा आसान है, लेकिन आप लड़के हो और बाल विवाह के पीड़ित हो तो फिर इस लेख को अपने सीने से लगाकर अपना मन हल्का करते रहो।क्योंकि लड़के के चाहने से कुछ नही होता है। जैसे ही लड़की पक्ष वाले को विवाह तोड़ने की बात पता चलेगी तो आप पर घरेलु हिंसा, दहेज़ कानून का उपयोग हो जाएगा। यदि आपकी परिवारिक आर्थिक कंडीशन मजबूत है तो फिर ठीक है,लेकिन उन लाखो युवाओ के दर्द कोन समझेगा, जो रोज अपनी सुंबह – शाम इस दर्द में गुजारते है।

इस उन्मुक्त गगन में वह आप आप का जिन्दा होने का सबूत देता रहता है,लेकिन वह असल में तो कब का ही मर चुका होता है।जीने का तो उसके पास बहाना होता है बाकि हर पल पल उसके रोना ही हिस्से में आता है।बेरंग सी सडी हुई जिंदगी में उसकी जिंदगी सिर्फ काले रंगों से रंगी हुई होती है जो कभी रंगीन नही बन पाती है।हर पल जीने की इच्छा रखने वाले के पास ,अब सिर्फ उसका टूटना ही शेष होता है।हर पल हर मिनट हर सेकंड ,उसके मन में बस एक ही ख्याल,काश, मेरा भी बाल विवाह नही हुआ होता।

ज़िन्दगी को कौन जीना नही चाहता ? जब ज़िन्दगी ही नही बची हो तो जी कर भी क्या करना और अंत में वह अपना दम तोड़ चुका होता है.इसलिए बालविवाह सिर्फ अभिशाप ही नही बल्कि आत्महत्या भी है .

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