आम जन का मीडिया
Hundreds of Sahria families deprived of housing

सैकड़ो सहरिया परिवार आवास से वंचित

-फ़िरोज़ खान

बारां । किशनगंज ब्लॉक के हीरापुर, पिपलघटा, पिंजनी, बिलासगढ़, जनकपुर, माधोपुर, सुंडा(चेनपुरा), हिम्मतगढ़ टापरा, सिमलोद, डबका(दिगोदा), अमरोली गांव में सैकड़ों सहरिया परिवार आज भी आवासहीन है । यह लोग अपने परिवार के साथ टापरियो मे रहने को मजबूर है ।

जनकपुर निवासी विधवा महिला शकुंतला सहरिया ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व मेरे पति की मजदूरी करते समय मौत हो गयी । मेरे दो लड़के है । धर्मवीर व सोमवीर जो सहरिया छात्रावास में पढ़ते है । मैं मेहनत मजदूरी कर अपने बच्चो का पालन पोषण कर रही हूं । उसने बताया कि मनरेगा में कई बार आवेदन कर चुकी हूँ । उसके बाद भी आजतक मस्टररोल में मेरा नाम नही आया । किसी के यहां घर का काम कर परिवार को चला रही हूं । मेरे पास रहने को मकान नही है । इस कारण पति की मौत के बाद अपने पिता के पास आकर रहने लगी हूं ।

इसी तरह जनकपुर निवासी विधवा महिला शीला सहरिया के पति की 5 वर्ष पूर्व दुर्घटना में मौत हो गयी है । इसके 3 बच्चे है । करीना, धर्मेश, संदीप जो छात्रावास में पढ़ते है । इसके पास भी रहने को मकान नही है । यह भी अपने परिवार के साथ टापरी में ही निवास करती है । और मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन करती है । अमरोली निवासी महिला रामी सहरिया ने बताया कि मेरे 3 बच्चे है । संजय व पूजा एक बच्चा सिवा जो विकलांग है । मेरे पति हाली लगे हुए है । रहने को मकान नही है । इस कारण सास ससुर की जगह पर टापरी बनाकर उसमें ही रहती हूँ ।

इसी तरह भागवती सहरिया के 2 लड़के है । सूरज व लखन दोनों ही पढ़ते है । पति जिंदगी से ही हाली लगा हुआ है । इस कारण मकान नही बन पाया है । यह महिला आज भी टापरी में ही रहती है । मूर्ति सहरिया के 3 बच्चे है । कृष्ण, कपिल, ज्योति तीनो ही पढ़ते है । पति मजदूरी करता है । इसके पास भी रहने के लिए मकान नही है । बादाम सहरिया के 2 बच्चे है । एक बच्ची प्रियंका पढ़ने जाती है । इसका पति भी मजदूरी करता है । और अपने परिवार का पालन कर रहा है । इसके पास भी रहने के लिए मकान नही है । वही रामकली सहरिया के दो 2 बच्चे है । रवि व सुनील जो पढ़ने जाते है । इसका पति हाली लगता है । इसके पास भी रहने को मकान नही है । दिलीप सहरिया, बदन सिंह के पास भी रहने को मकान नही है । ऐसे कई परिवार है जिनके पास रहने को मकान नही है । और अपने परिवार के साथ टापरियो मे ही गुज़र बसर कर रहे है ।

इसी तरह सिमलोद के सहरिया परिवारों को भी आवास नही मिले है । यहां के लोगो ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व 26 आवास सहरिया परियोजना के माध्यम से बने थे । उसके बाद से आज तक एक भी आवास का निर्माण सहरिया बस्ती में नही हुआ । इस सम्बंध में जब एचआरटीसी बारां ने ग्राम पंचायत से जानकारी ली तो पता चला कि पीएम आवास योजना में एक मकान स्वीकृत हुआ है । इसी तरह हिम्मतगढ़ टापरा के सहरिया परिवारों को भी आज तक आवास नही मिले है । वही घट्टी में मात्र 4 सहरिया समुदाय के लोगो को आवास मिले है । बाकी कई परिवार वंचित है । गिगचा गांव में करीब 150 घर सहरिया समुदाय व तीन घर हरिजन समाज के है । इन दोनों समुदाय के लोगो को सरकारी आवास नही मिले है । प्रल्हाद सहरिया ने बताया कि 2009 में 20 सहरिया परिवारों को आवास मिले थे । उसके बाद से आजतक नही मिले है ।

मेघराज पुत्र मोहनलाल सहरिया(28)एक पैर से विकलांग है । इसके चार बच्चे है । तीन लड़कियां सुमन, सोनम, कुसुमलता है । एक लड़का मनदीप है । यह चारो पढ़ते है । पत्नी चंद्रकला मेहनत मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करती है । बीमारी होने पर एक पैर कट चुका है । इसको पेंशन भी नही मिलती है । और ना ही आजतक सरकारी आवास मिला है । इसी तरह तीन परिवार हरिजन समुदाय के है । भगवान, अमृतलाल, अमरलाल इन्होंने बताया कि आज हमें सरकारी सुविधाओं का लाभ नही मिला है । यह तीनों परिवार झोपड़ियां में निवास करते है । राजू पुत्र प्रभुलाल सहरिया के 2 बच्चे है । इसके पास भी आवास की व्यवस्था नही है । इस गांव में करीब 46 परिवार ऐसे है जिनके पास बिल्कुल भी रहने के लिए आवास नही है । इसको लेकर अतिरिक्त जिला कलक्टर सहरिया परियोजना शाहाबाद से सहरिया परियोजना के माध्यम ऐसे वंचित परिवारों को सहरिया आवास उपलब्ध कराने की मांग रखी । जिस पर उंन्होने कहा कि वर्तमान में पीएम आवास योजना के अंर्तगत चयनित सूची के माध्यम से आवास उपलब्ध करवाए जा रहे है । इस योजना में आवास उपलब्ध करवाए जाएंगे । यह लोग भी टपरिया बनाकर अपने परिवार के साथ जीवन गुजार रहे है ।

एचआरटीसी बारां ने जिला प्रसाशन से वंचित सहरिया परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की मांग की है । वही विकास अधिकारी दिवाकर मीणा ने बताया कि पीएम आवास योजना में चयनित लोगो को आवास दिए जा रहे है जिनको आवास नही मिले है उनको द्वितीय सूची में मिलेंगे ।

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