डांगावास के शहीदों को नमन !

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(भंवर मेघवंशी)  

आज ही के दिन चार साल पहले, 14 मई 2015 को राजस्थान के नागौर जिले की मेड़ता तहसील के डांगावास गांव में एक जातिउन्मादी भीड़ ने पांच दलितों की हत्या कर दी और कईं स्त्री पुरुषों को गंभीर रूप से घायल कर दिया था ।

एक ऐसा कांड जिसके बारे में सुनकर के भी रूह कांप जाती है,यह दलितों के भुअधिकार से जुड़ा मामला था ,इसे जातिवादी तत्व अब तक भी दलित अत्याचार नहीं मानते,वे इसे दो परिवारों के बीच जमीन का झगड़ा बताते है,अगर यह दो परिवारों का झगड़ा था तो फिर इस नरसंहार को अंजाम देने एक ही जाति के सैंकड़ों लोग क्यों हथियार लेकर हमसलाह हो कर गए थे ?

राजस्थान की तत्कालीन भाजपा सरकार में हुए इस जातीय संहार के खिलाफ तब पूरे देश से आवाज़ें उठी थी,पूरा प्रदेश आंदोलित था,पूना पैक्ट की दुर्बल संताने तो बिल में घुस गई थी,तब एक चंद्रकांता मेघवाल को छोड़कर कोई दलित एमएलए ,एमपी डांगावास नहीं पहुंचा पीड़ितों की सुध लेने।

सड़कों पर हुए संघर्ष के सामने झुकते हुए सरकार ने मामला सीबीआई को सौंपा,जांच के बाद 40 अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुए,जिनमें से 28 अब तक गिरफ्तार हुए है और 12 अब तक फरार है। राज्य की वसुंधरा सरकार ने जो वादे पीड़ित दलितों से किये,उनको नहीं निभाया गया।

18 सूत्री मांगपत्र की महज कुछ मांगों को माना गया, शेष वादाखिलाफी जगजाहिर है,तत्कालीन भाजपा सरकार ने डांगावास के दलितों के साथ पूरी तरह से धोखा किया,आज भी डांगावास के पीड़ित अपनी पूरी क्षमता से इंसाफ के लिए लड़ रहे हैं।

डांगावास के शहीदों को शत शत नमन ।

 

(लेखक शून्यकाल के सम्पादक है)

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