सिविल सेवा की समग्र तैयारी कैसे करें ?

चर्चित आईपीएस पंकज चौधरी की कलम से

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इस लेख को लिखने के पीछे एकमात्र उद्देश्य उन गरीब, सुविधा विहीन, संसाधन की कमी, ग्रामीण परिवेश, आर्थिक स्थिति कमजोर, छात्र-छात्राओं के लिए है, जिनके जज्बे एवं जुनून में कमी नहीं है। जो वास्तव में सिविल सेवा में चयनित होकर संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने को तत्पर हैं। इस लेख में किसी भी छात्र-छात्राओं को जो इस सेवा में जाने की इच्छा रखता है, परन्तु कई प्रश्नों से दो-चार होता है, जिसमें महत्त्वपूर्ण है क्यों?, कब?, कैसे?, कितना?, कहां?। इन्हीं के सहारे तैयारी की रूपरेखा एवं रणनीति बताने का प्रयास है।

क्यों ?
सिविल सेवा की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को सर्वप्रथम इस सेवा में जाने का कारण स्पष्ट होना चाहिए। इस सेवा में क्यों आना चाहते हैं? आने का कारण स्पष्ट एवं पारदर्शी होना आवश्यक है, क्योंकि इसका प्रभाव प्री, मेन्स एवं साक्षात्कार पर पडऩा स्वाभाविक है। प्री में ज्ञान की परीक्षा एक दिन के एग्जाम में हो जाती है, वहीं ज्ञान की गहराई एवं लेखन क्षमता का आंकलन मेन्स से होता है। साक्षात्कार से व्यक्तित्व का परीक्षण होता है। यहां पर यह बताना उचित प्रतीत होता है कि आपका क्यों आपकी लेखन शैली को प्रभावित करता है एवं दिशा देता है। क्यों की समझ साक्षात्कार में अधिक बढ़ जाती है। क्योंकि समझ साक्षात्कार के साथ-साथ सिविल सेवा में चयन के उपरान्त भी प्रासंगिक होता है। जिस सपने, आदर्श, सिद्धांतों को लेकर इस क्यों के सहारे आप चयनित होते हैं, उसे पूरा करने का मौका चयन के बाद सेवा में आने पर मिलता है।

कब?
क्यों कि समझ आने के बाद कब महत्त्वपूर्ण है। सिविल सेवा में उम्र सीमा विभिन्न वर्गों के लिए निर्धारित है। अत: कब का स्पष्ट होना संबंधित वर्ग, समुदाय विशेष के छात्र-छात्राओं को होना चाहिए। यह आवश्यक नहीं कि 21 वर्ष की न्यूनतम सीमा पार करते ही एग्जाम दे दिया जाए। इसके लिए सर्वप्रथम सिविल सेवा के सिलेबस एवं पिछले 10 वर्षों के पेपर के आधार पर अपनी क्षमताओं का आकलन आवश्यक है। यह जानना जरूरी है कि आप प्री, मेन्स एवं साक्षात्कार के तीनों स्तरों पर कहां खड़े हैं। न्यूनतम अर्हता स्नातक होने से तात्पर्य किसी भी वर्ग, विशेष का व्यक्ति इस अर्हता को पूरा कर एग्जाम की प्रक्रिया में शामिल हो सकता है, परन्तु एग्जाम के इन तीन चरणों को पहले आत्मसात करना आवश्यक है। सिविल सेवा के सिलेबस के अधार पर तैयारियों का आंकलन स्पष्टत: कर लें। एक अच्छा आधार तैयार होने पर एक से तीन वर्ष का समय, या यों कहें तीन चांस सिविल सेवा को अपनी रणनीति में शामिल करके रखना चाहिए। बेहतर है यदि आपका आधार मजबूत है, तो प्रथम प्रयास में ही प्री, मेन्स, साक्षात्कार तीनों चरणों का आभास एवं दर्शन हो जाएं। किन्हीं कारणों से प्रथम प्रयास में सफलता नहीं मिलती है, तो दूसरे एवं तीसरे प्रयास को करो या मरो के तर्ज पर लिया जाना चाहिए। यहां पुन: स्पष्ट करना आवश्यक है कि तीन प्रयास की बात तभी रणनीति का हिस्सा बने, जब आपका सिविल सेवा के लिए पूरी तरह तैयार एवं आधार मजबूत है। यह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है कि आधार कब तैयार होता है। किसी को आधार तैयार करने में एक वर्ष, किसी को को 5 वर्ष भी लग सकते हैं। कहने का तात्पर्य आधार एवं चांस लेने के बीच की विषय-वस्तु स्पष्ट होनी चाहिए।

