आम जन का मीडिया
Have you ever called your child a donkey?

क्या आपने अपने बच्चे को कभी गधा कहा है ?

हो सकता है न कहा हो, लेकिन अगर कहा भी है तो आप सजीवों के इस प्रमुख लक्षण के बारे में ज़रूर पढिये । इतना तो आपको ज्ञात ही होगा कि जैसे शेर की संतान शेर होती है वैसे ही मानव की संतान मानव ही होती है । ठीक उसी तरह गधे की संतान भी गधा ही होती है फिर आपकी संतान यदि गधा है तो आप मनुष्य कैसे हो सकते हैं ?

खैर छोड़िए ,मैं मानता हूँ आपने उसकी बुद्धिहीनता के कारण उसे गधा कहा होगा जैसा कि कभी आपको आपके पिता या स्कूल टीचर ने आपको कहा होगा ।

वैज्ञानिक तथ्य यह है कि सभी सजीवों में प्रजनन के गुण द्वारा संतान उत्पन्न करने की क्षमता होती है । संतान के सामान्य लक्षण अपने जनक के समान ही होते हैं,इसीलिए कवि ने कहा है ‘बोये पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय ‘ । जिस तरह पेड़ों में अपने बीज द्वारा संतान उत्पन्न करने की क्षमता होती है उसी तरह मनुष्यों और पशुओं में भी होती है । यह पूरा विज्ञान प्रजनन विज्ञान कहलाता है ।

इसमें कुछ नई बात नही है सभी यह जानते हैं । कुछ मानव अपनी संतान को गधा कहकर सम्बोधित करते हैं तो कुछ लोग अपने आप को या अपने बच्चों को शेर दा पुत्तर भी कहते हैं. खैर, जाने दीजिए यह यह उनका निजी मामला है । प्रजनन विज्ञान से उनका क्या लेना देना ?

हाँ यह बात याद रखियेगा कि निर्जीवों में प्रजनन क्षमता नहीं होती ,यह आपने कभी नहीं सुना होगा कि एक कुर्सी के पास दूसरी कुर्सी रख दी गई तो कुछ दिन बाद एक बच्चा कुर्सी पैदा हो गई हो । इस बात पर विश्वास करेंगे तो आपकी हालत उस कंजूस जैसी हो जाएगी । चलिये यह किस्सा भी सुन ही लीजिये –

एक बार एक गरीब व्यक्ति एक साहूकार से कुछ बर्तन उधार ले गया । उस साहूकार ने बहुत मुश्किल से बर्तन उधार दिए बल्कि उसका किराया भी ज़्यादा मांगा । जब लौटाने की बारी आई तो ले जाने वाले ने न केवल किराया दिया बल्कि बर्तनों के साथ छोटे-छोटे कुछ बर्तन भी लौटाए,जैसे बड़े गिलास के साथ छोटा गिलास बड़ी थाली के साथ छोटी थाली।

जब साहूकार ने इसका कारण पूछा तो उसने जवाब दिया कि- ” मालिक इतने दिनों में आप के बर्तनों के मेरे घर में रहते हुए बच्चे हो गए । सो मैं उन्हें कैसे रख सकता था ।”

साहूकार ने मन ही मन खुश होते हुए चुपचाप वह सारे बर्तन रख लिए। जब दुबारा मौका आया तो व्यक्ति फिर बरतन उधार ले गया। जब कई दिनों तक उसने वह बर्तन नहीं लौटाए तो साहूकार ने उससे पूछा “भाई, मेरे बर्तन क्यों नहीं लौटा रहे?”

तो उस व्यक्ति ने कहा “क्या बताऊं मालिक सारे बर्तन एक दिन बीमार हो गए और मर गए।” साहूकार क्या कहता ।उसने जब बर्तनों की संताने होने पर विश्वास किया था तो अब बर्तनों की मृत्यु होने पर भी उसे विश्वास करना पड़ा ।

कहानी का संदेश यह है कि मृत्यु और प्रजनन सिर्फ सजीवों के लक्षण हैं निर्जीवों के नहीं । आपके साथ भी यदि कोई ऐसा मौका आये तो ध्यान रखिएगा ।

-शरद कोकास
( 8871665060 )

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