सरकार अपना दायित्व निभाएं और जनता को सच बताएं

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– गुरदीप सिंह सप्पल
पिछले दिनों दो महत्वूर्ण राजनीतिक घटनाएं ऐसी हुईं जो सरकारी काम काज से भी  जुड़ी हुई हैं और जिन्होंने राजनीति की दिशा और दशा पर गहरा प्रभाव डाला। पहला राफेल मुद्दे पर सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा और दूसरा कन्हैया कुमार की दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट।
राफेल में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पता चला कि फैसला जिस CAG रिपोर्ट और PAC के समक्ष प्रस्तुति पर आधारित है , वो CAG रिपोर्ट अभी बनी ही नहीं है और जब बनी ही नहीं तो PAC के समक्ष प्रस्तुत होने का सवाल ही नहीं उठता। ये खुलासा होने के बाद सरकार की तरफ से बयान आया कि हलफनामे में typography error था। वैसे typography error का मतलब होता है टाइपिंग में कोई अक्षर या शब्द गलत टाइप हो जाना। लेकिन यहां तो पूरा पैराग्राफ ही गलत टाइप हो गया। खैर।
दूसरी घटना हुई कन्हैया कुमार के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा कोर्ट में दाखिल चार्जशीट। ये चार्जशीट बनाने में तीन साल का समय लगा। लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि कोर्ट ने पहले सुनवाई में ही दिल्ली पुलिस को फटकार लगा दी कि चार्जशीट का दिल्ली सरकार से approval क्यों नहीं लिया गया। कोर्ट ने ये भी पूछा कि क्या दिल्ली पुलिस का लीगल डिपार्टमेंट नहीं है और क्या आपको कानूनी प्रक्रिया का ज्ञान नहीं है ?
जिसने भी सरकार में कभी काम किया है वो यह बात जानता होगा कि सरकार में किसी भी बात के लिए पूरी फ़ाइल चलती है जो एक assistant या कोई निचले स्तर के अधिकारी द्वारा शुरू की जाती है और कई  सारे उच्च  अधिकारियों द्वारा उसको approve किया जाता है। अगर कोई छोटी सी भी गलती रह जाये तो सम्बंधित अधिकारी को Memo दे कर उसका explanation (स्पष्टीकरण) माँगतें हैं। और उस अधिकारी पर कार्यवाही की जाती है।
अब प्रश्न ये उठता है कि राफेल में जो हलफनामा दिया गया, उसकी फ़ाइल किन किन अधिकारियों के पास गई और उनमें से कोई भी अधिकारी इस typographical error को क्यों नहीं पकड़ पाया। उस गलती के लिए, जिस की वजह से सरकार की संसद में फजीहत हुई, किन किन अधिकारियों को Memo दिया गया है और उन पर क्या क्या कार्यवाही हुई है? अगर ऐसा कुछ नहीं हुआ है तो इस मामले में संबंधित मंत्री और सरकार की संलिप्तता ज़ाहिर होती है की मंत्री के कहने पर ही हलफनामा लिखा गया और बाद में पकड़े जाने पर टाइपिंग गलती कह कर सरकार ने अपना बचाव कर लिया।
कन्हैया कुमार का मामला तो और भी स्पष्ट है। जो IO (जांच अधिकारी) इस मामले की जांच कर रहा है क्या उसको इतना भी नहीं पता कि दिल्ली सरकार का approval लेना था चार्जशीट दाखिल करने से पहले ? कोर्ट में पुलिस की फजीहत कराने के लिए उस IO पर क्या कार्यवाही की गई है? ऐसे नकारा और अक्षम अधिकारी से सही जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उस को फौरन इस जांच से हटाना चाहिए। और जिन जिन वरिष्ठ अधिकारियों ने इस चार्जशीट को देखा था या approve किया था, उन सब  का भी स्पष्टीकरण मांगना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया है तो एक बार फिर सरकार की संलिप्तता सामने आती है कि ये चार्जशीट politically motivated है और आने वाले चुनावों के मद्देनजर जनता का ध्यान सरकार की गलतियों से भटकाने के लिये,  दबाव डाल कर दाखिल कराई गई है। जनता सच्चाई जानना चाहती है।
सरकार अपना दायित्व निभाये और सच बताए।
( लेखक की फेसबुक वाल से साभार )

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