कैसे?
क्यों एवं कब स्पष्ट होने के उपरांत कैसे का रोल आता है। इसके लिए पुन: अपने माध्यम के आधार पर सिविल सेवा के सिलेबस एवं पेपर को आत्मसात करना आवश्यक है। अपनी तैयारी में इन आधारभूत तत्वों का समावेश आवश्यक प्रतीत होता है।
1. एन.सी.इ.आर.टी. (नई व पुरानी) सभी पुस्तकों का बार-बार अध्ययन (कक्षा : 6 से 12)।
2. लोकसभा एवं राज्यसभा चैनलों को अपने अध्ययन में शामिल करना।
3. किसी एक राष्ट्रीय स्तर की मासिक पत्रिका को अच्छी तरह अध्ययन करना।
4. एक राष्ट्रीय स्तर के हिन्दी एवं अंग्रेजी समाचार पत्र को शामिल करना।
5. योजना, कुरुक्षेत्र, इंडिया टुडेको अध्ययन में शामिल करना।
6. एक अच्छा गु्रप रखना जिसके माध्यम से विषय पर चर्च एवं रणनीति पर काम करना।
7. प्रत्येक दिन प्रात: एक घंटा योग एवं व्यायाम को देना।
8. खानपान में तली, बाहर की चीजें एवं जंकफूड का सेवन नहीं करना चाहिए।
9. प्रत्येक दिन के अध्ययन को कई भागों में विभक्त करना, बजाय एक ही विषय पर लम्बा समय व्यतीत करना।
10. प्रत्येक दिन के अध्ययन को सांय विश्लेषण करना एवं उस आधार पर अगले दिन की रणनीति तय करना।
11. अध्ययन को प्राकृतिक वातावरण एवं नेचर के आधार पर रखने का पूर्ण प्रयास करना। क्योंकि कोई भी दफ्तर या सरकारी कार्यालय का समय रात्रि एवं भोर में नहीं होता और न ही सिविल सेवा के प्री, मेन्स और साक्षात्कार रात्रि एवं भोर में होते हैं। अत: नेचर एवं प्राकृतिक रूप से समय प्रबंधन करें।
12. नौकरी करने वाले उम्मीदवारों में नौकरी करते हुए तैयारी के लिए समय प्रबंधन रखना होगा। यह पुन: व्यक्ति विशेष पर निर्भर करेगा।
13. 24 घंटे में कितने घंटे पढ़ाइ करनी है, इसका कोई फॉर्मूला नहीं है, यह पुन: व्यक्ति विशेष की क्षमताओं एवं उसकी समझ पर निर्भर करता है। यहां पुन: स्पष्ट करना आवश्यक है कि पहले आपका आधार तैयार है और आप चांस लेने को बिलकुल तैयार हैं, तो प्रात: 8 घंटे से 10 घंटे का अध्ययन के लिए पर्याप्त माना जा सकता है।
14. साकारात्मक सोच हमेशा बनाए रखें।
15. हमेशा अपने लक्ष्य के प्रति आशावादी एवं सकारात्मक ऊर्जा से युक्त बने रहें।

कितना?
क्यों? कैसे? कब? के उपरांत कितनी तैयारी करनी है, महत्त्वपूर्ण प्रश्न है। आपका आधार एवं चांस लेने की क्षमता तैयारी को स्पष्ट करेगा।
1. एक से तीन चांस के आधार पर रणनीति हो।
2. समय प्रबंधन अपनी क्षमता एवं परिस्थितियों के आधार पर तय हो, जैसा ‘कैसे’ में स्पष्ट किया गया है।
3. वर्ष, महीना, दिन निर्धारित होने के पश्चात् एग्जाम के घंटे, मिनट एवं सैंकड़ों का हिसाब भी रखना उतना ही महत्त्वपूर्ण एक रणनीति का हिस्सा है।
4. एक वर्षीय, तीन, पांच एवं दस वर्षीय योजना पुन: व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है। आयु सीमा के न्यूनतम एवं अधिकतम के बीच का जो अंतर है, व्यक्ति विशेष की क्षमताओं एवं आधार के अनुसार तय होता है।
5. कितना स्पष्ट होते ही आपकी तैयारी की लगभग रणनीति पूर्ण हो जाती है। अब आवश्यकता उस स्थान का चयनित करने की होती है, जहां से इस युद्ध की तैयारी एवं अंतिम जंग लड़ी जानी है।

कहां?
क्यों?, कब?, कैसे? कितना? के उपरांत कहां स्वाभाविक रूप से प्रासंगिक हो जाता है। यदि आपमें जज्बा एवं जुनून है, तो ‘कहां’आपके जज्बा एवं जुनून के आधार पर ही तय होगी। यदि आप ग्रामीण परिवेश से है, आर्थिक स्थिति सुदृढ़ नहीं है एवं आप अपने राज्य के मेट्रो-पोलिटन एवं राष्ट्रीय राजधानी आने में सक्षम नहीं हैं, तो भी आप वर्तमान दौर में अपने स्थानीय संसाधन से बाह्य संसाधनों का सामंजस्य रखते हुए चयनित हो सकते हैं। जिसमें इंटरनेट की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। यह पुन: व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है कि वह कहां से अपनी तैयरी एवं अध्ययन को करना चाहता है।

न जाति, न धर्म, न क्षेत्र, देश सर्वोपरि ,जय हिन्द !

(लेखक पंकज चौधरी 2009 बैच के आई.पी.एस. अधिकारी हैं। पंकज लेखन से गहरा लगाव रखते हैं। पुस्तकों से पंकज का पुराना रिश्ता है। अपने कामकाज, राष्ट्रप्रेम और सबको साथ लेकर चलने की मुहिम के चलते देशभर के चर्चित युवा आई.पी.एस. अधिकारियों में उनकी गिनती होती है।)

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