दिव्यांगों का दर्द : सरकार आकर हमारा नाम बदल देती है, लेकिन किस्मत नहीं !

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(जयपुर. 25-10-2018)

जन निगरानी अभियान धरने के 11 वें और आखिरी दिन गुरुवार को राज्य कि शिक्षा व्यवस्था, थड़ी-ठेले वालों के अधिकार एवं कानून और विकलांगजनों के मुद्दों पर संवाद किया गया और सभी राजनीतिक दलों से इनकी मांगों को उनके घोषणा पत्र में शामिल करने कि मांग की गई.

धरने में दिल्ली से RTE फोरम के राष्ट्रीय संयोजक अम्बरीश रॉय, भारत ज्ञान-विज्ञान  समिति की कोमल श्रीवास्तव, शिक्षाविद देवयानी, एकता नंदवाना, विकलांग मंच के संयोजक रतन लाल बैरवा, बाल अधिकार साझा मंच के शिव सिंह नयाल, रेहड़ी-पटरी संघर्ष समिति के महावीर, नेशनल होकर्स फेडरेशन के अध्यक्ष मो. याकूब शामिल हुए.

धरने में सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने कहा कि निर्माण मजदूर, विकलांग, एकल नारी और बुजुर्गों को न्यूनतम मजदूरी की आधी पेंशन मिलनी चाहिए.

धरने में ये प्रस्ताव पारित किये गये.

  • संविधान में निर्देशित शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करते हुए कक्षा 1 से 12 तक 18 साल  तक के बच्चों को मुफ्त, एवं समान शिक्षा मिले।

  • शिक्षा के समान अवसरों की सुनिश्चितता हेतु कॉमन स्कूलों को स्थापित किया जाये।

  • शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 के अर्न्तगत आपदा, चुनाव एवं जनगणना के अलावा शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाये।

  • शहर एवं कस्बों के आस-पास के स्कूल और गांवों या दूरदराज के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता एवं अन्य सुविधाओं में भेदभाव समाप्त हो।

  • आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हेतु विशेष योजना बने ताकि भौगोलिक एवं सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं के चलते बच्चे शिक्षा से वंचित न रह सके।

  • किसी भी प्रकार का बाल श्रम करवाने और बाल श्रम में बच्चों को भेजने वाले लोगों पर सख्त कानूनी कार्यवाही कर समस्त बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाये।

  • शिक्षकों के स्थानांतरण में राजनीतिक दखल को समाप्त कर स्पष्ट नीति बनाई जाये।

  • विद्यालय स्तर पर छात्र-शिक्षा अनुपात की सुनिश्चितता हेतु विद्यालय प्रबंधन समिति को यह अधिकार हो कि आवश्यकता एवं पर्याप्तता को देखते हुए किसी भी शिक्षक को वह तभी स्थानांतरित होने की स्वीकृति दे जब कोई दूसरा शिक्षक उसके स्थान को भर रहा हो।

  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हेतु समस्त प्रारंभिक शिक्षा के विद्यालयों में समग्र सतत मूल्यांकन पद्धति को लागू कर उसका बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाये.

  • मध्यान भोजन में केन्द्रीकृत किचन व्यवस्था को समाप्त कर विद्यालय स्तर पर भोजन बनाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये।

  • राज्य में शिक्षा के अधिकार कानून के अनुरूप आधारभूत संरचनाओं की पर्याप्तता को सुनिश्चित किया जावे।

  • राज्य में बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षकों के द्वारा ही शिक्षण कराया जाये।

  • प्रत्येक स्कूल में बिजली एवं पानी के साथ पहुँचने के लिए यातायात की समुचित व्यवस्था  की जाये।

  • शिक्षा से संबंधित समस्याओं के लिए सुदृढ़ शिकायत-समाधान व्यवस्था की तकनीक विकसित की जाये.

  • शिक्षा विभाग पंचायती राज को सौंपा जा चुका है जिसके लिये उनके सर्विस नियमों में भी बदलाव किये जाये।

  • आदिवासी क्षेत्रो में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चो को मिले यह सुनिश्चित करने के लिये शिक्षा के अधिकार कानून के तहत सुविधाओं / प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाये।

  • स्कूलों में खाली पड़े अध्यापकों एवं अन्य स्टाफ के सभी पदों  को तुरंत भरा जाये।

  • शिक्षा का निजीकरण बंद हो और पूर्णकालीन शिक्षक ही लगाये जाएँ।

  • सरकारी स्कूलों को समायोजित करने से बालिकाएं शिक्षा से वंचित हुई हैं अतः समायोजन को समाप्त किया जाए और हर गांव के निकट बालिकाओं की शिक्षा की व्यवस्था की जाए।

  • घुमंतू समुदाय के बच्चों के लिए आवासीय और मोबाइल स्कूल खोले जाएँ.

  • दिव्यांगों को 4 % आरक्षण दिया जाये.

  • थड़ी-ठेला कानून कि सख्ती से पलना हो.

अभियान कि अगली कड़ी में 30 अक्टूबर को शहीद स्मारक पर सभी राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों के साथ जन संवाद किया जायेगा और धरने के दौरान बने जन घोषणा पत्र को इन पार्टियों के घोषणा पत्र में शामिल करवाने कि मांग की जाएगी.

जन निगरानी अभियान
जन निगरानी अभियान

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