हिदायत भाई और हरिकाका !

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शून्यकाल की पूरी टीम तकरीबन सात घंटे के सफर के बाद गुजरात के पालनपुर जिले के कुम्भासन गांव पँहुची । हम कुंभासन में अमन ,इंसानियत और भाईचारे के लिए समर्पित विचारवन्त युवा हिदायत खान के मेहमान थे ,हिदायत भाई हमारे मित्र रमेश पतालिया जी के खासमखास दोस्त है ,दोनो साथी इसी गांव में रहते है ।

हिदायत भाई के पुरखे राजस्थान के जालौर इलाके से अकबर की फौज के साथ इधर आये थे ,उनकी वीरता और शौर्य को देखकर उस वक़्त के सुल्तान ने कई जागीरें उन्हें अता की ,तब से ये लोग यहीं बस गये ,आम बोलचाल में इन्हें आज भी जालोरी मुस्लिम के तौर पर ही पहचाना जाता है । हिदायत भाई के खानदान का आज भी राजस्थान से जीवंत संपर्क है , ये सूफीज्म की धारा वाले लोग है , नागौर जिले की रियांबड़ी में इनके पिरोमुर्शीद की पावन मजार मौजूद है ,जहां अक्सर हिदायत खानदान जियारत हेतु जाता है ।

हिदायत भाई बहुत अध्ययनशील गांधीवादी विचार के युवा है , अमन ,शांति और इंसानियत के लिए सक्रिय रहते है ,हिंदी ,अंग्रेजी ,उर्दू और गुजराती भाषाओं के जानकार है , पढ़ने लिखने के जबरदस्त अनुरागी ,देश दुनिया की हर चर्चित किताब इनकी स्टडी में मौजूद होती है ,एक छोटे से गांव में इस तरह के व्यापक अध्येयता युवा से मुलाकात आनंददायी क्षण होता है । हिदायत भाई के साथ यह तीसरी मुलाकात थी ,उनके घर दूसरी बार जाना हुआ ,लेकिन रुके पहली बार ही ,खूब मेहमाननवाजी हुई ,तरह तरह के व्यंजन और दालचीनी डली हुई सुस्वादिष्ट चाय का आस्वादन !बेहद मजेदार था ।

यहीं पर 61 वर्षीय हरिभाई सोलंकी आये ,जिन्हें सब साथी बेहद प्यार और सम्मान से हरि काका कह कर बुलाते है ,काका यहां के अम्बेडरवादी युवजनों के लिए एक प्रेरणास्रोत है , उम्र और स्वास्थ्य की वजह से हरि काका के दोनों घुटने जवाब दे चुके है ,मगर उनके जोश जज्बा देखते ही बनता है ,हरि काका बहुत पढ़ते लिखते है ,खेती और पशुपालन तो करते ही है ,मगर उनकी नजर हर नए विचार पर है ,दो दिनों का हरिकाका का सानिध्य ऊर्जा देने वाला अनुभव रहा ,हरिकाका का जीवन संघर्ष का जीवन रहा ,मगर कभी हार नहीं मानने वाले ,अनथक मुसाफ़िर जो चलते रहे ,चलते रहे और चलते ही रहे ,आज भी चल रहे है । हरि काका और हिदायत भाई से खूब वैचारिक आदान प्रदान हुआ ,साथ साथ रहे ,नए नए विचार जाने ,समझे और मंथन किया ।

हिदायत भाई ने दो दिनों तक अपने दौलतखाने पर हम नाचीजों की खूब ख़ातिर तवज्जो की ,वापसी में पुस्तकें भेंट की ,वर्ष 2018 के लिए एक डायरी भी दी ,उन्हीं की गाड़ी में घुमाया और रेवदर तक विदा देने आए ,शुक्रिया हिदायत भाई ,शुक्रिया हरिकाका ,आप लोगों से मिल कर बहुत कुछ सीखने को मिला ,सबसे ज्यादा शुक्रिया रमेश जी पतालिया का जिनकी वजह से हम मिले ।

..एक बात बताना तो मैं भूल ही गया कि हिदायत भाई कंप्यूटर प्रोग्राम ,तकनीकी और फोटोग्राफी के माहिर इंसान है ,पुलिस ,प्रशासन और भारतीय सेना भी उनकी सेवाएं लेती रहती है ।

हिदायत भाई और हरि काका से मिलना जिन्दगी का एक खुबसूरत पल बन गया .

– भंवर मेघवंशी
( संपादक – शून्यकाल )

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