होमो सेक्सुअलिटी बनाम धर्म ,मजहब ,रिलीजन !

92

(भंवर मेघवंशी) 

समलैंगिकता पर आज सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया है ,एक परिपक्व होते लोकतांत्रिक में इस तरह के फैसले की अपेक्षा तो रहती ही है ,इस दिशा में लंबे समय से जो समलैंगिक कार्यकर्ता संघर्षरत थे ,उनको जीत मिली।

लंबे संघर्षों के बाद विजय का मिलना कितनी खुशी देता है ,यह फैसला आने के बाद एलजीबीटी कार्यकर्ताओं के जश्न से पता चलता है ।

सबसे हैरतअंगेज प्रतिक्रिया विभिन्न धर्मों के ठेकेदारों की है,जैसे कि इनके धर्म, मजहब,रिलीजन धारा 377 से ही बचे हुए थे और अब भारी खतरे में पड़ गए है ।

पता नहीं धर्म और नैतिकता लोगों की नितांत निजी सेक्सुअल लाइफ में इतना इंटरेस्ट क्यों लेते है ,कौन अपनी निजी जिंदगी में किसके साथ रह रहे है ,यह भी अब धर्म तय करेगा ।

ये कैसे धर्म ,मजहब ,रिलीजन है ,बड़े बेशर्म किस्म के ,लोगों के बेडरूम में घुसे जा रहे है ,अब तो चड्डी में घुस गये है ,लगता है कि इससे भी आगे चले जाएंगे ,बिल्कुल अंदर ही प्रविष्ट हो जाएंगे !

संभवतः गुदा, लिंग अथवा योनि में धर्म और नैतिकता फंसेे हुये है ,उन्हें बचाने के लिए धारा 377 जरूरी है ।

फैसला आते ही बन्द भारत के मंदमति लोगों ने इसके लिए कड़े कानून की मांग चालू कर दी है ,एक कड़े कानून को हटाने की मांग और दूसरा कड़ा कानून बनाने की मांग ,अजीब पाखण्डपन है ।

धार्मिकनुमा एक संगठन ‘अखिल भारतीय हिन्दू महासभा’ तो मैदान में उतर चुकी है ,लेटरपेड पर उनके नम्बर है,जरा पूछ पूछ कर सम्बन्ध बनाइयों, वरना धर्मद्रोही ,देशद्रोही ,सेक्स द्रोही ..कुछ का कुछ द्रोही साबित करके मॉब लिंचिंग कर देंगे ।

धारा 377 को अपराध की श्रेणी में रखने किए लिये पत्र

वैसे समलैंगिक संबंधों के खिलाफ सारे धर्म ,मजहब ,रिलीजन एक है ,फादर,पास्टर,नन,मुनि ,साध्वी, मुल्ला ,मौलवी ,संत,महंत ,साधु ,ब्रह्मचारी सब सयाने एक मत है ,कुंठित यौन अनुभवों के सरताज सहज यौन संपर्कों के भी विरुद्ध खड़े है ।

वे पहरा दे रहे है कि कहीं आदमी को आदमी से प्यार न हो जाये,स्त्री स्त्री के साथ न सो जाएं ।

इस मोरल पुलिसिंग के अलावा इनके पास कोई जॉब ही नहीं है ।

खैर,जो भी प्राकृतिक है ,वह प्रकृति पर मौजूद है,यहां कुछ भी अप्राकृतिक नहीं है ,मैं आज के फैसले को एलजीबीटी समुदाय के गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की दिशा में एक माइल स्टोन मानता हूँ और इस निर्णय का स्वागत करता हूँ ।

ऐसा लगता है कि -“एक तरफ जब भारत बन्द हो रहा था ,उसी वक़्त भारत खुल भी रहा था ।”

उन सब ज्ञात अज्ञात मित्रों ,परिचितों को बधाई जिनको अपने सेक्सुअल ओरिएंटेशन को अब तक गुप्त रख कर जीना पड़ रहा था ,उम्मीद है कि अब वे स्वाभिमानपूर्वक जी सकेंगे ।

भंवर मेघवंशी
( संपादक -शून्यकाल )

Leave A Reply

Your email address will not be published.