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Gahlot's magic in Karnataka!

कर्नाटक में चला गहलोत का जादू !

भाजपा की सरकार की विदाई और कांग्रेस- जद ( सेकुलर ) की सरकार के लिये रास्ता साफ करने में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की भूमिका की सर्वत्र चर्चा हो रही है .

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव अशोक गहलोत जहाँ भी जाते है ,वहीँ अपनी जादूगरी दिखाने लगते है ,उनके खाते में सफलताएँ निरंतर जुडती जा रही है ,उनका ताजा अचीवमेंट कर्नाटक में भाजपा सरकार का गिरना और जद(सेकुलर ) और कांग्रेस की सरकार बनने की शुरुआत है .

गहलोत जो कि आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के सबसे करीबी राजनितिक सलाहकार के रूप में उभर कर सामने आये है ,इन दिनों उनको कोई भी ज़िम्मेदारी सौंपी जाती है ,उसे अशोक गहलोत जबर्दस्त तरीके से कामयाबी के मुकाम तक ले जाते है .

राजनीतिक प्रेक्षकों का साफ मानना है कि अशोक गहलोत को काफी मुश्किल टास्क को बेहद सरलता से पूरा करने का कमाल हासिल है .जैसे कि पंजाब कांग्रेस में जब लगभग बगावत के हालात थे ,तब अशोक गहलोत वहां पर प्रभारी बना कर भेजे गये ,उन्होंने न केवल बागियों को साधा ,बल्कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व मे स्पष्ट बहुमत की सरकार बनवा कर अपने रणनीतिक कौशल का लौहा मनवा दिया .

गुजरात में दो दशक से ज्यादा वक्त से सत्ता से बाहर कांग्रेस पार्टी को मुकाबले में लाने का काम भी बहुत ही कम समय में गहलोत ने कर दिखाया ,जबकि वहां चुनाव से ठीक पहले शंकर सिंह वागेला जैसे नेता पार्टी छोडकर चले गये ,तृणमूल स्तर पर पार्टी का कोई मजबूत ढांचा नहीं होने के बावजूद भी कांग्रेस को फाईट में ला खड़ा किया और भाजपा की जीत का आंकड़ा दहाई पर ला पटका ,हालाँकि अपेक्षित संख्या के नहीं होने के चलते पार्टी सरकार नहीं बना पाई ,लेकिन मोदी शाह की जोड़ी को कांग्रेस के राजनीतिक चाणक्य अशोक गहलोत ने नाकों चने चबवा दिये .

हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अशोक गहलोत को पार्टी में नम्बर दो की पोजीशन देते हुये कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव ( संगठन एवं प्रशिक्षण ) बनाया है ,जो कि बहुत ही पावरफुल पद माना जाता है .जब से गहलोत ने यह पद संभाला है ,वे कांग्रेस अध्यक्ष के साथ साये की तरह नजर आते है और लोगों की आम राय बन चुकी है कि अब गहलोत कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर के एक निर्विवाद नेता के रूप में स्थापित हो चुके है और उन्होंने लगभग वही जगह राहुल गाँधी के पास बना ली है जो सोनिया गाँधी के यहाँ उनके राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल का रहा है .

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जो कि मूलतः जादूगर है ,उनका ताजा जादू कर्नाटक में चला है ,वहां पर जिस तरह का फ्रेक्चर्ड मेंडेट आया ,उस खंडित जनादेश के चलते कांग्रेस के भीतर नेतृत्व के सवाल उठते या परस्पर आरोप प्रत्यारोप शुरू होते ,उससे पहले ही कांग्रेस ने जद ( धर्मनिरपेक्ष) को बेशर्त समर्थन डे कर राजनीती के जानकारों को चौंका देने का काम किया ,कांग्रेस के इस त्वरित निर्णय के मुख्य रणनीतिकार अशोक गहलोत बताये जा रहे है ,जिन्होंने बिना वक्त गंवाए पार्टी का बिना शर्त समर्थन कुमारस्वामी को देने का फैसला करवाया ,इतना ही नहीं बल्कि अपने सुदीर्घ राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभवों के आधार पर गहलोत ने कांग्रेस को कोर्ट से लेकर सड़कों तक सक्रिय रखने की रणनीति को बखूबी अंजाम दिया ,इतना ही नहीं बल्कि चिलचिलाती धूप में बंगलुरु में गाँधी प्रतिमा के सामने कांग्रेस -जद (ध) के विधायको और बड़े नेताओं के साथ धरने पर डटे रहे .

जादूगर राजनीतिज्ञ अशोक गहलोत की जादुई सक्रियता , सुदृढ़ रणनीति ,राजनीतिक कौशल ,सरकार बनाने और चलाने के परिपक्व अनुभवों के चलते कांग्रेस ने अंततः कर्नाटक के राजनीतिक नाटक को बदल कर रख दिया है ,यह गहलोत की ही आलाकमान को भरोसे में लेकर बनाई गई रणनीति का ही नतीजा था कि भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ा है और कांग्रेस -जद (ध )सरकार बनने का रास्ता साफ हुआ है .

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कद हर दिन बढ़ता जा रहा है ,उनकी राजनीतिक कुशलता का लौहा उनके विरोधी भी मानने को मजबूर हो चुके है ,वे कांग्रेस आलाकमान से लेकर आम कार्यकर्ता तक निरंतर जनप्रिय होते जा रहे है,कर्नाटक की सफलता के बाद उनकी सर्वत्र सराहना हो रही है .

अब उनका अपना प्रदेश राजस्थान उनकी राह देख रहा है ,राजस्थान के हर कोने से यह आवाज़ बलवती हो रही है कि अगर राज्य में सरकार चाहिए तो अशोक गहलोत के हाथों में कमान होनी चाहिए और जनता के मध्य यह साफ होना चाहिए कि गहलोत का कुशल नेतृत्व राज्य को मिलनेवाला है.

( राजनीतिक विश्लेषक )

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