इन आँखों में अब ‘ एनकाउन्टर ‘ का डर !

-प्रमोदपाल सिंह

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हिंदुत्व की आवाज बुलंद करने वाले विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया के सनसनीखेज आरोप से हर कोई सन्न रह गया। लगातार 11 घंटे तक लापता रहने के बाद विश्व हिंदू परिषद के नेता तोगड़िया अहमदाबाद के सांई बाग इलाके में सड़क किनारे बेहोशी की हालत में मिले। जब होश आया तो तोगड़िया ने अहमदाबाद के चंद्रमणि अस्पताल में आरोप लगाया कि उनका एनकाउंटर करने की साजिश की गई। अपने भाषणों में कभी आग उगलने वाले तोगड़िया रोते हुए अपने भीतर बैठें ड़र को बयान करते रहे और कहा कि उन्हें ड़राया जा रहा हैं,जबकि वे ड़रने वाले नही हैं। कुल मिलाकर मोदी से लगातार बढ़ती जा रही दुरी अब उनके लिए अपने अस्तित्व की लड़ाई पर आ गई हैं। संघ के भीतर भी इसे अलग-अलग नजरीए से देखा जा रहा हैं।

दरअसल,मकर संक्राति के दिन राजस्थान की पुलिस का काफिला उनके खिलाफ गैर-ज़मानती वांरट लेकर आया। राजस्थान की गंगापुरसिटी कोर्ट ने दंगे के एक मामले उनके खिलाफ सम्मन जारी किया था। कई बार ज़मानती वारंट जारी होने के बाद भी वो कोर्ट में हाज़िर नहीं हुए थे। लिहाजा कोर्ट ने ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया था। राजस्थान पुलिस अहमदाबाद के सोला पुलिस स्टेशन उन्हें गिरफ़्तार करने पहुंची थी। लेकिन वे नहीं मिले तो पुलिस खाली हाथ लौट आयी।

बता दे कि प्रवीण तोगड़िया 3 अप्रैल 2002 को गंगापुरसिटी पहुंचे थे और कर्फ्यू व निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर सभा की थी। इस मामले में पुलिस ने तोगड़िया सहित 17 लोगों पर केस रजिस्टर किया था। कोर्ट ने इस पर प्रसंज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू कर दी। इधर,प्रदेश में भाजपा की सरकार आते ही वर्ष 2014 में इस केस को वापस लेने की सिफारिश गृह विभाग को मिली। गृह विभाग ने 9 जून ,2015 को इसके लिए एसपी को पत्र भेज दिया था। यह महत्वपूर्ण पत्र कहां दब गया। जिसकी वजह से सम्मन जारी हो गया। ऐसे में पुलिस ने तो कोर्ट के आदेश पर अपनी ड्यूटी ही की। बकौल गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया इस मामले में चूक हुई है और मामले की जांच होगी।

लेकिन तब तक प्रवीण तोगड़िया के आरोप से सियासत में उबाल आ चुका था। जिस वक्त पीएम नरेन्द्र मोदी राजस्थान के पचपदरा में रिफायनरी जैसी महत्ती परियोजना के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उसी वक्त तोगड़ीया अपने एनकाउंटर होने के डर को बयान कर रहे थे। कभी एक ही स्कूटर पर अहमदाबाद की सड़कों पर मोदी के साथ दिखने वाले तोगड़ीया कीे मोदी के साथ रिश्तों में आयी खटास से पूरे घटनाक्रम को जोड़ा जा रहा हैं। खटास कब आयी? कोई ठीक से नहीं बता सकते। लेकिन वर्ष 2002 के बाद मोदी के सीएम बनने के बाद दरार बढ़ती गई। शायद मोदी को गृह विभाग के कामकाज में उनकी दखलदांजी रास नही आयी।

इससे पहले गांधीनगर विकास के नाम पर दो सौ मंदिरों को तोड़ने के मुद्दे पर भी मोदी और तोगड़िया के बीच विवाद बढ़ा। बाद में जिन्ना पर आडवाणी की टिप्पणी के विरोध मे भी विहिप कार्यकर्ताओं के गुजरात में प्रदर्शन पर पुलिस के लाठीचार्ज पर भी विहिप और गुजरात की तत्कालीन मोदी सरकार के बीच टकराव बढ़ा था। वर्ष 2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी ने सद्भावना कार्यक्रम आयोजित किया तो इसकी तोगड़िया ने उनका मजाक उडाया। कुछ समय पहले तोगडीया ने गौसेवा के लिए कांग्रेस की सराहना की,जो शायद ही भाजपा को हजम हुई हो।

बीते दिसम्बर में भुवनेश्वर में हुई बैठक में विहिप की कार्यकारी परिषद में तोगड़िया और अध्यक्ष रेड्डी के कार्यकाल को आगे बढ़ाने पर पर चर्चा होनी थी। संघ रेड्डी के स्थान पर वी कोकजे को देखना चाहता था। मगर तोगड़िया ने शक्ति प्रदर्शन कर इसका कड़ा विरोध किया। इस दौरान सत्तर फिसदी पदाधिकारी तोगड़ीया के पक्ष में खड़े दिखाई दिए तो अगले तीन साल के लिए उन्हें ही फिर से अध्यक्ष बना दिया गया।

इसके बाद तोगड़ीया के खिलाफ वारंट जारी होने के एकाएक कई मामले सामने आए हैं। इसे संयोग भी माना जा सकता हैं। लेकिन तोगडीया तो इसे साजिश करार दे चुके हैं। लगता हैं तोगड़ीया भाजपा के साथ अनबन की कीमत चुका रहे हैं।

जो चेहरा अक्सर गरजती हुई आवाज में भाषण देता दिखाई देता रहा है। वह अचानक मीडिया से बात करते हुए रोने लगा और आंसुओं में उसका ड़र टपकता गया। कहा जा सकता हैं भीड़ के सहारे हर आदमी मजबूत दिखाई देता हैं,अलग-थलग पड़ते जाने पर असहाय सा महसूस करता हैं। जहां गुजरात में विहिप की एक आवाज से पूरा गुजरात बंद हो जाता था। तोगड़िया के गायब होने के बाद कार्यकर्ताओं की चक्का जाम का असर पहले जितना दिखाई नही दिया। तोगड़िया की घटती ताकत के बावजूद मोदी विरोधी खेमे को एक चेहरा तो मिल ही गया है। अपने विवादास्पद बयानों के लिए मशहूर रहे तोगड़िया आने वाले दिनों में भाजपा व मोदी के सामने ओर भी संकट पैदा कर सकते हैं।

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